हमने नौसेना के ध्‍वज से गुलामी के प्रतीक को हटाया,वही परिवर्तन अब अयोध्या में दिखा: नरेन्‍द्र मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने अयोध्या में भगवान श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण करने के बाद मंगलवार को अपने संबोधन में एक पुराने प्रसंग की याद दिलाते हुए कहा कि उनकी सरकार ने नौसेना के ध्‍वज से गुलामी के प्रतीक को हटाया और वही परिवर्तन आज अयोध्या में भी दिख रहा है। अयोध्या में ध्वजारोहण समारोह को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, ”हमें वह भारत बनाना है जो रामराज्य से प्रेरित हो और यह तभी संभव है जब स्वहित से पहले देश हित होगा, जब राष्ट्रहित सर्वोपरि रहेगा।” प्रधानमंत्री ने कहा कि ”हमारी व्यवस्था के हर कोने में गुलामी की मानसिकता ने डेरा डाल रखा था। आप याद करिये भारतीय नौसेना का ध्वज, जिस पर सदियों तक ऐसे प्रतीक बने रहे, जिनका हमारी सभ्यता, हमारी संस्कृति, हमारी विरासत से कोई संबंध नहीं था।”

उन्‍होंने कहा कि ”हमने नौसेना के ध्‍वज से गुलामी के प्रतीक को हटाया है। हमने छत्रपति शिवाजी महाराज विरासत को स्थापित किया है और यह सिर्फ एक डिजाइन में बदलाव नहीं हुआ, यह मानसिकता बदलने का क्षण था, यह वह घोषणा थी, कि भारत अब अपनी शक्ति अपने प्रतीकों से परिभाषित करेगा, न कि किसी और की विरासत को।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो सितंबर 2022 को कोच्चि में भारत के पहले स्वदेश निर्मित विमानवाहक पोत ‘आईएनएस विक्रांत’ के जलावतरण समारोह में नए ध्वज का अनावरण किया था। भारतीय नौसेना को उस दिन एक नया ध्वज मिला और इसके साथ ही उसने औपनिवेशिक पहचान को त्याग दिया। ब्रिटिश शासन से लेकर गणराज्य के प्रतीक तक यह झंडा सदियों में विकसित हुआ है। तब मोदी ने भारतीय नौसेना के नए निशान (ध्वज) का अनावरण करते हुए कहा था कि भारत ने औपनिवेशिक अतीत को त्याग दिया है। उन्होंने इसे छत्रपति शिवाजी महाराज को समर्पित करते हुए कहा था, ”आज दो सितंबर, 2022 की ऐतिहासिक तारीख को, इतिहास बदलने वाला एक और काम हुआ है। आज भारत ने गुलामी के एक निशान, गुलामी के एक बोझ को अपने सीने से उतार दिया है। आज से भारतीय नौसेना को एक नया ध्वज मिला है।

अयोध्या में मोदी ने कहा कि ”यह परिवर्तन आज अयोध्या में भी दिख रहा है। यह गुलामी की मानसिकता ही है कि इतने वर्षों तक रामत्व को नकारा गया है। भगवान राम अपने आप में एक ‘वैल्यू सिस्टम’ हैं।” उन्‍होंने बिना नाम लिए विपक्षी दलों के नेताओं पर तंज कसते हुए कहा, ”ओरछा के राजा राम से लेकर रामेश्वरम के भक्त राम तक और शबरी के राम से लेकर मिथिला के पाहुन राम तक, भारत के हर घर, हर भारतीय के मन, भारत के हर कण-कण में राम हैं, लेकिन गुलामी की मानसिकता इतनी हावी हो गई कि प्रभु राम को भी काल्पनिक घोषित किया जाने लगा।” प्रधानमंत्री ने लोगों को प्रेरित करते हुए कहा, ”अगर हम ठान लें तो अगले 10 साल में गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पा लेंगे और तब ऐसी ज्वाला प्रज्वलित होगी, ऐसा आत्‍मविश्‍वास बढ़ेगा कि 2047 तक विकसित भारत का सपना पूरा होने से देश को कोई रोक नहीं पाएगा।” उन्‍होंने उत्साहित करते हुए कहा कि आने वाले एक हजार वर्ष के लिए भारत की नींव तभी सशक्त होगी, जब मैकाले की गुलामी वाली परियोजना को अगले 10 साल में पूरी तरह ध्वस्त करके दिखा देंगे।

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