दैनिक यूपी ब्यूरो
31/05/2016  :  20:37 HH:MM
पुलिसकर्मियों की मनमानी बर्खास्तगी अवैध: उच्च न्यायालय
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विभागीय जांच अथवा कार्यवाही किये बगैर किसी कांस्टेबल एवं पुलिस अधिकारी को सीधे सेवा से बर्खास्त करना गलत और असंवैधानिक करार दिया है।

इलाहाबाद
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विभागीय जांच अथवा कार्यवाही किये बगैर किसी कांस्टेबल एवं पुलिस अधिकारी को सीधे सेवा से बर्खास्त करना गलत और असंवैधानिक करार दिया है।न्यायालय ने कहा है कि इस प्रकार के बर्खास्तगी का आदेश जिसमें कांस्टेबल को सुनवाई का मौका भी नहीं दिया गया हो ऐसे आदेश के खिलाफ विभागीय अपील और रिवीजन करने को विवश नहीं किया जा सकता।अदालत ने आरक्षी के वकील विजय गौतम के इस दलील को सही माना कि अपराध चाहे कितना भी बड़ा हो, परन्तु किसी भी सिपाही की सीधे बर्खास्तगी से पहले अधिकारी को यह स्पष्ट करना होगा उस आरक्षी के विरुद्ध जांच अथवा विभागीय कार्रवाई किया जाना युक्तियुक्त और व्यवहारिक क्यों नहीं है।यह निर्णय न्यायमूर्ति वी के शुक्ला और न्यायमूर्ति यू सी श्रीवास्तव की खण्डपीठ ने कांस्टेबल सत्येन्द्र कुमार वर्मा की विशेष अपील पर दिया है।
आरक्षी सत्येन्द्र ने तीन मार्च 2016 को उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षाओं के लिए जीआईसी मेरठ के लालकुर्ती क्षेत्र में सुरक्षा गार्ड की ड्यूटी के दौरान नशे की हालत में लैब सहायक नागेन्द्र कुमार की सरकारी रायफल से उसके सीने में गोली मार दी थी।इससे घटनास्थल पर ही उसकी मृत्यु हो गयी थी।इस घटना में कई अन्य लोग घायल भी हो गये थे।घटना की प्राथमिकी लालकुर्ती थाने में दर्ज करायी गयी।कानून व्यवस्था की बिगड़ती हालत को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ ने आरोपी कांस्टेबल को बर्खास्त कर दिया तथा कहा कि मामला गंभीर और संवेदनशील है।ऐसी स्थिति में आरक्षी के खिलाफ जांच तथा विभागीय कार्यवाही व्यवहारिक नहीं है।याची आरक्षी के अधिवक्ता विजय गौतम का तर्क था कि किसी भी पुलिस अधिकारी को 1991 की नियमावली के नियम 8 1⁄421⁄2 बी के तहत बर्खास्तगी की कार्यवाही विरलतम से विरल मामले में ही की जानी चाहिए।बहस थी कि पुलिसकर्मी का पक्ष सुने बगैर उसे बर्खास्त करना असंवैधानिक है।न्यायालय ने इसी के साथ बर्खास्तगी का तीन मार्च के आदेश तथा एकल जज के आदेश दिनांक पांच मई को रद्द कर दिया।






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