दैनिक यूपी ब्यूरो
02/04/2020  :  16:22 HH:MM
जाहिलों की जमात, आपराधिक लापरवाही
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निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात मरकज का सबक हैरान करने वाला है। पूरी दुनिया त्राहि त्राहि कर रही है। रहस्यमयी कोरोना ने बड़ी बड़ी शक्तियों को नतमस्तक कर दिया है। दुनिया हैरान है परेशान है। लेकिन हैवान नही मान रहे। पूरा देश लॉक डाउन में है। लेकिन धर्म के नाम पर मरकजी निजामुद्दीन में अधर्म का सबसे बड़ा नंगा नाच करते रहे। कई देशों और देश के विभिन्न प्रदेशों के लोग मरकज में शामिल हुए। हैरान करने वाले खुलासे हो रहे हैं

अंजना शर्मा
निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात मरकज का सबक हैरान करने वाला है। पूरी दुनिया त्राहि त्राहि कर रही है। रहस्यमयी कोरोना ने बड़ी बड़ी शक्तियों को नतमस्तक कर दिया है। दुनिया हैरान है परेशान है। लेकिन हैवान नही मान रहे। पूरा देश लॉक डाउन में है। लेकिन धर्म के नाम पर मरकजी निजामुद्दीन में अधर्म का सबसे बड़ा नंगा नाच करते रहे। कई देशों और देश के विभिन्न प्रदेशों के लोग मरकज में शामिल हुए। हैरान करने वाले खुलासे हो रहे हैं। मक्का मदीना बंद है, बड़े बड़े मस्जिदों में ताला लटक रहा है। मंदिरों के कपाट नवरात्रि में बंद हो कोई कल्पना कर सकता है। लेकिन ऐसा ही हुआ है। गुरुद्वारे शांत भाव से होनी को निहार रहे हैं। पूरी दुनिया के धार्मिक क्रियाकलाप ठप पड़ गए हैं। क्यों न हो जब जिंदगी ही ठहर गई है। ऐसे में जाहिलों की जमात ही कही जाएगी चाहे वह कहीं भी जमी नजर आए। अनावश्यक लापरवाही से मरकज में शामिल हुए लोग न सिर्फ अपनी जान के दुश्मन बन गए बल्कि उन्होंने हज़ारों, लाखों लोगों की जान जोखिम में डाल दी। 
लेकिन बड़ा सवाल कुछ और भी है। उन्हें ऐसा करने की इजाजत क्यों दी गई। जब पुलिस को पता था, वीडियो बनाये जा रहे थे तो किस बात का इंतजार हो रहा था।  देश के प्रधानमंत्री ने पहले जनता कर्फ्यू फिर लॉक डाउन की घोषणा की। लेकिन क्या प्रशासन प्रधानमंत्री की बात को भी गंभीरता से नही सुन रहा था। 21 को एडवाइजरी, 28 और 29 को फिर एडवाइजरी बाबू कागज में बहुत पक्के होते हैं। वीडियो यानी सबूत भी। लेकिन जमीन पर क्या हुआ। जब देश विपदा में हो। दुनिया पर संकट हो। लोग भारी कीमत चुकाने को तैयार हैं। ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि प्रशासन मिन्नतों पर निर्भर रहा। क्यों नही आपदा प्रबंधन की धाराओं के प्रयोग हुआ। प्रधानमंत्री के निर्देश का देश की राजधानी दिल्ली में ही अनुपालन गृहमंत्रालय के अधीन पुलिस क्यों नही करा पाई। क्यों देश भर में मरकजी जमात के लोगों को बिना जांच के आने जाने दिया गया। पर्यटन वीजा पर आए विदेशी संकट के समय हमारे देश के कानून को धज्जियां उड़ा रहे थे तो हमारी एजेंसिया क्या कर रही थीं। दुर्भाग्य है। विपदा और आपदा के वक्त घोर आपराधिक व अछम्य लापरवाही बक सिलसिला केंद्र से लेकर राज्यों तक मे चलता रहा। देश के कानून पसंद और मर्यादा का पालन करने वाले लोगों ने प्रधानमंत्री के एक संदेश पर खुद अपनी जान और देश की हिफाजत के लिए स्वयं ही लक्ष्मण रेखा खींच ली। लेकिन लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन करने वालों को क्या सजा दी जाएगी देश ये भी देखना चाहेगा। ये अघोषित युध्द काल है। जो काल बनकर आये कोरोना से लड़ा जा रहा है और युद्धकाल में जो भी देशहित के खिलाफ काम करे, लापरवाही करे, युद्ध के मैदान में तय कर्तव्यों से विमुख हो जाये उसकी सजा राज्य यानी देश के राजा या मुखिया को तय करनी चाहिए यही न्याय और राजसत्ता का सिद्धांत है। अन्यथा कोई भी लक्ष्मण रेखा देश की रक्षा नही कर सकती। बहुत देर हुई है। मामला काफी बढ़ गया है। लेकिन सुकून है कि अभी भी नियंत्रण से बाहर नही है। इसलिए प्रधानमंत्री जी दंड चक्र उठा लीजिये। क्योंकि देश आपकी ओर देख रहा है। संदेश दिल्ली से जाना चाहिए। जान का मसला है। और आपने ही कहा है जान है तो जहान है।
जय हिंद






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