दैनिक यूपी ब्यूरो
03/04/2020  :  07:14 HH:MM
कोरोना का असर / मूडीज की रिपोर्ट ; भारतीय बैंकों का आउटलुक निगेटिव होने का अनुमान, एसेट क्वालिटी हो सकती है खराब
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मूडीज का मानना है कि देश में कोरोना महामारी के चलते बैंकों की इकोनॉमी गीतिविधियों में सुस्ती आई है जिसकी वजह से आगे बैंकों की असेट क्वालिटी और खराब होने की संभावना है।

नई दिल्ली. मूडीज इंवेस्टर्स सर्विस ने 2 अप्रैल को भारतीय बैकिंग सिस्टम के आउटलुक को स्टैबल से बदलकर नेगेटिव कर दिया है। मूडीज का मानना है कि देश में कोरोना महामारी के चलते बैंकों की  इकोनॉमी गीतिविधियों में सुस्ती आई है जिसकी वजह से आगे बैंकों की असेट क्वालिटी और खराब होने की संभावना है।

मूडीज ने क्या कहा?

मूडीज ने आगे कहा है कि कॉपोर्रेट, स्मॉल मीडियम इंटरप्राइजेज और रिटेल जैसे सभी सेगमेंट्स में बैंकों की असेट क्वालिटी खराब होगी जिससे बैंकों की कमाई पर नकारात्मक प्रभाव पडेगा। मूडीज ने कहा, ''हमने भारतीय बैंकिंग प्रणाली के आउटलुक (परिदृश्य) को स्थिर से बदलकर नकारात्मक कर दिया है। उसने भारतीय बैंकिंग सिस्टम के आउटलुक को स्टैबल से घटाकर नेगेटिव कर दिया है। कोरोना के चलते देश में इकोनॉमिक गतिविधिओं में आई गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ में दिख रही मंदी को और बढ़ाएगी।

बैंकों को समस्या से निकालने के लिए सरकार करे मदद

इकोनॉमिक गतिविधियों में तेज गिरावट और बेरोजगारी में बढ़त की वजह से आम लोगों और कंपनियों की वित्तीय स्थिति को बड़ा झटका लगेगा जिससे आगे बड़े डिफॉल्ट देखने को मिल सकते हैं। मुनाफे और लोन ग्रोथ में गिरावट की वजह से बैंकों के कैपिटलाइजेशन पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा। अगर सरकार पिछले कुछ सालों की तरह सरकारी बैंकों में कुछ और पैसे डालती है तो इन बैंकों को कुछ राहत मिल सकती है।

पब्लिक सेक्टर बैंकों में रहेगी स्थिरता

मूडीज ने रिपोर्ट में आगे कहा है कि हालांकि पब्लिक सेक्टर बैंकों में फंडिंग और लिक्विडिटी की स्थिति में स्थिरता रहेगी लेकिन यस बैंक जैसे डिफॉल्ट की वजह से जोखिम से बचने की भावना बढ़ने की वजह से कुछ प्राइवेट सेक्टर के छोटे बैंकों पर फंडिंग और लिक्विडिटी का दबाव देखने को मिल सकता है।

 

आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ेगा

मूडीज ने आगे कहा है कि देश में कोरोना की वजह से भारत में आर्थिक मंदी का खतरा और बढ़ेगा। ग्लोबल इकोनॉमिक स्थितियों में कमजोरी और 21 दिनों का लॉकडाउन घरेलू मांग और निजी निवेश को प्रभावित करेगा। बता दें कि मूडीज  भारत के 16 कमर्शियल बैंकों की रेटिंग करता है जो बैंकिंग सिस्टम में लगभग 75 फीसदी डिपॉजिट रखते हैं।

 

इससे पहले जीडीपी ग्रोथ का घटने का अनुमान दिया था

मूडीज ने इससे पहले मार्च के आखिर में भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटा दिया था। मूडीज ने कैलेंडर वर्ष 2020 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 2.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। इससे पहले इसी माह मूडीज ने भारत की जीडीपी ग्रोथ 5.3 फीसदी और फरवरी में 5.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। मूडीज ने कहा है कि कोरोनावायरस महामारी से पड़ने वाले आर्थिक बोझ के कारण जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में बदलाव किया गया है। आपको बता दें कि 2019 में वास्तविक ग्रोथ 5 फीसदी रही थी। मूडीज ने 2020 का अनुमानित ग्रोथ रेट जारी करते हुए कहा है कि 2020 में भारत में इनकम में तेज गिरावट होगी। हालांकि, फर्म ने कहा है कि 2021 में घरेलू मांग में तेजी से रिकवरी होगी।






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