दैनिक यूपी ब्यूरो
12/06/2021  :  17:20 HH:MM
निजी और सामाजिक कर्तव्य पालन से जीत सकते हैं कोरोना की जंग
Total View  571

कोरोना काल में सरकार की ओर से जो भी प्रयास किए जा रहे हैं, उसमें जब प्रत्येक नागरिक की सहभागिता होगी, तो उसका सकारात्मक परिणाम आएगा। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और देश के तमाम वैज्ञानिकों ने जिस कोरोना उपयुक्त व्यवहार को अपनाने के लिए कहा है, प्रत्येक नागरिक उसका पालन कर लें, तो यह जंग जीती जा सकती है। दरअसल, समाज की गुणवत्ता नागरिकों के कर्तव्य पालन का परिणाम होती है। समाज का नियमन समाज द्वारा ही होता है। महाभारत में अति प्राचीन समाज का उल्लेख है कि ‘तब न राजा था न राजदंड था। सभी नागरिक स्वयं सामाजिक नियमों का पालन करते थे।’ फिर समाज में अराजकता बढ़ी। राज व्यवस्था का जन्म हुआ। प्राचीन भारत में विधि और नियम के उल्लंघन पर दंड का प्रावधान था। अब भी है, लेकिन कर्तव्य पालन ही आदर्श समाज की धुरी है। बीते साल भर से अधिक का समय हो चुका है। कोरोना वैश्विक महामारी के रूप में अपना कहर दिखा चुकी है। वैज्ञानिकों-डॉक्टरों और सरकार के प्रयास से कोरोना टीकाकरण अभियान जारी है। बावजूद इसके लोग कोरोना से संक्रमित हो रहे है और मर रहे हैं। इसके बीच चिंता की बात यह है कि लोग मास्क और शारीरिक दूरी के नियम की लगातार अवहेलना कर रहे हैं।


 

 

 

कोरोना काल में सरकार की ओर से जो भी प्रयास किए जा रहे हैंउसमें जब प्रत्येक नागरिक की सहभागिता होगीतो उसका सकारात्मक परिणाम आएगा। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और देश के तमाम वैज्ञानिकों ने जिस कोरोना उपयुक्त व्यवहार को अपनाने के लिए कहा हैप्रत्येक नागरिक उसका पालन कर लेंतो यह जंग जीती जा सकती है।

दरअसलसमाज की गुणवत्ता नागरिकों के कर्तव्य पालन का परिणाम होती है। समाज का नियमन समाज द्वारा ही होता है। महाभारत में अति प्राचीन समाज का उल्लेख है कि ‘तब न राजा था न राजदंड था। सभी नागरिक स्वयं सामाजिक नियमों का पालन करते थे।’ फिर समाज में अराजकता बढ़ी। राज व्यवस्था का जन्म हुआ। प्राचीन भारत में विधि और नियम के उल्लंघन पर दंड का प्रावधान था। अब भी हैलेकिन कर्तव्य पालन ही आदर्श समाज की धुरी है।

बीते साल भर से अधिक का समय हो चुका है। कोरोना वैश्विक महामारी के रूप में अपना कहर दिखा चुकी है। वैज्ञानिकों-डॉक्टरों और सरकार के प्रयास से कोरोना टीकाकरण अभियान जारी है। बावजूद इसके लोग कोरोना से संक्रमित हो रहे है और मर रहे हैं। इसके बीच चिंता की बात यह है कि लोग मास्क और शारीरिक दूरी के नियम की लगातार अवहेलना कर रहे हैं।

बीते साल जब शुरुआती दौर रहाउस समय प्रधानमंत्री द्वारा लॉकडाउन की घोषणा के समय लोगों में अल्पकालीन संयम दिखा। उसके बाद से नागरिक कर्तव्यों की अवहेलना हो रही है। हमें याद रखना चाहिए कि गर्मियों में जब लू चलती हैतो लोग देह ढक लेते हैं। इसी तरह शीत ऋतु में जरूरी वस्त्र भी पहन लेते हैंलेकिन प्राणलेवा कोरोना के प्रोटोकॉल का मजाक उड़ाया जा रहा है। आखिर क्यों ?

