दैनिक यूपी ब्यूरो
31/05/2016  :  12:46 HH:MM
औद्यानिक फसलों के विकास से उत्तराखण्ड में खुशहाली सम्भव
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खेती की बजाय औद्यानिक फसलों के विकास को उचित माहौल मिलने से क्षेत्र का आर्थिक विकास अपेक्षाकृत तेजी से सम्भव है।

लखनऊ 
उत्तराखण्ड क्षेत्र में सदियों पुरानी तकनीक से की जा रही पारम्परिक खेती की बजाय औद्यानिक फसलों के विकास को उचित माहौल मिलने से क्षेत्र का आर्थिक विकास अपेक्षाकृत तेजी से सम्भव है।उत्तराखण्ड विकास के शोध कार्य में पिछले दो दशक से लगे गिरी विकास संस्थान के डा0 जी एस मेहता ने यह विचार आज यहां एक भेंट के दौरान व्यक्त किये।डा0 मेहता ने बताया कि इस क्षेत्र के भूमि की विविधता एवं उपलब्ध क्षमता के आधार पर परम्परागत ढंग से की जा रही खेती की अपेक्षा औद्योगिक फसलों का उत्पादन अधिक लाभकर व रोजगार सृजक है।इस परिवर्तन से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में गुणात्मक परिवर्तन सम्भव है।ब्रिटिश काल से ही केन्द्र तथा राज्य सरकारों की उपेक्षाओं का शिकार रहे उत्तराखण्ड के कई जिले आज भी उद्योग विहीन हैं।जिस कारण वहां के 92 प्रतिशत लोग सिर्फ खेती पर निर्भर हैं।सदियों पुरानी तकनीकि से किसानों के लिए सालभर तक का अनाज भी पैदा नहीं हो पाता है।इक्यावन दशमलव पच्चीस हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले उत्तराखण्ड के केवल 678 हजार हेक्टेयर वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में खेती की जा रही है जिसमें भी दो तिहाई कृषि भूमि में सिंचाई के साधन उपलब्ध नहीं हैं।






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