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दैनिक यूपी ब्यूरो
26/09/2016  :  09:43 HH:MM
अमेरिका इजरायल की तरह जवाब दे भारत
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पाकिस्तान के साथ सिंधु नदी समझौते की प्रधानमंत्री समीक्षा कर रहे हैं। समझौता एक्सप्रेस को लेकर तरह तरह की अटकलें हैं। पाकिस्तान को दी गई तमाम रियायतें भारत ख़त्म कर सकता है। ये चर्चा भी सियासी गलियारे में है। लेकिन लाख टके का सवाल बना हुआ है कि क्या भारत अमेरिका इजराइल जैसे देशों की तरह अपने ऊपर होने वाले हमलों का जवाब देने का साहस जुटा पायेगा। या देशवासियों को एक बार फिर जुबानी जंग देखने के बाद गले मिलने का आडम्बर ही देखने को मिलेगा।


अमेरिका - इजराइल की तरह जवाब दे भारत
पाकिस्तान के साथ सिंधु नदी समझौते की प्रधानमंत्री समीक्षा कर रहे हैं। समझौता एक्सप्रेस को लेकर तरह तरह की अटकलें हैं। पाकिस्तान को दी गई तमाम रियायतें भारत ख़त्म कर सकता है। ये चर्चा भी सियासी गलियारे में है। लेकिन लाख टके का सवाल बना हुआ है कि क्या भारत अमेरिका इजराइल जैसे देशों की तरह अपने ऊपर होने वाले हमलों का जवाब देने का साहस जुटा पायेगा। या देशवासियों को एक बार फिर जुबानी जंग देखने के बाद गले मिलने का आडम्बर ही देखने को मिलेगा।
दरअसल कुत्ते की पूँछ कभी सीधी नहीं हो सकती। ये कहावत पाकिस्तान के मामले में एकदम सटीक साबित होती है। पाकिस्तान एक राष्ट्र के रूप में अपनी गरिमा खो चुका है। आतंकवाद इसकी आत्मा में रच बस गया है। खुद भी बार बार शिकार होने के बावजूद पाकिस्तान की हालत उस नशेड़ी की तरह हो गई है जो जानता है कि नशा बर्बादी की जड़ है लेकिन उस नशे के आगोश में ही उसे आनंद भी मिलता है।
 उरी की घटना अकेली घटना नहीं है। जिसकी वजह से देश के रूप में पाकिस्तान के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा किया जाए। गैर जिम्मेदाराना तरीके से दुनिया की सभ्यता और भरोसे को कलंकित करने की लंबी फेहरिश्त है। मुम्बई हमला हो, देश की संसद पर हमला हो, पठानकोट के एयरबेस को निशाना बनाने की नापाक हरकत हो या फिर उरी में भारत को ललकारने की दुस्साहसिक वारदात। ये चंद घटनाएं हैं जिनका उल्लेख कर रहा हूँ। लेकिन कोई भी साल ऐसा नहीं बीतता जब पाकिस्तान के पाले पोसे आतंकवादी निर्दोष लोगों को निशाना नहीं बनाते हों। हर बार पाकिस्तान की जमीन का उपयोग करके खूनी खेल खेला जाता है।
 भारत के अलग अलग हिस्सों में लोग शिकार हो,या फिर अफगानिस्तान या बांग्लादेश सहित किसी अन्य हिस्से में। हर बार खून मानवता का होता है। वहशी हत्यारे अट्टहास करते हैं। जश्न मनाया जाता है। दुनिया की आँख में धूल झोंकने के लिए कई बार निंदा के स्वर भी इसी धरती से सुनाई पड़ते हैं। लेकिन एक घटना के बाद ही शुरू हो जाती है फिर दूसरी नापाक साजिश। हाफिज सईद और सैयद सलाहुद्दीन जैसे आतंकी सरगना पाकिस्तानी हुक्मरानों के दामाद की तरह रहते हैं।
