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दैनिक यूपी ब्यूरो
26/08/2016  :  16:17 HH:MM
धर्म से सीखे स्वच्छता का संदेश
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मनु स्मृति में धर्म के दस लक्षण बताये गए। याज्ञवल्क्य ऋषि ने नौ लक्षण बताये। श्रीमद भागवत के सप्तम स्कन्ध में सनातन धर्म के तीस लक्षण बताये गए। इन सभी में एक साझा लक्षण स्वच्छता का है। आप धर्म,पुराण,उपनिषद के पन्नों को उलटिये आपको स्वच्छता का अन्तर्निहित सन्देश जरूर मिलेगा।

मनु स्मृति में धर्म के दस लक्षण बताये गए। याज्ञवल्क्य ऋषि ने नौ लक्षण बताये। श्रीमद भागवत के सप्तम स्कन्ध में सनातन धर्म के तीस लक्षण बताये गए। इन सभी में एक साझा लक्षण स्वच्छता का है। आप धर्म,पुराण,उपनिषद के पन्नों को उलटिये आपको स्वच्छता का अन्तर्निहित सन्देश जरूर मिलेगा। केवल हिन्दू धर्म ही नहीं इस्लाम,क्रिश्चियन,पारसी,यहूदी हर धर्म की आत्मा स्वच्छता में निहित है। लेकिन दुर्भाग्य से हमारे देश में आस्था का जनसैलाब धर्म के इस मूल सन्देश को समझने में गंभीर चूक करता रहा है। हमारे धार्मिक स्थल भी उतने साफ़ सुथरे नहीं हो पाए जैसा होना चाहिए। यूरोपीय देशों की तुलना में हम मीलों पीछे है। हमारी पवित्र नदियां गंदगी का शिकार हैं। हमारे पर्यटन स्थल, महत्वपूर्ण इमारतें सार्वजनिक स्थल, कहीं भी जाइये गंदगी मन को परेशान करती है। सरकार के खजाने से करोड़ों रूपए खर्च होते रहे लेकिन न तो स्थिति बदली न हमारी सोच। महात्मा गंदगी स्वच्छता का संदेश जन जन तक पहुँचाना चाहते थे। वे अपने भाषणों में इसका उल्लेख करते थे। शायद इसलिए क्योंकि उनके व्यक्तित्व में आध्यात्मिकता रची बसी थी। वे धर्मग्रंथो का संदेश ही सही मायने में लोगों तक पहुँचाना चाहते थे। लेकिन बाद के राजनेताओं,धर्मगुरुओं ने शायद इस चेतना का ध्वज उस तरीके से नहीं थामा जैसी देश को जरुरत थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक नई पहल शुरु की है। सरकार के सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में स्वच्छता अभियान शामिल है। लेकिन ये कार्यक्रम लोगों की सोच बदले बिना कामयाब होगा ये सोचना भी मुश्किल है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि सोच बदलने में सबसे ज्यादा कारगर और प्रभावी भूमिका हमारी धार्मिक संस्थाएं और धर्मगुरु निभा सकते हैं। ये सभी धर्मगुरुओं का साझा एजेंडा होना चाहिए। 
  ईश्वर,खुदा,जीसस आखिर गंदे स्थान पर कैसे वास कर सकते हैं। ये सन्देश आमजन तक पहुँचाना ही होगा। धार्मिक आस्थाएं कोई भी हों इसका संदेश एक है आंतरिक शुचिता और वाह्य शुचिता। यानी हम अपने अंदर से जितने पवित्र भाव को समाहित करें उतना ही हमारा वाह्य वातावरण शुद्ध और पवित्र हो। सच तो ये है कि दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। जब तक हमारे आसपास का वातावरण साफ़ सुथरा नहीं होगा हम आंतरिक शान्ति भी हासिल नहीं कर सकते।
