दैनिक यूपी ब्यूरो
20/08/2021  :  11:45 HH:MM
सीएजी की रिपोर्ट में खुलासा, कंपनी को बेजा लाभ देने के कारण यूपी राज्य सेतु निगम को 2.20 करोड़ का घाटा
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योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही उत्तर प्रदेश सरकार के कई विभागों की कार्यप्रणाली पर नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सीएजी की आडिट रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं जिसके चलते बिना किसी निविदा तथा तकनीकी योग्यता वाली कंपनी को काम देने के कारण सेतु निगम को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है।

लखनऊ, (दैनिक यूपी ब्यूरो)। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही उत्तर प्रदेश सरकार के कई विभागों की कार्यप्रणाली पर नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सीएजी की आडिट रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं जिसके चलते बिना किसी निविदा तथा तकनीकी योग्यता वाली कंपनी को काम देने के कारण सेतु निगम को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है।

वाराणसी में सामने घाट-रामनगर रोड पर गंगा नदी पर टू लेन सेतु बनवाने में उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम ने नियम की अनदेखी की सारी हदें पार कर दीं। एक निर्माण कंपनी को बेजा लाभ दिलाने में निगम को भी 2.20 करोड़ का घाटा होने के साथ सेतु निर्माण में भी विलंब हुआ। सेतु निगम मेसर्स ग्लोबल स्टील कंपनी पर ऐसा रीझा कि बिना निविदा व उसकी तकनीकी योग्यता जांचे बगैर कार्य आवंटित कर दिया। तैयार किए गए गर्डर्स ध्वस्त होकर नदी में गिर गए थे। नियंत्रक महालेखापरीक्षक की आडिट रिपोर्ट में ऐसे कई गंभीर बिंदु उजागर हुए हैं।

उप्र राज्य सेतु निगम लिमिटेड ने जनवरी 2015 में वाराणसी में सेतु बनाने के लिए मेसर्स ग्लोबल स्टील कंपनी से 3.10 करोड़ में अनुबंध किया था। कार्य 21 जनवरी को शुरू होकर 20 अप्रैल 2015 में पूरा होना था। अगस्त व सितंबर में गर्डर्स रखे गए, जो चंद दिनों में ही ध्वस्त होकर नदी में गिर गए थे। कंपनी ने अपनी लागत पर कार्य पूरा करने का आश्वासन दिया, लेकिन कार्य शुरू नहीं किया गया। जब कंपनी ने इस मामले में उत्तर देना बंद कर दिया तो पुलिस में शिकायत की गई। उससे हानि वसूली के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई। लेखा परीक्षा की ओर से इंगित किए जाने के बाद कंपनी ने ठेकेदार को विलंब से ब्लैक लिस्टेड कर दिया। लेखा परीक्षा ने कार्य आवंटन व पूरा करने में अनियमितताएं पाईं।

उप्र राज्य सेतु निगम लिमिटेड अनुचित लेखांकन प्रणाली के कारण अपनी आय व अग्रिम कर देने का सही आकलन करने में विफल रहा। इससे उसे 3.59 करोड़ रुपये के दंडात्मक ब्याज का भुगतान करना पड़ा।

सभी सिविल निर्माण कार्यों में मिट्टी का कार्य महत्वपूर्ण है। डा.राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के नए परिसर में शिक्षण ब्लाक के निर्माण का कार्य वर्ष 2015 में उप्र राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड को सौंपा गया। नींव व बेसमेंट की खोदाई में बड़ी मात्रा में मिट्टी बची और उसका निस्तारण नहीं किया जा सका। निगम बची मिट्टी की बिक्री में स्वयं का आदेश पालन करने में विफल रहा। मिट्टी निस्तारण में 3.14 करोड़ का व्यय हुआ। इसे राज्य सरकार ने वहन किया। राजकीय खजाने को 1.41 करोड़ रुपये के राजस्व से वंचित किया गया। इसी तरह से उत्तर प्रदेश जलनिगम ने गलत बिलों व अधिक अनुबंध भार के सत्यापन के कारण 3.54 करोड़ के विद्युत शुल्क का भुगतान किया।






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