किसी भी घटना के बाद पाकिस्तान ने संजीदगी दिखाकर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी अंदाज से अलग हटकर दोस्ती की पहल में कई कदम आगे बढ़ाये। वे नवाज के घर तक शादी समारोह में हो आये। लगा पाकिस्तानी नेतृत्व की आँखों में कुछ शर्म आ गई होगी। इसके बाद पठानकोट हमले पर पाकिस्तानी हुक्मरान का कार्रवाई का नाटक देखने को मिला। उनकी जांच टीम भारत तक चली आई। लेकिन बदले में क्या हुआ सबको पता है। पठानकोट के साजिशकर्ताओं  पर कार्रवाई को कौन कहे भारत की जांच टीम को पाकिस्तान जाने की इजाजत भी नहीं दी गई।
 दरअसल उन लोगो की चेतावनी अनायास नहीं थी जिन्हें नवाज की पुरानी दोस्ती याद है। कारगिल के पहले भी दोस्ती का ऐसा ही स्वांग रचा गया था। और जब हिंदुस्तान का भरोसा छलनी हुआ तो उस वक्त भी पाकिस्तान में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ही थे। हमें नहीं भूलना चाहिये कि ये पाकिस्तान का राष्ट्रीय चरित्र है। वहां प्रधानमंत्री कोई भी हो शासन सत्ता की डोर आईएसआई और पाक सेना के हाथ में ही रही है। जो भी इससे अलग राह बनाने की कोशिश करता हुआ उसका हश्र भी इतिहास में दर्ज है। नवाज इसे बखूबी जानते हैं। इसलिये उन्हें मौके के मुताबिक नाट्यमंचन करने में कोई परेशानी नहीं होती। 
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा चोर की दाढ़ी में तिनका। उन्होंने इस कहावत का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि उरी घटना के बाद पाकिस्तान ने सार्क देशों के सुरक्षा विशेषज्ञों की बैठक में अपने प्रतिनिधि को नहीं भेजा। लेकिन वाकई में दाढ़ी में तिनका देखने की जरुरत नहीं है। चोर कौन है पूरी दुनिया को पता है। उरी घटना के बाद इस चोर नहीं बल्कि हत्यारे देश को सजा देने का वक्त आ गया है। अब देश भाषणों की नहीं करवाई का इंतजार कर रहा है। युद्ध कोई नहीं चाहता लेकिन बार बार एक राष्ट्र के रूप में हमारी संप्रभुता को चुनौती देने वालों को करारा जवाब तो मिलना ही चाहिए।
उरी में सेना के ब्रिगेड मुख्यालय में हुए आतंकी हमले में 18 सैनिक शहीद हुए और करीब इतने ही जीवन की लड़ाई अस्पतालों में लड़ रहे हैं। हमलावर पाकिस्तान से आये थे। सीमा पार करके आये थे। उनके पास मौजूद साजो सामान, जीपीएस , रडार सिस्टम सबकुछ पाकिस्तान का पाप बयान करने के लिए काफी हैं। लेकिन दुश्मन देश इसे स्वीकार करेगा ये स्वप्न किसी को भी नहीं देखना चाहिए। इसलिए अब हमें उसकी ओर देखने की जरुरत नहीं है। सवा सौ करोड़ लोगों की ताकत क्या होती है इसका पता दुश्मनो को चलना चाहिए। सीधे युद्ध के मैदान में जाने की जरुरत भी नहीं होगी। अगर हम वाकई में दुनिया को समझा पाए कि पाकिस्तान एक देश नहीं बल्कि आतंकियों द्वारा संचालित एक भूभाग है। बिलकुल वैसे ही जैसे आईएसआईएस के कब्जे वाले इलाके। यहाँ रह रहे अमन पसंद लोग भी आतंकियों के चंगुल से निकलने को बेताब हैं। दुनिया एक स्वर में बोले,एक तरह से सोचे। आतंक को अपने अलग अलग चश्मे से देखना छोड़े। निश्चित ही हमारे पड़ोस का नासूर भी खत्म होगा। प्रधानमंत्री मोदी से ऐसे ही संकल्प से आगे बढ़ने की उम्मीद पूरे देश को है।
जय हिंद।






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