दैनिक यूपी ब्यूरो
10/01/2021  :  00:07 HH:MM
यूपी में नए किरायेदारी कानून को मंजूरी, बगैर अनुबंध मकान किराये पर नहीं दे सकेंगे मकान
Total View  54

मकान मालिक और किरायेदारों के विवाद को कम करने के लिए बनाए गए उ.प्र. नगरीय किरायेदारी विनियमन अध्यादेश-2021 को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस अध्यादेश में किरायेदारी अनुबंध के आधार पर करने का प्राविधान है।

लखनऊ | मकान मालिक और किरायेदारों के विवाद को कम करने के लिए बनाए गए उ.प्र. नगरीय किरायेदारी विनियमन अध्यादेश-2021 को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस अध्यादेश में किरायेदारी अनुबंध के आधार पर करने का प्राविधान है। किसी भी विवाद के निपटारे के लिए रेंट अथारिटी एवं रेंट ट्रिब्यूनल का प्राविधान किया गया है। ट्रिब्यूनल में अधिकतम 60 दिनों के अंदर वादों का निस्तारण होगा। इस अध्यादेश के मुताबिक कोई भी मकान मालिक बगैर अनुबंध किसी को किराये पर अपना मकान नहीं दे सकेगा। साथ ही किराए में मनमानी बढ़ोतरी भी नहीं कर सकेगा। इस अध्यादेश से किरायेदारी के विवाद कम होंगे तथा पुराने प्रकरणों में किराया पुनरीक्षण किया जा सकेगा।अध्यादेश लागू होने के बाद सभी किरायेदारी अनुबंध के आधार पर होगी।
 वर्तमान में लागू उ.प्र शहरी भवन (किराये पर देने, किराया तथा बेदखली विनियमन) अधिनियम-1972 लागू है। इस अधिनियम के लागू होने के बाद से भवन स्वामी और किरायेदारों के बीच के विवाद बढ़ गए हैं। बड़ी संख्या में अदालतों में मुकदमे चल रहे हैं। भवन स्वामियों को उनकी संपत्ति का उचित किराया नहीं मिल रहा है। उच्चतम न्यायालय के निर्देश और भारत सरकार द्वारा तैयार किए गए माडल टेनेंसी एक्ट के आधार पर नगरीय परिसरों की किरायेदारी विनियमन अध्यादेश 2021 तैयार किया गया है।
आवासीय में सिर्फ पांच फीसदी और गैर आवासीय में सात फीसदी बढ़ सकेगा किराया
इस अध्यादेश में ऐसी व्यवस्था है कि मकान मालिक मनमाने तरीके से किराया नहीं बढ़ा सकेगा। आवासीय पर पांच फीसदी और गैर आवासीय पर सात फीसदी सालाना किराया बढ़ाया जा सकेगा। किराएदार को भी किराये वाले स्थल की देखभाल करनी होगी। दो महीने तक किराया नहीं देने पर मकान मालिक किराएदार को हटा सकेगा। किराएदार घर में बिना पूछे तोड़फोड़ भी नहीं कर पाएगा। पहले से रखे गए किराएदारों के मामले में यदि लिखित नहीं है तो अनुबंध पत्र लिखित कराने के लिए तीन माह का मौका दिया जाएगा। किराया वृद्धि की गणना चक्रवृद्धि आधार पर होगी। किराया बढ़ाने के विवाद पर किराया प्राधिकरण संशोधित किराया और किराएदार द्वारा देय अन्य शुल्क निर्धारित कर सकता है। एडवांस के मामले में आवासीय परिसर के लिए सिक्योरिटी डिपाजिट दो महीने से अधिक नहीं होगा और गैर आवासीय परिसर के लिए छह माह का एडवांस लिया जा सकेगा।
केंद्र या राज्य या केंद्र शासित प्रदेश या भारत सरकार के उपक्रम या स्थानीय निकाय या छावनी परिषद में यह कानून लागू नहीं होगा। कंपनी, विश्वविद्यालय या कोई संगठन, सेवा अनुबंध के रूप में अपने कर्मचारियों को किराए पर दिए गए हो उस पर यह लागू नहीं होगा। धार्मिक या धार्मिक संस्थान, लोक न्याय अधिनियम के तहत पंजीकृत ट्रस्ट, वक्फ के स्वामित्व वाला परिसर, पर किराएदारी कानून प्रभावी नहीं होगा।
मकान मालिक और किराएदार के दायित्व
किराएदारी अनुबंध पत्र की मूलप्रति का एक सेट दोनों के पास रहेगा। अनुबंध पत्र की शर्तों के अनुसार समय पर किराया देना होगा। मकान मालिक को किराएदार को इसकी रसीद देनी होगी। किराएदार को किराए पर लेने वाले परिसर की देखभाल करनी होगी। मकान मलिक को जरूरी सेवाएं देनी होंगी। मकान मालिक किराएदार को अनुबंध अवधि में बेदखल नहीं कर सकेगा।






Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   2166751
 
     
Related Links :-
भू-माफियाओं से यूपी में मुक्त कराई गई 67000 हेक्टेयर जमीन, सीएम योगी बोले-बना रहे खेल मैदान
खाप चौधरियों से मिलने गए भाजपा नेताओं का शामली में विरोध, ट्रैक्टर लगाकर रोका काफिला
मायावती को झटका: बसपा के बागी विधायकों ने सदन में अलग बैठने की इजाजत मांगी
उन्‍नाव केस: दोनों लड़कियों का पोस्‍टमार्टम पूरा, जहर मिला खाना खाने से हुई मौत, शरीर पर नहीं मिले चोट के निशान
यूपी पंचायत चुुनाव : तारीख की घोषणा से पहले नामांकन से जुड़ा यह काम शुरू
यूपी पंचायत चुनाव : आरक्षण जारी होते ही कई ग्राम प्रधान पद के दावेदारों को झटका
अपहरण के मामले में अमनमणि त्रिपाठी पर शिकंजा, कुर्की की कार्यवाही से पहले नोटिस और गिरफ्तारी वारंट जारी
पंचायत चुनाव: नई आरक्षण नीति, कौन सा गांव किस जाति के लिए होगा आरक्षित
कृषि कानून वापस हुए बगैर घर नहीं जाएंगे किसान: नरेश गुजराल
केंद्र में सत्ता परिवर्तन नहीं, अपने मुद्दों का समाधान चाहते हैं : राकेश टिकैत
 
CopyRight 2016 DanikUp.com