दैनिक यूपी ब्यूरो
22/01/2021  :  23:26 HH:MM
चीन का साथ छोड़ रहे कई देश, भारत से कर रहे कोरोना वैक्सीन की मांग
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कोरोना वायरस महामारी पर चीन लगातार घिरता रहा है। उस पर महामारी को लेकर कई अहम जानकारियों को छिपाने जैसे गंभीर आरोप लगते आए हैं। पहले से ही कई मोर्चों पर घिरे चीन को अब कोरोना वैक्सीन पर भी झटका लगा है।

नई दिल्ली | कोरोना वायरस महामारी पर चीन लगातार घिरता रहा है। उस पर महामारी को लेकर कई अहम जानकारियों को छिपाने जैसे गंभीर आरोप लगते आए हैं। पहले से ही कई मोर्चों पर घिरे चीन को अब कोरोना वैक्सीन पर भी झटका लगा है। ब्राजील, कंबोडिया जैसे देशों ने, जिन्होंने चीन से या तो टीका खरीद लिया था या फिर उन्हें ऑफर किया गया था, भारत का रुख किया है। ये देश भारत की एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की मांग कर रहे हैं। मालूम हो कि चीन की कोरोना वैक्सीन के सुरक्षित होने पर भी सवाल खड़े होते रहे हैं। कोरोना वैक्सीन की कमर्शियल सप्लाई और अनुदान सहायता के लिए भारत को लगातार अनुरोध मिल रहे हैं। यह तब से और बढ़ गया, जबसे नई दिल्ली ने सात पड़ोसी देशों के लिए कोविशील्ड की 50 लाख खुराकें निकाली हैं। इस वैक्सीन को भारत की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की मदद से बनाया गया है।
भारत ने ब्राजील को कमर्शियल सप्लाई के रूप में शुक्रवार को टीकों के 20 लाख डोज दिए। वहां एस्ट्राजेनेका वैक्सीन और सिनोवैक के कोरोनावैक वैक्सीन के बीच राष्ट्रपति जायर बोल्सनारो और कई राज्यपालों के बीच मतभेद हैं। इसमें साओ पाउलो के गवर्नर जोआओ डोरिया भी शामिल हैं, जिन्हें साल 2022 की राष्ट्रपति पद की दौड़ के लिए बोल्सनारो के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जा रहा है। बोल्सनारो ने 8 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोविशिल्ड की 20 लाख खुराकों को भेजने में तेजी लाने के लिए लिखा था क्योंकि, उन्हें उसी सप्ताह राष्ट्रपति महल से टीकाकरण अभियान शुरू करने की उम्मीद थी। हालांकि, उस समय भारत को अपना टीकाकरण अभियान शुरू करना था और अधिकारी वैक्सीन अनुदान और कमर्शियल सप्लाई शुरू करने को लेकर काम कर रहे थे।
डोरिया ने बाद में कोरोनावैक के साथ टीकाकरण अभियान की शुरुआत की और ब्राजील ने अपनी इस मुहिम में 23 करोड़ जनता को शामिल करने की योजना बनाई। इस पूरे मामले से वाकिफ सूत्रों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि ब्राजील का इरादा एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के खरीदने एवं बनाने का है। वहीं, इंडोनेशिया, जिसे चीन की कोरोनावैक की 30 लाख डोज मिल चुकी हैं, भी भारत से एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन खरीदने की योजना बना रहा है। इंडोनेशिया की इंडोफार्मा कंपनी कोविशील्ड बनाने वाली सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ संपर्क में है। मामले से जानकार एक शख्स ने कहा, ''उम्मीद है कि यह जल्द ही मिल जाएगी।'' 
कंबोडिया ने भी भारत से मांगी कोरोना वैक्सीन
इसके अलावा, सोमवार को कंबोडियाई प्रधानमंत्री हुन सेन ने भारतीय दूत देवयानी खोबरागड़े के साथ एक बैठक के दौरान भारत से वैक्सीन सहायता के लिए अनुरोध किया। नोम पेन्ह के अधिकारियों ने कहा कि देश कोविशिल्ड और कोवाक्सिन दोनों में रुचि रखता है, जिसे भारत बायोटेक द्वारा बनाया गया है, क्योंकि वे कंबोडिया के तापमान के लिए उपयुक्त हैं। मालूम हो कि चीन, कंबोडिया का सबसे बड़ा समर्थक रहा है और लगातार कर्ज मुहैया कराता रहा है। चीन ने कई बिलियन डॉलर का कंबोडिया को कर्ज दिया है। कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भी चीन ने पांच लाख लोगों के टीकाकरण के लिए 10 लाख डोज दिए हैं। हालांकि, लोगों ने बताया है कि कंबोडिया को एक करोड़ 70 लाख की जनता के लिए और अधिक वैक्सीन की डोज की जरूरत होने जा रही है।
चीन की वैक्सीन पर खड़े हो रहे सवाल
ब्राजील में चीन की वैक्सीन कोरोनावैक के ट्रायल में 50 फीसदी के करीब प्रभावी होने के बाद सवाल खड़े हो रहे हैं। मालूम हो कि यह प्रभाव एस्ट्राजेनेका, मॉडर्ना और फाइजर की वैक्सीन से काफी कम है। वहीं, इंडोनेशिया में हुए ट्रायल में चीनी वैक्सीन 65.3 फीसदी प्रभावी पाई गई है। जहां, सिनोवैक कई देशों में ट्रायल कर रहा है तो वहीं, एक्सपर्ट्स उसके पूरे डाटा को रिलीज नहीं किए जाने को लेकर सवाल भी खड़े कर रहे हैं। वेइल कॉर्नेल मेडिसिन के एक वैक्सीन शोधकर्ता जॉन मूर ने एनपीआर को बताया कि यह प्रेस रिलीज द्वारा किया जा रहा विज्ञान है। इसमें पारदर्शिता काफी कम है।






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