दैनिक यूपी ब्यूरो
30/07/2020  :  00:31 HH:MM
राफेल के भारत आने पर राहुल ने वायु सेना को दी बधाई मोदी पर दागे 3 सवाल
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Rafale arrived in India: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल विमानों के भारत आने पर वायु सेना को बधाई दी है लेकिन साथ ही साथ उन्होंने इसकी कीमतों, संख्या और ऑफसेट पार्टनर के तौर पर अनिल अंबानी की कंपनी को चुने जाने पर फिर सवाल दागे हैं।

नई दिल्ली,राफेल डील में कथित भ्रष्टाचार (questions over rafale deal) को पिछले आम चुनाव में जोर-शोर से उठाकर बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश करने वाले राहुल गांधी ने 5 फाइटर जेट्स के भारत आने पर एयर फोर्स को बधाई दी है। हालांकि, उन्होंने इसके साथ ही अपने उन्हीं पुराने सवालों को दागा है, जिसे वह 2016 से ही जब-तब उठाते रहे हैं। उन्होंने राफेल लड़ाकू विमानों (cost of rafale fighter jets) की कीमत, 126 के बजाय 36 लड़ाकू विमानों को खरीदे जाने और अनिल अंबानी की कंपनी को ऑफसेट पार्टनर बनाए जाने को लेकर सवाल किया है।

२००७ से पहले की किमत बताकर कांग्रेस भटकने के प्रयासों में लगी है। क्या उसी दाम में दस साल बाद विमान मिलेंगे? कांग्रेस केवल विमान की किमत बताती रही। क्या विमान के लिए ईंधन, मेंटेनंस...+

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul gandhi on rafale arrival) ने ट्वीट किया, 'राफेल के लिए वायुसेना को बधाई। इस बीच, सरकार क्या इसका जवाब दे सकती है- 1) प्रति विमान 526 करोड़ रुपये के बजाय 1670 करोड़ रुपये की कीमत क्यों पड़ी? 2) कुल 126 विमानों के बजाय 36 विमान क्यों खरीदे गए? 3) HAL (हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड) के बजाय दिवालिया हो चुके अनिल (अंबानी) को 30 हजार करोड़ रुपये का ठेका क्यों दिया गया?'

राहुल ने लोकसभा चुनाव में जोर-शोर से उठाया था राफेल का मुद्दा

राहुल गांधी ने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान राफेल डील में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा लेकिन वहां भी मोदी सरकार को क्लीन चिट मिली। उसके बाद भी राहुल ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। उन्हें कहीं न कहीं उम्मीद थी कि जिस तरह बोफोर्स सौदे में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया था, उसी तरह राफेल डील के मामले में होगा और नरेंद्र मोदी सरकार की विदाई हो जाएगी। लेकिन राहुल की लाख कोशिशों के बाद भी राफेल बोफोर्स नहीं बन सका।

थरूर ने भी दागे सवाल

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी राफेल की कीमतों को लेकर सवाल किया है। उन्होंने ट्वीट किया, 'अब जब राफेल एयर फोर्स में शामिल हो चुके हैं तो कुछ बातें याद रखनी चाहिए: 1- यूपीए ने राफेल का चुनाव किया और 126 विमानों के लिए पहली डील की। 2- मोदी सरकार ने 126 विमानों को घटाकर 36 किया, शुरू में जिस लड़ाकू क्षमता की योजना बनाई गई थी उसे कम किया और घरेलू उत्पादन को रद्द किया। 3- ये इन 36 लड़ाकू विमानों की कीमत को लेकर गंभीर सवाल हैं।'

कांग्रेस ने कीमत को लेकर फिर मोदी सरकार को घेरा

राहुल गांधी की तरह ही उनकी पार्टी ने भी राफेल विमानों के भारत आने पर डील में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे को एक बार पिर उठाया है। कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से राफेल की कीमत और उनकी संख्या को लेकर सवाल उठाने वाले वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया गया, 'राफेल आगमन पर वायुसेना को बधाई देते हुए आप भाजपा सरकार की गड़बड़ियों पर सवाल कर रहे हो, तो समझना अभी आपमें देशभक्ति जिंदा है। जय हिंद।'

कई विशेषज्ञ भारतीय राफेल को चीन के J-20 के टक्कर का मान रहे हैं। स्टील्थ कैटिगरी का चीनी लड़ाकू विमान के बारे में अभी दुनिया को उतनी जानकारी नहीं है जितनी राफेल के बारे में है। राफेल को हवा का सिकंदर कहा जाता है।

राफेल की खूबियां उसे दूसरे जेट से बनाती हैं अलग

सामरिक विशेषज्ञ मारूफ रजा के अनुसार, राफेल की तेज उड़ान उसे दुनिया में सबसे अलहदा बनाती है। इसके अलावा अपने समकक्षों की तुलना में यह अव्वल है।

