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दैनिक यूपी ब्यूरो
19/05/2016  :  18:24 HH:MM
इतिहास बदला राजनीतिक भूगोल भी
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भारतीय राजनीति की अद्भुत घटना। असम में भाजपा की जीत। इतिहास करवट बदल रहा है। राजनीतिक दलों का भूगोल बदल रहा है। कभी कन्याकुमारी से कश्मीर तक फैले होने का दावा करने वाली कांग्रेस आज 5 - 6 राज्यों तक सिमटकर छेत्रीय दलों की हैसियत में आती जा रही है। दूसरी तरफ दो लोकसभा सीटों से शुरुआत करके 2014 में भाजपा का लोकसभा में प्रचंड बहुमत और आज नार्थईस्ट के एक राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार। निश्चित ही ये भाजपा और संघ के लिए स्वर्णिम काल है।

इतिहास बदला,राजनीतिक भूगोल भी
अंजना पाराशर
भारतीय राजनीति की अद्भुत घटना। असम में भाजपा की जीत। इतिहास करवट बदल रहा है। राजनीतिक दलों का भूगोल बदल रहा है। कभी कन्याकुमारी से कश्मीर तक फैले होने का दावा करने वाली कांग्रेस आज  5 - 6 राज्यों तक सिमटकर छेत्रीय दलों की हैसियत में आती जा रही है। दूसरी तरफ दो लोकसभा सीटों से शुरुआत करके 2014 में भाजपा का लोकसभा में प्रचंड बहुमत और आज नार्थईस्ट के एक राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार। निश्चित ही ये भाजपा और संघ के लिए स्वर्णिम काल है।
अटल जी कहते थे कमल खिलेगा अँधियारा छंटेगा। सबेरा होगा। उन्होंने गठबंधन की सरकार 1999 में बनायीं थी तब भाजपा को बहुमत मिलना असम्भव दिखता था। लेकिन अब सबकुछ तेजी से घटित हो रहा है। राजनीतिक बहस के केंद्र में कांग्रेस की जगह भाजपा पहुँच चुकी है।
यूँ तो 5 राज्यों के चुनाव में जयललिता से लेकर ममता तक ने इतिहास रचा। ममता ने पहले से ज्यादा सीट हासिल की। तो जया ने लगातार दूसरी जीत हासिल कर राज्य में हर चुनाव में सरकार बदल जाने की चुनावी परिपाटी तोड़ी। लेकिन  कमल इस अंदाज में खिला कि और सभी कीर्तिमान छोटे पड़ गए। इससे ज्यादा खुशी भगवा ब्रिगेड को शायद ही कभी मिली हो। 
दरअसल असम में कमल का खिलना कभी पश्चिम से सूर्य उगने जैसी घटना माना जा सकता था। वहां की राजनीति कांग्रेस बनाम रीजनल पार्टियों क3 बीच होती थी। लेकिन आज भाजपा न सिर्फ यहां जीती है बल्कि प्रचंड बहुमत हासिल करके कांग्रेस को हाशिए पर खड़ा कर दिया है। कांग्रेस हिमाचल,उत्तराखंड, कर्नाटक,मणिपुर,मिजोरम और पुडुचेरी सहित 6 राज्यों में रह गई है। भाजपा आज कांग्रेस पर वैसा ही व्यंग्य कर रही है जैसा कभी कांग्रेस करती थी।

दरअसल ये कहना गलत नहीं होगा कि असम का परिणाम भारतीय राजनीति के बदलते चरित्र का संकेत है। भाजपा भौगोलिक रूप से देश के सभी हिस्सों में पहुंच रही है। कांग्रेस कमजोर हो रही है। भाजपा की व्यापक हिंदुत्व की परिभाषा असर दिखा रही है। सबका साथ सबका विकास नारे के साथ भाजपा अपने हिंदुत्ववादी एजेंडे को आगे करके ही असम में जीत दर्ज कर पाई। असम में बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ और तुष्टीकरण को पार्टी ने मुद्दा बनाया था। मतों का जबरदस्त ध्रुवीकरण  हुआ। परिणाम सामने है।

भाजपा ने सर्वानंद सोनोवाल के रूप में एक सौम्य उम्मीदों से भरा नेतृत्व आगे करके राज्य के लोगों की उम्मीद बढ़ा दी थी। लोग पन्द्रह साल पुराने कांग्रेस शासन और उसके बूढ़े हो चुके नेतृत्व से निजात चाहते थे। भाजपा को बड़ी जिम्मेदारी मिली है। संवेदनशील राज्य में शासन का हुनर उन्हें दिखाना होगा। केंद्र में उनकी सरकार है। सोनोवाल को हेंमत बिस्वा जैसे महत्वाकांक्षी नेताओं के साथ तालमेल बैठाकर जनआकांक्षाओं को पूरा करना होगा। क्योंकि कमल ही नहीं खिला है, उम्मीदों का सूर्य भी उगा है।
यही इतिहास चक्र है? वक्त बदलता है चीजें बदल जाती हैं। राजनीति में कुछ भी स्थाई नहीं है। यह सच भाजपा को भी समझकर लोगों की पहाड़ जैसी उम्मीदों को पूरा करने में जुटना होगा।






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