दैनिक यूपी ब्यूरो
28/06/2020  :  17:35 HH:MM
प्रधानमंत्री मोदी के साहसिक फैसलों का इतिहास रहेगा साक्षी - रमेश चन्द्र तोमर
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डॉक्टर रमेश चन्द्र तोमर, गुरु जी भाजपा से चार बार सांसद रहे हैं। उत्तरप्रदेश में भाजपा के उपाध्यक्ष रहे। लोकसभा सांसद के रूप में आवास समिति के अध्यक्ष भी रहे। इस समय भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। अटल, आडवाणी के साथ काम करने और कल्याण सिंह के करीबी नेताओं में शामिल तोमर 2009 में पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। लेकिन2014 की मोदी लहर के दौरान बीच चुनाव में कांग्रेस का टिकट छोड़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भाजपा में आ गए। एक लंबे राजनीतिक सफर पर दैनिक यूपी की एडिटर इन चीफ अंजना शर्मा से *एक्सक्लूसिव* बातचीत।

प्रश्न-आपको चार दशक से ज्यादा राजनीति का अनुभव है। ग़ाज़ियाबाद में पार्टी को खड़ा करने वाले नेताओं में रहे। चार बार सांसद रहे। क्या बदलाव राजनीति में महसूस करते हैं?
 उत्तर - राजनीति को निरंतरता में देखने की जरूरत होती है। हर युग की अपनी विशेषता होती है। अटल जी, आडवाणी जी ने पार्टी की बुनियाद तैयार की। बहुत से अन्य नेताओं की फेहरिश्त है, जिन्होंने पार्टी को खड़ा करने में अपना सबकुछ न्योछावर किया। पार्टी ने कभी अपने मूल सिद्धांत से समझौता नही किया। राष्ट्रवाद की अलख जगाते रहे। अपने मुद्दों को लेकर चलते रहे।  मोदी जी भी संघर्ष की उसी परंपरा से बढ़ते हुए देश के प्रधानमंत्री बने। मैं भी साइकिल, पुरानी स्कूटर पर गांव गांव घूमा हूँ।  शुरू में पार्टी का झंडा लगाने वाले लोग भी नही मिलते थे। संघ की शाखाओं में हमें हर स्थिति में विचलित न होने का जो प्रशिक्षण मिलता है वही हमारी पूंजी बन जाता है। पहले संसाधन कम थे हम विपक्ष में थे। दो सांसदों वाली पार्टी से आगे बढ़कर अटल जी देश के प्रधानमंत्री बने तो राजनीति का पूरा चक्र बदल गया। सही मायने में कांग्रेस के पराभव की बुनियाद उसी वक्त पड़ गई थी। मोदी जी ने उसे नया आयाम दिया। मोदी जी जैसा सशक्त नेतृत्व आज पूरी दुनिया मे विरला है। आज संसाधनों की कमी नही है। लेकिन अटल जी से लेकर मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने तक  कार्यकर्ताओ का त्याग हमे नही भूलना चाहिए।
प्रश्न- क्या पहले मूल्य और राजनीतिक आदर्श ज्यादा मायने रखते थे या वक्त के साथ मूल्य और आदर्श बदल गए?
उत्तर-देखिये कुछ बदलाव हर पीढ़ी के साथ होता है। हर कालखंड की अपनी जरूरत होती है। लेकिन हमारी पार्टी का मूल आदर्श बना रहा। अगर ऐसा नही होता तो एक चाय वाला देश का प्रधानमंत्री बनेगा ये कोई सोच सकता था। मोदी जी आज भी सबसे निचले कार्यकर्ता से संवाद करते हैं। नेता और कार्यकर्ता का कनेक्ट कभी खत्म नही हुआ। अन्य पार्टियों में आदर्श की कमी जरूर देखने को मिलेगी क्योंकि वहां नेतृत्व जमीन से नही ऊपर से बिठाया जाता है। राजवंश की परंपरा कई दलों की पहचान है।
 प्रश्न- क्या पार्टी व्यक्ति केंद्रित हो गई है। शीर्ष नेतृत्व का नाम लेकर संगठन सरकार में कई ऐसे लोग ताकतवर हो गए जिनका जमीनी वजूद नही है। कुछ कहना चाहेंगे?

