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दैनिक यूपी ब्यूरो
04/07/2016  :  09:31 HH:MM
जरूर पढ़े बेहद खतरनाक होता आतंक का क्रूर चेहरा
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ये पूरी दुनिया के लिए संक्रमण काल है। आतंक का नेटवर्क पहले भी काफी व्यापक था। लेकिन उसके चेहरे स्पष्ट थे। हमें पता था कि अलकायदा कहाँ है। लश्कर कहाँ है। तालिबान कहाँ है। इनके आका कौन हैं। और इनका इन्ट्रेस्ट क्या है। लेकिन आतंक का नया चेहरा बेहद भयावह है। इसके रंग,रूप, आकार का पता लगा पाना बेहद कठिन।

आतंक का क्रूर चेहरा और पाकिस्तान
विशेष आलेख
बग़दाद में आतंक का क्रूर चेहरा फिर से नजर आया। ढाका हमले के ठीक एक दिन बाद हुए इस हमले ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। ढाका हमले के दर्द से हम संभल पाते। कुछ सोच पाते। कोई योजना बनती।  इसके पहले ही खबर आना शुरू हो गई कि बग़दाद में भयंकर विस्फोट ने 130 से ज्यादा लोगों को मौत की नींद सुला दिया है। दरअसल ये पूरी दुनिया के लिए संक्रमण काल है। आतंक का नेटवर्क पहले भी काफी व्यापक था। लेकिन उसके चेहरे स्पष्ट थे। हमें पता था कि अलकायदा कहाँ है। लश्कर कहाँ है। तालिबान कहाँ है। इनके आका कौन हैं। और इनका इन्ट्रेस्ट क्या है। 
लेकिन आतंक का नया चेहरा बेहद भयावह है। इसके रंग,रूप, आकार  का पता लगा पाना बेहद कठिन। इनका इन्ट्रेस्ट समझना भी उतना ही मुश्किल। क्योंकि आईएसआईएस ने आतंक के अपने नेटवर्क को वैचारिक आवरण देकर ग्लोबल बना दिया है। एक विचार पर पल रहा है नया ग्लोबल आतंक।
सीरिया में ख़ास मकसद से शुरु हुई लड़ाई पूरी दुनिया में फैल रही है। आईएस का दुनिया के अलग अलग देशों में फैले स्थानीय आतंकी नेटवर्क से गठजोड़ हो रहा है। इसके लिए बगदादी या उनकी कोर टीम को खास मेहनत भी नहीं करनी पड़ रही है। इस्लामिक राष्ट्र की कपोल कल्पित अवधारणा को लेकर दुनिया भर में आईएसआईएस के प्रति  गुमराह युवको का जमावड़ा बढ़ रहा है। ऑनलाइन भर्तियां हो रही हैं। इस खतरे का आकलन करने में अमेरिका,भारत या दुनिया की कोई भी ताकत कितना भी विमर्श कर लें,सबको एक बात समझनी होगी आतंक साझा खतरा है। वह किसी भी रूप में हो।
हरेक आतंकी संगठन आईएस जितना ही खतरनाक है। आतंकी हमलों की जमीन अलग हो सकती है मकसद सबका एक है। नफरत और हिंसा की राह पर चलकर दुनिया के अमन पसंद लोगों का चैन छीनना और उनका जीना मुश्किल करना, यही इनका मिशन है।
पूरी दुनिया को एक साथ एक स्वर से इस बीभत्स चेहरे के खिलाफ खड़ा होना होगा। बिना ये सोचे हुए  कि इससे कौन सा देश प्रभावित हुआ। क्योंकि ये मान लेना चाहिये कि जहाँ हमला नहीं हुआ हो सकता है अगली बारी उनकी ही हो।
दुर्भाग्य से हम जिस देश में रहते हैं उसकी सीमाओं की हर तरफ खतरा बढ़ता जा रहा है। बांग्लादेश हो, पाकिस्तान या फिर अफगानिस्तान यहाँ कोई भी अस्थिरता हमें प्रभावित करती है। यहाँ पनप रहा आतंक का नेटवर्क सीधे तौर पर हमारे हितों पर चोट करता है। ऐसे में अगर कोई देश भी गैर जिम्मेदार रवैया अपनाये तो चिंता बढ़नी स्वाभाविक है। दुर्भाग्य से पाकिस्तान ऐसे ही देशों में शामिल है। खुद आग में झुलसने के बावजूद पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल  दूसरों को झुलसाने के लिए किया जा रहा है। वहां बैठे हुक्मरान अभी भी मानकर बैठे हैं कि हमारी एक आँख फूटे तो ठीक पडोसी की दोनों आँखे फूटनी चाहिए।
ज्यादा बड़ा दुर्भाग्य ये है कि चीन और बहुत हद तक अमेरिका को भी ये बात नहीं समझ आ रही है कि पाकिस्तान का खतरा पूरी दुनिया के लिए कितना बड़ा है। 
बांग्लादेश की सरकार ने ढाका के हमले में आईएस का हाथ होने से इंकार किया है। कहा जा रहा है आईएसआई की मदद से स्थानीय संगठनों ने हमले को अंजाम दिया है। आईएसआई की भूमिका की जांच हो रही है। क्या सच है शायद कूटनीतिक दांव पेंच में उलझकर रह जायेगा। लेकिन इतना जरूर है कि आईएसआईएस की आड़ में कई आतंकी संगठन और गैर जिम्मेदार राष्ट्र अपनी हरकतों को ढंकने की कोशिश कर रहे हैं। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने आगाह भी किया है कि कई कट्टर संगठन आईएस के नाम का इस्तेमाल भय और भ्रम फैलाने के लिए कर रहे है।
दरअसल अब ये एक्शन का वक्त है। जब तक हम चेतेंगे कही देर न हो जाए। इसलिए पूरी दुनिया के जिम्मेदार राष्ट्रों को बिना देर किये एक साझा नेटवर्क बनाकर आतंक के खिलाफ साझा अभियान छेड़ना चाहिए। केवल आईएस के खिलाफ नहीं  बल्कि लश्कर,जमात,तालिबान,जैश से लेकर हर कोने में किसी भी नाम से सांस ले रहे संगठनो को संदेश एक स्वर से जाना चाहिए कि बस अब तुम्हारा समय समाप्त हो चुका है। वर्ना निजी हितों में बंटी दुनिया को हर रोज नए देश या इलाके में ऐसे ही विस्फोट या मारकाट के लिए तैयार रहना चाहिए। इसलिये झूठे आंसू नहीं बड़ा संकल्प और कड़ा तेवर दिखाना होगा। जय हिन्द।






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