हमारा घर साफ़ हो,हमारे घर के बाहर गली और सड़क साफ़ हो, हम जिन स्थलों पर जाते हैं वे साफ़ सुथरे हों, मंदिर,मस्जिद, गुरूद्वारे साफ़ हों,पर्यटन स्थल साफ़ सुथरे हों,गंगा,यमुना अपने पुराने रूप में आएं तो निश्चित रूप से देश की तश्वीर साफ़ सुथरी होगी।
कौन चाहता है कि हमारा आशियाना गंदा हो। लेकिन इसे साफ़ रखने के लिए प्रयास भी करना होगा। आज पूरी दुनिया में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण को लेकर नई जाग्रति आई है। भारत भी इसमें बराबर का साझेदार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो अक्टूबर 2014 को स्वच्छता अभियान की शुरुआत की तो उन्होंने एक संकल्प भी देश के सामने जाहिर किया था कि देश की तश्वीर 2019 तक बदलना चाहिए। इस संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने स्वच्छता दूत नियुक्त किये। बड़े बड़े सेलिब्रेटीज को नामित किया गया। लेकिन किसी शंकराचार्य,मौलवी,फादर का नाम इस सूची में नहीं था।
मेरा मानना है कि धार्मिक संस्थानों को भी नामित किया जाना चाहिए। करोङो का चंदा हासिल करने वाले धर्म संस्थान अपने चैरिटी अभियान में स्वच्छता को शामिल करें । हर प्रवचन,इबादत में स्वच्छता का मर्म बताया जाए। मंदिर,मस्जिद,गुरुद्वारों और चर्च से स्वच्छता की शपथ दिलायी जाए। भक्त और अनुगामियों को बताया जाए कि वे अगर एक गरीब के घर में शौचालय बनाते हैं तो ये भी बड़ा धार्मिक दान है। अगर विद्यालय,अस्पताल और सार्वजानिक स्थलों को साफ़ सुथरा बनाने के लिए झाड़ू उठाते हैं तो ये भी प्रभु की पूजा से कम नहीं।
हमारी नदियां पवित्र हों,हमारे सभी महत्वपूर्ण स्थल साफ़ हों ये संकल्प जनभागीदारी से ही पूरा होगा। लोग जाग्रत,जागरूक होंगे तो देश सचमुच बदलने लगेगा। जन जन को जागरूक करने का बीड़ा धर्म प्रतिष्ठानों को उठाना ही होगा।
केवल रस्मी तरीके से नहीं बल्कि व्यवहार में ये साफ़ झलकना चाहिए। घर में पूजा से पहले उस स्थान को साफ किया जाता है। लोगों को समझाना होगा कि कण कण में भगवान, अल्लाह, मौजूद है तो आखिर हम कहीं भी गंदगी क्यों फैलाएं। गांधी जी ने कहा था हमें नेता और धर्मगुरु के रूप में लोगों के सामने नहीं आना है बल्कि खुद हाथ में झाड़ू लेकर सामने आना होगा। गांधी जी ने इसे आत्मसात किया था। पूरे जीवनकाल में इस संदेश को वे नहीं भूले।
आज प्रधानमंत्री मोदी का संकल्प भी कमतर नहीं हैं। वे लोकप्रिय प्रधानमंत्री हैं। उनका खासा प्रभाव सभी संस्थाओं पर है। उन्हें स्वयं धर्मगुरुओं से बात करनी चाहिए। नेताओं और संस्थाओं को प्रेरित करना चाहिए कि केवल फोटो खिंचवाने भर से नहीं बल्कि सच्चे मन से इस सरोकार को अपनाना होगा। याद रखना होगा कि कोई भी संकल्प सच्चे मन से ही पूरा हो सकता है। कोई भी पूजा,इबादत सफल हो इसके लिए नीयत को दुरुस्त रखने की जरुरत होती है। सही नीति और नीयत से हमें बिना इंतजार किये आगे बढ़ना चाहिए। धर्म कर्म की यही सत्प्रेरणा है। आइये स्वच्छता अपनाकर ईश्वर का स्वयं से साक्षात्कार करें।






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