उत्तर-देखिये व्यक्तियों का भी महत्व होता है। हमारी पार्टी में नेतृत्व कार्यकर्ताओ के बीच से निकलकर आता है लेकिन उसकी अपनी क्षमता होती है जो उसे ताकत देती है। नेतृत्व ताक़तवर होना जरूरी है। इसे व्यक्ति केंद्रित मानना सही नैरेटिव नही है। व्यक्ति केंद्रित सोच वहां होती है जहां हम परिवार से अलग नही सोच पाते। हमारे यहाँ तो दल से बड़ा देश और व्यक्ति से बड़ी पार्टी का सिद्धांत हमेशा लागू हुआ है। 
 प्रश्न- भाजपा की केंद्र और प्रदेश में सरकार है। कार्यकर्ता कितना संतुष्ट है?
उत्तर- मुझे लगता है कार्यकर्ता को अगर उसकी मूल विचारधारा की खुराक मिलती रहे तो उससे ज्यादा संतुष्ट कौन होगा। हमारी सरकार है। तुष्टीकरण का दौर खत्म हो गया। हिंदुत्ववादी ताकते मजबूत हैं। हिंदुत्ववादी का मतलब हिन्दू मुसलमान नही है। आज सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास मूलमंत्र लेकर मोदी जी की सरकार सैकड़ो साल की समस्या खत्म कर रही है। ये हर कार्यकर्ता के लिए गर्व का वक्त है। वामपंथी, कांग्रेसी गठजोड़ से मुस्लिम तुष्टीकरण को ही राष्ट्रधर्म, धर्मनिरपेक्षता मानने का दौर खत्म हो गया। आज राष्ट्रवाद ही राष्ट्रधर्म है। 

प्रश्न- आरोप लगता है उत्तरप्रदेश में ब्यूरोक्रेसी हावी है और सपा के कार्यकाल में जो अफसर हावी थे उन्होंने यहां भी अपनी जगह बना ली है?
उत्तर- कुछ अफसर मनमानी करते हैं। लेकिन ये मनमानी तब तक चलती है जब तक नेतृत्व को पता न चले। आज मैं किसी बड़े पद पर नही हूँ। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से जब भी समय मांगा वे बुलाते हैं। अगर किसी कार्यकर्ता को लेकर गया तो उसकी पूरी बात सुनते हैं। कहीं कोई कमी हुई तो उसका निस्तारण भी होता है। हां सपा, बसपा सरकार की तरह अफसरों को हम गुलाम नही समझते। लेकिन कोई सरकार के खिलाफ काम करेगा, कार्यकर्ताओ की अवहेलना करेगा तो उसका हिसाब करने के लिए तोमर ही काफी है। हमारे नेतृत्व ने इतनी ताकत हमे दी है कि हम गलत व्यक्ति का खुलकर विरोध करें। हर कार्यकर्ता का सम्मान है बस उसे खुद अपनी कीमत समझनी होगी।
 प्रश्न- आपको भाजपा की सबसे बड़ी ताकत और कोई कमजोरी क्या लगती है?
 उत्तर-  हमारे पास राष्ट्रवाद की पूंजी है। मोदी जी के रूप में विश्व का सबसे ताकतवर नेतृत्व हमारे पास है। जनकल्याण का एजेंडा है। कमजोरी होती है तो सुधार करते हैं। फिलहाल किसी तरह की कमजोरी के प्रति जीरो टॉलरेंस है। सत्ता का रोग अभी हमें नही लगा है। 
 प्रश्न- ग़ाज़ियाबाद की बात करें तो एनसीईआर का हिस्सा होने के बावजूद गुड़गांव या नोएडा जैसा विकास यहाँ क्यों नही हुआ?

उत्तर- ये सही है कि अभी बहुत कुछ यहां किया जाना है। हमारे पास क्षमता है। काम हो रहा है। गुड़गांव और नोएडा को नए क्षेत्र के रूप में औद्योगिक इकाइयों के लिहाज से चिन्हित किया गया वहां कंपनिया आईं। उसी लिहाज से इंफ्रास्ट्रक्चर बना। गाज़ियाबाद में भी बहुत काम हो रहा है। 
 प्रश्न- एक आरोप लगता है कि बाहरी नेताओं ने ग़ाज़ियाबाद का उपयोग अपनी सियासत चमकाने के लिए किया लेकिन यहां की जरुरतो पर ध्यान नही दिया? क्या आरोप में दम है।
 उत्तर- बाहरी कोई नही होता अगर उसका दिल से जुड़ाव है। आप जहाँ से चुनाव लड़ते हैं उसको सींचना आपकी जिम्मेदारी है। मैं जब चुनाव हारा तो भी इलाके को नही छोड़ा। जो इस बुनियादी बात को नही समझेगा उसे पद तो मिल सकता है जनता के दिल मे कभी जगह नही मिलेगी। मैं आज भी क्षेत्र में कहीं चला जाऊं गुरु जी गुरु जी का संबोधन आत्मीयता मुझे संतोष देता है। संगठन भी एक मशीन की तरह है कई तरह के कलपुर्जे की जरूरत होती है। सबका अपना महत्व है। 

