दैनिक यूपी ब्यूरो
08/04/2016  :  19:26 HH:MM
महिलाआें के लिए खुला शनि शिंगणापुर मंदिर
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महिलाओं को पूजा न करने देने की 400 साल पुरानी परंपरा आज टूट गई और कुछ महिलाओं ने वहां पूजा अर्चना की। हाल ही में बम्बई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया था


मुंबई
महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर में पवित्र चबूतरे पर महिलाओं को पूजा न करने देने की 400 साल पुरानी परंपरा आज टूट गई और कुछ महिलाओं ने वहां पूजा अर्चना की। हाल ही में बम्बई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया था कि मंदिर में पूजा अर्चना के लिए महिलाओं और पुुरुषों में भेदभाव नहीं किया जाये।न्यायालय ने यह भी कहा था कि देश में कोई भी ऐसा कानून नहीं है जो महिलाओं को मंदिर में जाने से प्रतिबंधित करता है। महिलाओं को रोकने वालों को जेल भी हो सकती है।इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने न्यायालय को भरोसा दिलाया था कि मंदिरों में किसी के साथ भी भेदभाव नहीं किया जायेगा। मंदिर के मुख्य चबूतरे पर पूजा करने के लिए लगी रोक के बावजूद गुड़ी पड़वा के मौके पर बड़ी संख्या में पुरुष श्रद्धालु मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर गए और उन्होंने पवित्र शिला वाले चबूतरे पर जल चढ़ा दिया। इसके बाद मंदिर में माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस घटना के बाद ट्रस्टियों ने एक बैठक की और बैठक में निर्णय लिया कि महिला और पुरुष सभी को प्रवेश की अनुमति दी जाय। मंदिर के ट्रस्टी सायाराम बंकर ने कहा कि अदालत के निर्देश को ध्यान मंा रखते हुए बैठक में सभी श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश का निर्णय लिया गया। शनि शिंगणापुर के पवित्र चबूतरे पर महिलाओं के पूजा करने पर प्रतिबंध था। महिला श्रद्धालुओं को गर्भ गृह में नहीं जाने दिया जाता था। कुछ माह पहले शनि शिगणापुर के गर्भ गृह में एक लड़की ने प्रवेश कर पूजा की थी तब से इस मामले ने तूल पकड़ लिया। इस घटना के बाद पुणे की भूमाता ब्रिगेड की अध्यक्ष तृप्ति देसाई ने कई महिलाओं के साथ मंदिर में प्रवेश करने का प्रयास किया लेकिन उन्हें प्रवेश करने से रोक दिया गया। बम्बई उच्च न्यायालय के आदेश के बाद सुश्री देसाई ने फिर अपने सहयोगियों के साथ मंदिर में प्रवेश करना चाहा लेकिन पुलिस और स्थानीय लोगों ने उन्हें रोक दिया। महिलाओं के प्रवेश के निर्णय के संबंध में तृप्ति देसाई ने ट्रस्टियों के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि भूमाता ब्रिगेड की भूमिका के कारण ट्रस्टियों को यह निर्णय लेना पडा। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक निर्णय से महिला और पुरूष श्रद्धालुओं में समानता आयेगी। ट्रस्ट ने तृप्ति देसाई को मंदिर में पूजा करने के लिए आमंत्रित किया है। 







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