दैनिक यूपी ब्यूरो
03/07/2020  :  19:11 HH:MM
भारत न कभी झुका है न झुकेगा, प्रधानमंत्री की लद्दाख यात्रा के मायने
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अंजना शर्मा गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद चीन से जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अचानक लेह लद्दाख जाकर सैनिकों को संबोधित करना चीन को स्पष्ट और सख्त संदेश है। भारत का रुख साफ है कि वह विस्तारवाद की किसी भी मुहिम का डटकर विरोध करेगा।

गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद चीन से जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अचानक लेह लद्दाख जाकर सैनिकों को संबोधित करना चीन को स्पष्ट और सख्त संदेश है। भारत का रुख साफ है कि वह विस्तारवाद की किसी भी मुहिम का डटकर विरोध करेगा। हालांकि चीनी दूतावास ने कहा है कि हमें विस्तारवादी कहना निराधार है। लेकिन दुनिया बेहतर जानती है कि चीन का आचरण सभी पड़ोसियों के साथ क्या है। भारत अब चीन के भुलावे में नही आ सकता। हमारी जमीन पर आंख उठाकर देखने वालों को स्पष्ट जवाब देने में भारत सक्षम है। गलवान को लेकर प्रधानमंत्री का उद्घोष पर्याप्त है। हमे नही भूलना चाहिए कि भारत का नेतृत्व जब भी इस तरह दे दृढ़ता दिखाता है उसके नतीजे भी सामने आते हैं। दरअसल प्रधानमंत्री की यात्रा सैनिकों का मनोबल बढ़ाने के साथ चीन को साफ संदेश है कि हम पीछे हटने वाले नही हैं। प्रधानमंत्री की यात्रा के कई निहितार्थ हैं। पहला कि हम दृढ़ता से स्थिति का मुकाबला करने में सक्षम हैं । दूसरा सेना के साथ 133 करोड़ भारतीय खड़े हैं। तीसरा चीन सहित  दुनिया को संदेश है कि हम दबाव में आने वाले नही हैं कोई हम पर धौंस जमाने की जुर्रत न करे। जहां हमने ये चीन को स्पष्ट संदेश दिया है कि आप हमको घेर नही सकते, धौंस नही जमा सकते, बढ़त मानकर पीछे नही हटा सकते। अगर कोशिश की तो हम मुंहतोड़ जवाब देंगे। चीन अपने रुख की वजह से दुनिया भर में अपमानित हो रहा है। उसकी विस्तारवादी नीति की वजह से आज आसियान देश उसके खिलाफ खड़े हैं। ताइवान, वियतनाम, फिलीपींस, जापान सबके साथ उसका व्यवहार जगजाहिर है। हांगकांग में जो कुछ हो रहा है दुनिया देख समझ रही है। हम लड़ाई नही चाहते लेकिन चीन की हरकतों की अनदेखी भी नही कर सकते। हमारा प्रयास यही रहेगा कि चीन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाएं। उनको अलग थलग कर दे।  दक्षिण चीन सागर में चीन के खिलाफ अमेरिका सहित तमाम देश उसकी अतिक्रमणवादी नीति का विरोध कर रहे हैं। आसियान देशों ने मिलकर 20 साल बाद चीन को दक्षिण सागर मेंसंप्रभुता का हनन न करने का प्रस्ताव पारित किया है। दुनिया के ज्यादातर देश  भारत के साथ खड़े हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो के बावजूद चीन अलग थलग है। ज्यादातर देश भारत के रुख का समर्थन कर रहे हैं।  कोविड संक्रमण के दौरान दुनिया भर की नजरों में गिरा चीन अपना भरोसा खो रहा है। उसे समझना होगा कि आधुनिक दुनिया मे आप मनमानी नही कर सकते। कोविड पर घेराबंदी से ध्यान हटाने के लिए की गई चीन की हरकतों ने दुनिया के बड़े हिस्से को उसके खिलाफ लामबंद कर दिया है।  प्रधानमंत्री की यात्रा का संदेश बहुत साफ है कि चीन को बता दें कि हम जंग नही चाहते लेकिन हम पीछे हटने वाले भी नही हैं। हम बिल्कुल बातचीत से कूतिनीतिक स्तर पर समस्या का हल चाहते हैं। विदेश मंत्रालय, सैन्य स्तर पर बात चल रही है। हम बहुपक्षीय बैठकों ब्रिक्स और आरआईसी में चीन के साथ तनाव के बावजूद शामिल हुए। लेकिन हम अब चीन पर भरोसा करके चुप नही बैठ सकते। हमे तैयारी धरती से आकाश तक रखनी है और हम जरूरत पड़ने पर आरपार के लिए तैयार हैं। चीन को समझना होगा कि 1962 के बाद 67 हो या 87 भारत न कभी झुका है न 2020।में झुकेगा। हम हर बार मुंहतोड़ जवाब देते रहे हैं और इस बार भी देंगे। 1971 युध्द के पहले इंदिरा गांधी गई थीं पाकिस्तान दो हिस्सों में बंट गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्के इरादों पर कोई भी संदेह नही कर सकता।






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