प्रश्न- आपने 2014 के चुनाव में मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाने का संकल्प लेकर बीच मझधार में कांग्रेस का टिकट छोड़ दिया। आपको लगता है सही फैसला था?
 उत्तर-मैं मोदी जी के आभामंडल और उनके शक्तिशाली नेतृत्व की लहर से भला कैसे बचता। मुझे गर्व है कि मैं उस वक्त अपना स्वार्थ भूल गया। बहुत लोगों ने कोसा, गालियां दीं। आरोप लगाए। परिवार के खिलाफ साजिश की गई। कई अपनो ने कुचक्र किया। लेकिन उद्देश्य बड़ा था ये मुझे अंदर से संतोष देता है। मैं कभी दिल से कांग्रेस में नही रहा। आज चीन, पाकिस्तान पर कांग्रेस या एक परिवार की हरकत देखता हूँ तो बार बार लगता है मेरा फैसला बहुत सामयिक था। कांग्रेस जनता से संपर्क खो चुकी है। चीन पर राजकुमार की भाषा सेना का अपमान है। कांग्रेस की बदनीयती से लोगों का मोहभंग हो चुका है।
 प्रश्न- आपके समर्थकों से जब भी बात होती है वे कहते हैं आपके साथ अन्याय हुआ। आपकी कुर्बानी का इनाम मिलना चाहिए था? लेकिन गाज़ियाबाद में उन नेताओं को आगे कर दिया गया जिनका अपना वजूद नही था।
उत्तर-देखिये ये अंतहीन बहस है। मैं इस रूप में नही देखता। मेरे लिए यही संतोष है कि मोदी जी देश के प्रधानमंत्री हैं। ये गर्व की बात है। उन्होंने 2014 लोकसभा के बीच चुनाव में गले लगाया। धौलाना से चुनाव लड़ा तो मुस्लिम बहुल सीट पर मुझे लोगों का बहुत प्यार मिला। ये सही है कि स्थानीय स्तर पर कुछ अपनो ने षड्यंत्र न किया होता तो नतीजा कुछ और होता।  मोदी जी, अमित शाह, योगी जी शीर्ष नेतृत्व ने हमेशा मान दिया। आज भी उनका आशीर्वाद है। 
प्रश्न- आप अपनी भावी भूमिका क्या देखते हैं?
उत्तर-मैं तो आज भी इलाके में सक्रिय रहता हूँ। मेरा मानना है जनसेवा केवल पद से नही होती। पद आपका काम आसान जरूर कर देता है। लेकिन हम लड़ने वाले लोग हैं। कोविड संकट में भी मैं लगातार लोगों के बीच रहा। जो भी आदेश पार्टी देगी करता रहूंगा। हजारों लोगों तक मदद पहुंचाई। मेरे कहने पर क्षेत्र के बहुत से कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री कोविड राहत कोष में राहत राशि दी। सेवा से कौन रोक सकता है।


प्रश्न- आखिरी सवाल। भाजपा में इतने लंबे वक्त के बाद आपको एक कार्यकर्ता के नाते क्या खुशी होती है। पूर्ण बहुमत की सरकार देखना। धारा 370 समाप्त होना या राममंदिर निर्माण का रास्ता प्रशस्त होना?

उत्तर-धारा 370 खत्म होना एक सपने का साकार होने जैसा था। बचपन से यही नारा लगाते आये थे। 370, राममंदिर और समान नागरिक संहिता। सरकार जब सरोकार पूरा करे तो इससे बड़ी खुशी क्या होगी। राममंदिर के लिए तो हमने कई सरकार कुर्बान कर दी थी। 370 के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने अपना बलिदान दिया। इतिहास मोदी जी के साहसिक फैसलों और अमित शाह के जीवटपन का साक्षी रहेगा।






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