दैनिक यूपी ब्यूरो
14/10/2021  :  12:12 HH:MM
गांव से लेकर शहर में विद्युत आपूर्ति हुई सामान्य, त्योहारों के मद्देनजर योगी सरकार ने खरीदी महंगी बिजली
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कोयले की आपूर्ति में अचानक कमी आने से जहां अनेक राज्यों में बिजली का संकट गहराता जा रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश में विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था फिर से पटरी पर आ गई है। दरअसल, यूपी सरकार ने मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर महंगी बिजली खरीदकर विद्युत आपूर्ति को पटरी पर ला दिया है ताकि त्यौहार के मौसम में उत्तर प्रदेश के शहरों के साथ-साथ गांवों में भी रोशनी बरकरार रहे।

लखनऊ, (दैनिक यूपी ब्यूरो)। कोयले की आपूर्ति में अचानक कमी आने से जहां अनेक राज्यों में बिजली का संकट गहराता जा रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश में विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था फिर से पटरी पर आ गई है। दरअसल, यूपी सरकार ने मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर महंगी बिजली खरीदकर विद्युत आपूर्ति को पटरी पर ला दिया है ताकि त्यौहार के मौसम में उत्तर प्रदेश के शहरों के साथ-साथ गांवों में भी रोशनी बरकरार रहे।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में इन दिनों बिजली उत्पादन के संकट के दौर में औसतन 17 रुपये प्रति बिजली यूनिट में खरीदी जा रही है। जिससे कि गांव से लेकर शहर तक को अब तय शेड्यूल से ज्यादा बिजली आपूर्ति की जा रही है। इसी दौरान प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने भी प्रदेश के सभी निवासियों से बिजली की फिजूलखर्ची न करने का भी आह्वान किया है।

देश भर में भले ही कोयले की किल्लत से सूबे के कई बिजली घरों का उत्पादन ठप है। इसके बाद भी प्रदेशवासियों को फिर से तय शेड्यूल के मुताबिक बिजली आपूर्ति का दावा किया जा रहा है। एनर्जी एक्सचेंज की महंगी बिजली के दम पर प्रदेश का हर गांव तथा शहर रोशन है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद पावर कारपोरेशन प्रबंधन रातभर बिजली देने के लिए एक्सचेंज से औसतन 17 रुपये यूनिट तक की बिजली खरीद रहा है। पावर कारपोरेशन के गंभीर वित्तीय संकट को देखते हुए ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने प्रदेशवासियों का आह्वान किया है कि वह इतनी महंगी बिजली की फिजूलखर्ची कतई न करें।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में बिजली संकट मुद्दा न बनने पाए इसके लिए राज्य सरकार किसी भी कीमत पर प्रदेशवासियों को पहले से चले आ रहे शेड्यूल के मुताबिक बिजली आपूर्ति बनाए रखना चाहती है। पिछले सप्ताह कोयले की किल्लत से उत्पादन घटने पर गांव की बिजली आपूर्ति 18 के बजाय 12 घंटे ही रह गई। कस्बे और बुंदेलखंड में भी अतिरिक्त कटौती होने लगी। ऐसे में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को फिर पटरी पर लाने के लिए मुख्यमंत्री ने खुद कमान संभाली। निर्देश दिए कि प्रदेशवासियों को शाम छह से सुबह सात बजे के साथ ही शेड्यूल के मुताबिक बिजली सुनिश्चित की जाए। चूंकि कोयला आपूर्ति की स्थिति अभी भी सामान्य नहीं हो सकी है, इसलिए कारपोरेशन प्रबंधन अब एनर्जी एक्सचेंज से महंगी बिजली खरीद रहा है। पिछले चार दिनों से औसतन 17 रुपये प्रति यूनिट की दर से लगभग 88 करोड़ रुपये से 80 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी गई है। ऊर्जा मंत्री का कहना है कि सरकार निर्बाध बिजली आपूर्ति को लेकर गंभीर है।

बिजली आपूर्ति पर नजर रखने वाले लखनऊ में स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर मुख्यालय, गोमतीनगर में आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मंत्री ने कारपोरेशन के अध्यक्ष से लेकर सभी प्रबंध निदेशकों व अन्य को निर्देश दिए कि शेड्यूल के अनुसार बिजली दी जाए। पर्व के दौरान बिजली की कमी न होने पाए इसके लिए एक्सचेंज से पूरी पारदर्शिता के साथ बिजली खरीदी जाए। मंत्री ने कहा कि कटौती से राहत देने के लिए 17 रुपये यूनिट तक बिजली ली जा रही है। ऐसे में उपभोक्ताओं का भी परम दायित्व है कि वह वह सभी बिजली की बचत करते हुए आवश्यकतानुसार ही उसका उपयोग करें ताकि कारपोरेशन पर ज्यादा महंगी बिजली खरीदने का अतिरिक्त बोझ न पड़े। मंत्री ने बताया कि पूर्व की सरकारों से 10 हजार मेगावाट ज्यादा बिजली दी जा रही है।

अब शेड्यूल से ज्यादा बिजली आपूर्ति

वर्तमान में गांव को 18 घंटे, तहसील को 21.30 घंटे व बुंदेलखंड को 20 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है। शहर और उद्योग बिजली कटौती से मुक्त हैं। एक्सचेंज से बिजली लेने के बाद 12 अक्टूबर को गांव को 20.16, तहसील को 22.43 तथा बुंदेलखंड को 21.25 घंटे बिजली आपूर्ति की गई। इसी तरह 10 और 11 अक्टूबर को भी शेड्यूल से ज्यादा बिजली दी गई। चूंकि रातभर बिजली देना ही है इसलिए बुधवार को आपूर्ति का नया शेड्यूल भी जारी किया गया।

कोयले की कमी से 835 मेगावाट ही उत्पादन ठप

कोयले की कमी से राज्य में अब 835 मेगावाट ही बिजली का उत्पादन ठप है। इसमें उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के साथ ही रोजा व टांडा की भी यूनिटें है। अनपारा की 600 और ललितपुर की 660 मेगावाट की यूनिटें भी ब्यालर ट्यूब लीकेज (बीटीएल) के कारण भी बंद हो गई हैं। गौर करने की बात यह है कि सिर्फ उत्पादन निगम का ही अक्टूबर में लगभग 300 मिलियन यूनिट (औसतन 1050 मेगावाट) बिजली का उत्पादन ठप रहा। अगस्त से देखा जाए तो यह लगभग 530 मिलियन यूनिट है।






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