दैनिक यूपी ब्यूरो
22/01/2021  :  23:27 HH:MM
किसान संगठनों ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी, कहा- कृषि कानूनों को रद्द करने के अलावा कोई चारा नहीं
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केंद्र सरकार और किसानों के बीच शुक्रवार को 11वें दौर की बैठक में कोई हल नहीं निकलने के बाद किसान संगठनों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। किसान नेताओं ने बैठक के बाद कहा कि भले ही बैठक पांच घंटे चली, लेकिन दोनों पक्ष मुश्किल से 30 मिनट के लिए ही आमने-सामने बैठे।

नई दिल्ली। | केंद्र सरकार और किसानों के बीच शुक्रवार को 11वें दौर की बैठक में कोई हल नहीं निकलने के बाद किसान संगठनों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। किसान नेताओं ने बैठक के बाद कहा कि भले ही बैठक पांच घंटे चली, लेकिन दोनों पक्ष मुश्किल से 30 मिनट के लिए ही आमने-सामने बैठे। बैठक की शुरुआत में ही किसान नेताओं ने सरकार को सूचित किया कि उन्होंने बुधवार को पिछले दौर की बैठक में सरकार द्वारा रखे गए प्रस्ताव को खारिज करने का निर्णय किया है।
बैठक के बाद भारतीय किसान यूनियन (उग्राहां) के नेता जोगिंदर सिंह उग्राहां ने कहा कि वार्ता टूट गई है क्योंकि यूनियनों ने सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार ने कहा कि कानूनों को निलंबित रखने की अवधि दो साल तक विस्तारित की जा सकती है, लेकिन किसान संगठन तीनों कानूनों को पूरी तरह वापस लिए जाने तथा फसलों की खरीद पर एमएसपी की कानूनी गारंटी दिए जाने की अपनी मांगों पर कायम हैं।
बैठक स्थल से बाहर आते हुए किसान नेता शिवकुमार कक्का ने कहा कि चर्चा में कोई प्रगति नहीं हुई और सरकार ने अपने प्रस्ताव पर यूनियनों से पुन: विचार करने को कहा। किसान नेता दर्शनपाल ने कहा, "हमने सरकार से कहा कि हम कानूनों को निरस्त करने के अलावा किसी और चीज के लिए सहमत नहीं होंगे। लेकिन मंत्री ने हमें अलग से चर्चा करने और मामले पर फिर से विचार कर फैसला बताने को कहा।"
भारतीय किसान यूनियन (असली अराजनीतिक) के अध्यक्ष हरपाल सिंह ने कहा, "यदि हम सरकार की पेशकश को स्वीकार कर लेते हैं, तो दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हमारे साथी भाई कानूनों को रद्द करने के अलावा कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे। वे हमें नहीं बख्शेंगे। हम उन्हें क्या उपलब्धि दिखाएंगे?" उन्होंने सरकार की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया और आरोप लगाया कि यह विश्वास करना मुश्किल है कि वह 18 महीने तक कानूनों के क्रियान्वयन को स्थगित रखकर अपनी बात पर कायम रहेगी। सिंह ने कहा, "हम यहां मर जाएंगे, लेकिन कानूनों को रद्द कराए बिना वापस नहीं लौटेंगे।" किसान संगठनों का आरोप है कि नए कृषि कानूनों से मंडी और एमएसपी खरीद प्रणालियां समाप्त हो जाएंगी तथा किसान बड़े कॉरपोरेट घरानों की दया पर निर्भर हो जाएंगे।
ट्रैक्टर रैली तय समय पर होगी
आंदोलनरत किसान नेताओं ने शुक्रवार को कहा कि उनकी 26 जनवरी की प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली दिल्ली के व्यस्त आउटर रिंग रोड पर ही होगी, जैसा कि पहले तय किया गया था। बैठक से बाहर निकलने के बाद किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि यह सरकार को सुनिश्चित करना है कि रैली शांतिपूर्ण रहे। राजेवाल ने कहा, "26 जनवरी को आउटर रिंग रोड पर पहले से निर्धारित योजना के अनुसार ट्रैक्टर मार्च होगा। हमने पुलिस को सूचित किया है कि यह सुनिश्चित करना सरकार का काम है कि यह शांतिपूर्ण रहे।"






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