भारतीय समाज प्राचीन काल से ही विधि और मर्यादा के अनुशासन में रहता हैमगर आश्चर्य है प्राणहंता चुनौतियों के सामने हम साधारण संयम भी बताने को तैयार नहीं। हमारे संविधान में प्रत्येक नागरिक को मूल अधिकारों की प्रतिभूति है। साथ ही अनुच्छेद 51 (क) में मूल कर्तव्य भी हैं कि ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करें। वनझीलनदी और वन्य जीवों की भी रक्षा करें।’ इस अनुच्छेद में अनेक कर्तव्य हैं।

सभ्य समाज के नागरिक संस्कृतिसंविधान और विधि का स्वत: पालन करते हैं। दुनिया के अन्य समाजों की तरह भारतीय समाज भी आदिम मानव सभ्यता से आधुनिक सभ्यता तक आया है। अथर्ववेद में सामाजिक विकास के सूत्र बताते हैं कि पहले परिवार संस्था का विकास हुआ। परिवार नाम की संस्था में सभी सदस्यों के कर्तव्य निश्चित थे। अधिकार की कोई आवश्यकता नहीं थी। माता-पिता का कर्तव्य संतति का पालन-पोषण था। इस तरह पुत्र को उन्नति करने का अधिकार स्वतः: मिलता था। यह सामाजिक विकास का प्रथम चरण था। आगे कहते हैं कि ‘विमर्श के लिए लोगों का एकत्रीकरण होने लगा। इससे सभा का विकास हुआ। इससे नागरिक कर्तव्य निभाने और दूसरों को दायित्व बोध के लिए प्रेरित करने वाले लोग सभा के योग्य बने। वही सभ्य कहलाए।

हमारे मनीषियों ने कहा है कि सभ्यता का मूल तत्व है कर्तव्य पालनलेकिन कर्तव्य पालन की यह प्रवृत्ति लगातार घटती गई। वर्तमान में सर्वप्रथम कर्तव्य कोरोना उपयुक्त व्यवहार का पालन करना है। यही समय और देश की मांग है। जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमें निजी और सामूहिक कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। भारतीय समाज का बड़ा वर्ग विधि पालन करता हैपर समाज के एक गैर जिम्मेदार वर्ग द्वारा नागरिक कर्तव्यों की अवहेलना हो रही है। सामाजिक समझौता सिद्धांत के प्रवर्तक हॉब्स ने सभी मनुष्यों के मध्य एक अनुबंध का उल्लेख किया है कि ‘हम अपने ऊपर शासन करने के अधिकार इस सभा-समाज को देते हैं। यदि आप सब भी अपने ऊपर शासन करने के अधिकार इस सभा को स्थानांतरित करें।’ यह सभ्यता के विकास की प्राचीन मंजिल है। आत्मानुशासन में ही नागरिक कर्तव्य पूरे होते हैं और कर्तव्य पालन में ही समाज की गुणवत्ता है। हमने इस सूत्र को आत्मसात कर लियातो यकीन मानिए कोरोना से जंग में हमारी जीत तय है।






Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   4907194
 
     
Related Links :-
निजी और सामाजिक कर्तव्य पालन से जीत सकते हैं कोरोना की जंग
थोड़ी खुशी, थोड़ा गम: मोदी सरकार के बजट में राहत के 5 बड़े ऐलान, मगर ये पांच झटके भी हैं
मकई का चीला
चेहरा की सुंदरता बनाए रखने के लिए
सपने में इन जीव-जंतुओं को देखने से बनते हैं खास योग
शहद के नाम पर शुगर सीरप तो नहीं पी रहें
कोरोना काल मे बढ़ी कंडोम की खरीदारी
अस्थमा पर इन घरेलू नुस्खों से पाएं काबू
सूर्य स्नान इम्युन सिस्टम से लेकर त्वचा रोग, कैंसर समेत कई घातक बीमारियों में लाभदायक
खाली पेट इन फूड्स का सेवन न करें
 
CopyRight 2016 DanikUp.com