Breaking News
सार्क देशों के नेताओं ने भी दी अटल को श्रद्धांजलि  |   आज से शुरू होगा मॉरीशस में विश्व हिंदी सम्मेलन  |   अटल की अंतिम यात्रा में योगी, केशव मौर्य सहित यूपी के दिग्गज नेताओ का जमावड़ा  |   अटल की अंतिम यात्रा में पैदल चले मोदी  |   राजकीय सम्मान के साथ विदा हुए अटल  |  
 
 
दैनिक यूपी ब्यूरो
03/05/2016  :  00:24 HH:MM
यूपी की शह मात में कौन है आगे
Total View  53

उत्तरप्रदेश में कौन होगा शहंशाह? किसके हाथ आएगी सत्ता? अखिलेश करेंगे वापसी या माया के सिर सजेगा ताज? राहुल- प्रियंका की जोड़ी कुछ कर पाएगी? भाजपा लोकसभा चुनाव का जादू दोहरा सकेगी। कौन होगा भाजपा का तारणहार? चुनाव अभी थोड़ा दूर हैं। लेकिन ऐसे ही तमाम सवालों ने मौसम को चुनावी रंग में रंग दिया है।

यूपी में कौन होगा सिकंदर
उत्तरप्रदेश में कौन होगा शहंशाह? किसके हाथ आएगी सत्ता? अखिलेश करेंगे वापसी या माया के सिर सजेगा ताज? राहुल- प्रियंका की जोड़ी कुछ कर पाएगी? भाजपा लोकसभा चुनाव का जादू दोहरा सकेगी। कौन होगा भाजपा का तारणहार? चुनाव अभी थोड़ा दूर हैं। लेकिन ऐसे ही तमाम सवालों ने मौसम को चुनावी रंग में रंग दिया है।
अगर कोई मुझसे इन सवालों का जवाब पूंछे तो कुछ मिला जुला जवाब मिलेगा। चुनाव करीब आते आते क्या समीकरण बनेंगे कहना अभी मुश्किल लेकिन अभी के सारे रुझान और सियासी संकेत बसपा के साथ हैं। मायावती की टफ एडमिनिस्ट्रेटर की इमेज,गुंडों को उनकी असल जगह दिखाने की उनकी काबिलियत बसपा को अन्य दलों से काफी आगे लेकर खड़ी है। अखिलेश राज में 5 साल ध्वस्त हुई क़ानून व्यवस्था के चलते अब छवि सुधारने की कोई भी कवायद शायद ही उनके काम आये। कांग्रेस अपनी जमीन तलाशने के लिए मंथन में जुटी है। प्रशांत किशोर की रणनीति से ज्यादा कांग्रेस उनकी लक पर भरोसा करके बैठी है। मोदी को जिताया। नीतीश को जितवाया। यानी लकी मैन। संकेत साफ़ है। कांग्रेस यूपी में भाग्य भरोसे है। और भाग्य भी पुरुषार्थ देखता है। मोदी और नीतीश जैसा भाग्य पाने के लिए कांग्रेस को यूपी में काफी मेहनत करनी होगी। विश्वशनीय चेहरा आगे करना होगा। कांग्रेस की मुश्किल ये है कि उनके पास प्रदेश में इतना बड़ा कोई नाम नहीं। इसीलिए घूम फिरकर राहुल प्रियंका का ही नाम चल पड़ता है। 
बात भाजपा की करें तो सबकी निगाह इनकी रणनीति पर है। बसपा का मुकाबला अखिलेश की अगुवाई वाली सपा ही करेगी या फिर भाजपा के तरकश में कोई ब्रह्मास्त्र है जल्द ही पता चल जाएगा। फिलहाल केशव मौर्य के अध्यक्ष बनने के बाद भी भाजपा ऐसी स्थिति में नही है कि उसे सत्ता संघर्ष के मुकाबले का मुख्य किरदार माना जाए। मौर्य को अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने करीब 14 फीसदी अति पिछड़ों को साथ लेने की योजना बनायीं है। उसे भरोसा है कि इस वर्ग के साथ सवर्णों का समर्थन और थोड़ा बहुत दलित मतों में सेंधमारी उसे सत्ता के करीब ले जायेगी। लेकिन ये आसान नही है। भाजपा का ये समीकरण उस स्थिति में कुछ परवान चढ़ सकता है जब उसके पास माया अखिलेश से मुकाबला करने के लिए कोई बड़ा स्वीकार्य चेहरा हो। भाजपा की अंदरुनी गुटबाजी और बसपा की मोर्चेबंदी से बाहर निकालने में मोदी नाम भी पहले जैसा कारगर साबित नही होगा।
मायावती के पास दलितों के अलावा अतिपिछड़ों, अखिलेश से नाराज मुसलमान और गुण्डाराज से त्रस्त सवर्ण वर्ग का बड़ा समर्थक वर्ग जुड़ सकता है। इससे मुकाबला करने के लिए अन्य दलों को जातीय ब्यूह रचना के साथ भरोसा पैदा करने वाला नेतृत्व देना होगा।
खैर टिकट वितरण की रणनीति, चुनावी मुद्दे और प्रबंधन से काफी कुछ तस्वीर बदल सकती है। अभी वक्त है। इतना तय है यूपी की सियासत दिलचस्प होने वाली है।






Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   2481683
 
     
Related Links :-
स्वतंत्रता पुकारती: जश्न किसलिए?
चुनावी मौसम में काम करेगा शराबबंदी का शिगूफा!
खत्म करो जनता का खून चूसने वाला भ्रष्टाचार
प्रद्युम्न हत्याकांड: क्या सीबीआई गढ़ रही है कहानी?
पठानकोट और 26/11 के दोषियों पर कार्रवाई करे पाक - भारत,अमेरिका
भारत ने कहा कश्मीर में किसी का दखल मंजूर नही
यह भाजपा की नहीं पीएम मोदी की जीत
मुलायम की दूसरी पत्नी की जंग का एलान
निर्मम सत्ता: बाप बेटे की कलह में कहाँ खोया समाजवाद
मां तुझे सलाम
 
CopyRight 2016 DanikUp.com