दैनिक यूपी ब्यूरो
28/06/2020  :  16:35 HH:MM
कोविड संकट की मार, बच्चों में होगी कुपोषण की समस्या दोगुनी
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दुनिया भर के विशेषज्ञ कुपोषण की मार बच्चो पर पड़ने को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि कोविड - 19 की वजह से बच्चों में कुपोषण का स्तर दोगुना हो सकता है और गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ने के साथ उनकी मौत का खतरा भी बढ़ सकता है।

दैनिक यूपी। दुनिया भर के विशेषज्ञ कुपोषण की मार बच्चो पर पड़ने को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि कोविड - 19 की वजह से बच्चों में कुपोषण का स्तर दोगुना हो सकता है और गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ने के साथ उनकी मौत का खतरा भी बढ़ सकता है। पोषण के लिए काम कर रही संस्थाओ ने अध्ययन का हवाला देते हुए सरकार से त्वरित एक्शन प्लान बनाने को कहा है।

  लांसेट की रिपोर्ट का विश्लेषण करके यूनिसेफ ने भारत मे अगले छह महीने में तीन लाख मौतें होने का अनुमान लगाया था। वहीं हर दिन 6000 बच्चों की अतिरिक्त मौत का खतरा बताया गया था। अब सीएफएनएस जैसे स्वयंसेवी संस्थाओं ने इस दावे की पड़ताल करते हुए कहा है कि गंभीर रूप से कुपोषित बच्चो की मौत का खतरा सबसे ज्यादा है क्योंकि कोविड के दौरान उनकी जो देखभाल होना चाहिए थी वह नही हो पाई।

खाद्य और पोषण सुरक्षा के गठबंधन (कोलेशन फ़ॉर फ़ूड एंड न्यूट्रिशन सिक्योरिटी - सीएफएनएस) के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर सुजीत रंजन के मुताबिक रिपोर्ट में चेताया गया है  कि भूख और कुपोषण का स्तर कुछ ही हफ्तों के भीतर दोगुना हो सकता है।

 कोविड संकट के चलते करीब 14 लाख आंगनबाड़ी में कामकाज प्रभावित होने से भोजन वितरण पर प्रतिकूल असर पड़ा है। घर घर निगरानी की व्यवस्था टूटी है। जानकारों का कहना है कि दुनिया भर के गंभीर खतरनाक स्तर के कुपोषण के शिकार बच्चों में करीब 40 फीसदी भारत मे पाए जाते हैं। ये स्तर भी बढ़ सकता है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों आई ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट 2020 में बताया गया था कि भारत मे पांच वर्ष से कम उम्र के करीब 37.9 फीसदी बच्चे बौनेपन और 20.8 फीसद बच्चे कमजोरी,निर्बलता के शिकार हैं। खाद्य और पोषण सुरक्षा के गठबंधन (कोलेशन फ़ॉर फ़ूड एंड न्यूट्रिशन सिक्योरिटी - सीएफएनएस) के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर सुजीत रंजन ने कहा कि सामुदायिक स्तर पर बच्चो की स्क्रीनिंग सभी एहतियात के साथ तुरंत शुरू होना चाहिए जिससे बच्चों में गंभीर कुपोषण के मामलों का पता चले। खासतौर पर प्रवासी मजदूरों की वजह से चुनौती बढ़ गई है। इन परिवारों को खतरा काफी ज्यादा है।

 एक अध्ययन में यह भी कहा गया है कि सर्दियों के मौसम की तुलना में मॉनसून के दौरान कुपोषण की समस्या ज्यादा होती है। आंगनबाड़ी आशा कर्मियों के जरिये घर घर निगरानी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पोषक खानपान के बारे में जागरूकता का प्रसार करने को कहा गया है।






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