पलभर में दुश्मनों के ठिकानों के नष्ट करता है 70 लाख की हैमर मिसाइल

राफेल के हैमर मिसाइल से लैस होने के कारण भारत को बड़ी बढ़त हासिल हो चुकी है। यह मिसाइल किसी भी प्रकार के बंकर या सख्त सतह को पल में मटियामेट करने की ताकत रखता है। यह किसी भी स्थिति में बेहद उपयोगी है। बेहद कठिन पूर्वी लद्दाख जैसे इलाकों में इसकी मारक क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ती है। इस घातक हथियार की मारक क्षमता बड़ी तगड़ी है। यह 20 किलोमीटर से 70 किलोमीटर की दूरी तक अचूक निशाना लगाने में माहिर है। जिस लड़ाकू विमान से हैमर को फायर किया जाता है वह उसकी मारक दूरी के कारण ही दुश्मन की एयर डिफेंस से बचने में सफल रहता है। क्योंकि दूरी के कारण लड़ाकू विमान दुश्मन के रेडार पर नजर नहीं आता है। HAMMER मिसाइल किट में अलग-अलग साइज के बम भी फिट किए जा सकते हैं। ये 125 किलो, 250 किलो, 500 किलो यहां तक कि 1000 किलोग्राम के भी हो सकते हैं।

अचूक हथियारों से लैस है राफेल

राफेल में कई अचूक हथियार लग सकते हैं। 300 किलोमीटर तर मार करने वाली स्कल्प क्रूज मिसाइल इसे सबसे ज्यादा मारक बनाती है। Meteor एयर-टू-एयर मिसाइल का निशाना चूकता नहीं है। MICA एयर-टू-एयर मिसाइल इसे दुश्मनों पर बढ़त दिलाती है। हैमर मिसाइल इसे अजेय बनाते हैं।

4.5 पीढ़ी का है राफेल विमान

राफेल लड़ाकू विमान 4.5 पीढ़ी का विमान है। यह रेडार को चकमा देने में माहिर माना जाता है। भारत के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। अभी तक भारतीय वायुसेना में शामिल मिराज-2000 या सुखोई लड़ाकू विमान या तो तीसरी या फिर चौथी पीढ़ी के विमान है।

एयरक्राफ्ट कैरियर से भी उड़ान भर सकता है राफेल

राफेल लड़ाकू विमान एयरक्राफ्ट कैरियर से भी उड़ान भर सकता है। यह खोजी अभियान से लेकर दुश्मन के इलाके में भीतर तक जाकर हमला करने की क्षमता रखता है। भारत ने 2016 में फ्रांस के साथ 60 हजार करोड़ रुपये के 36 राफेल विमानों की डील की थी। इसमें 30 फाइटर जेट होंगे जबकि 6 ट्रेनर विमान होंगे।

राफेल के लिए की गई है खास तैयारी

वायुसेना ने राफेल के रखरखाव के लिए भी बड़ी तैयारी की है। वायुसेना ने करीब 400 करोड़ रुपये खर्च कर राफेल के लिए शेल्टर, हैंगर और मेंटेनेंस फैसलिटी बनाई है।

राफेल की ताकत, भारत चौथा देश

राफेल की ताकत हासिल करने वाला भारत दुनिया का केवल चौथा देश है। फ्रांस के अलावा, मिस्र और कतर के पास ही ये विमान हैं। पीएम नरेंद्र मोदी कई बार इन विमानों की तारीफ कर चुके हैं। देश-दुनिया की हर खबर अब Telegram पर भी। हमसे जुड़ने के लिए यहां क्‍ल‍िक करें (https://t.me/Navbharattimes) और पाते रहें हर जरूरी अपडेट।

मनमोहन सरकार ने शुरू की थी पहल लेकिन नहीं हो पाई थी डील

भारतीय वायुसेना की जरूरतों के मद्देनजर राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की पहल सबसे पहले कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार ने ही की थी। साल 2007 में एयरफोर्स ने सरकार के पास मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (MMRCA) खरीदने का प्रस्ताव भेजा था। इसके बाद तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने 126 लड़ाकू विमानों को खरीदने का टेंडर जारी किया। टेंडर में सबसे कम कीमत पर राफेल ने बोली लगाई थी। मनमोहन सिंह सरकार लड़ाकू विमान खरीदना चाह रही थी लेकिन उसके लिए चल रही बातचीत कभी अंजाम तक नहीं पहुंच पाई। यूपीए के दौरान 18 राफेल विमानों को फ्रांस से खरीदा जाना था जबकि बाकी 108 विमानों का भारत में ही निर्माण के लिए बातचीत चल रही थी। 2014 के आम चुनाव में यूपीए सरकार सत्ता से बाहर हो गई। नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और 23 सितंबर 2016 को फ्रांस की सरकार के साथ 59 हजार करोड़ रुपये में हथियारों से सुसज्जित 36 राफेल लड़ाकू विमानों की डील फाइनल हुई।

 






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