दैनिक यूपी ब्यूरो
03/05/2020  :  23:41 HH:MM
तहकीकात के बाद ही दर्ज हों मामले कई राज्यों की लॉक डाउन में अनावश्यक केस रोकने की पहल
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नई दिल्ली। लॉक डाउन का तीसरा चरण सोमवार से शुरू हो रहा है। ज्यादातर राज्य सरकारें केंद्र के दिशा निर्देश के तहत लॉक डाउन का सख्ती से पालन करने के पक्ष में हैं।



नई दिल्ली।
लॉक डाउन का तीसरा चरण सोमवार से शुरू हो रहा है। ज्यादातर राज्य सरकारें केंद्र के दिशा निर्देश के तहत लॉक डाउन का सख्ती से पालन करने के पक्ष में हैं। लेकिन केंद्र द्वारा कई गतिविधियों को दी गई छूट के बाद कुछ राज्य सरकारों का मानना है कि लॉक डाउन उल्लंघन के लिए आईपीसी की धारा 188 का उपयोग सोच समझकर किया जाना चाहिए।

 *जानबूझकर न थोपे जाएं मामले* 
 पंजाब में  इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि कुछ  गतिविधियों को शुरू करने की मिली इजाजत के बीच आम लोगों पर उल्लंघन के मामले सोच समझकर थोपे जाएं। पंजाब सरकार द्वारा गठित कमेटी का मानना है कि आईपीसी की धारा 188 का उपयोग करने से पहले प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन होना चाहिये। राजस्थान और छतीसगढ़ ने भी केस दर्ज करने से पहले पर्याप्त तहकीकात पर जोर दिया है। 
 *बेहद जरूरी होने पर दर्ज हो मामला* 
 राज्य चाहते हैं कि अनावश्यक कानूनी दांवपेंच के बजाय जनसहयोग पर जोर देना चाहिए। मामले वहीं दर्ज हों जहाँ बेहद जरूरी हो। इसी तरह चालान से पहले ये सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कोई व्यक्ति अति जरूरी सेवा से जुड़े काम के लिए जा रहा हो तो उसे परेशान न किया जाए।
 *जरूरी सेवाओ में लगे लोगों को न हो परेशानी* 
सूत्रों ने कहा कि कई जगहों से फीडबैक मिला है कि अत्यावश्यक सेवाओ से जुड़े लोगों का चालान किया गया है। इस संबंध में कई राज्यों ने सम्बंधित एजेंसियों को सचेत किया है।
 *केंद्र मापदंडों के पालन पर गंभीर* 

सूत्रों ने कहा कि केंद्र सरकार ने भी विचार विमर्श के दौरान स्पष्ट किया है कि लोगों का सहयोग और ज्यादा से ज्यादा जागरूकता लॉक डाउन अनुपालन का मूल आधार होना चाहिए। जहां जानबूझकर कानून तोड़ने या उल्लंघन के मामले हों वहां कड़ाई जरूरी है। 
 *यूपी की सराहना* 
यूपी सरकार को इस मामले में उदाहरण माना जा रहा है। यूपी में लॉक डाउन पालन के सख्त अनुपालन पर केंद्र ने प्रशंसा भी की थी। 
 *पश्चिम बंगाल को लेकर चिंता* 
केंद्र की ओर से पश्चिम बंगाल गई टीम राज्य में लॉक डाउन अनुपालन के तरीके से संतुष्ट नही हुई। वहां कई जगहों पर लोगों के समूह में एकत्र होने की सूचना मिली।
क्या है धारा 188
1897 के महामारी कानून के धारा 3 में इस बात का जिक्र किया गया है कि अगर कोई तय प्रावधानों का उल्लंघन करता है, सरकार , कानून के निर्देशों, नियमों को तोड़ता है, तो उसे आईपीसी की धारा 188 के तहत दंडित किया जा सकता है। इस संबंध में किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा दिए निर्देशों का उल्लंघन करने पर भी आपके खिलाफ ये धारा लगाई जा सकती है
आईपीसी की धारा 188 के तहत दो प्रावधान हैं-
पहला - अगर आप सरकार या किसी सरकारी अधिकारी द्वारा कानूनी रूप से दिए गए आदेशों का उल्लंघन करते हैं, या आपकी किसी हरकत से कानून व्यवस्था में लगे शख्स को नुकसान पहुंचता है, तो आपको कम से कम एक महीने की जेल या 200 रुपये जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है।
दूसरा - अगर आपके द्वारा सरकार के आदेश का उल्लंघन किए जाने से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा, आदि को खतरा होता है, तो आपको कम से कम 6 महीने की जेल या 1000 रुपये जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है।






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