दैनिक यूपी ब्यूरो
23/11/2019  :  22:23 HH:MM
महाराष्ट्र के उलटफेर के पीछे जूनियर पवार की महत्वाकांछा या अज्ञात भय
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आकलन महाराष्ट्र के उलटफेर के पीछे जूनियर पवार की महत्वाकांछा या अज्ञात भय महाराष्ट्र की सियासत में सबसे बड़े उलटफेर के बाद पवार का पावर गेम फिर से सुर्खियों में है। अजित पवार को डिप्टी सीएम बनाकर जिस तरह से सुबह होते ही देवेंद्र फडणवीस ने दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है उसे पवार का फिक्स गेम माना जा रहा है।

आकलन
महाराष्ट्र के उलटफेर के पीछे जूनियर पवार की महत्वाकांछा या अज्ञात भय
महाराष्ट्र की सियासत में सबसे बड़े उलटफेर के बाद पवार का पावर गेम फिर से सुर्खियों में है। अजित पवार को डिप्टी सीएम बनाकर जिस तरह से सुबह होते ही देवेंद्र फडणवीस ने दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है उसे  पवार का फिक्स गेम माना जा रहा है। दो दिन पहले संसद में शरद पवार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई उस वक्त भी अटकलें लगाई गई। लेकिन किसी को ज्यादा शक इसलिए नही हुआ क्योंकि एनसीपी - कांग्रेस और शिवसेना के बीच पावर साझा करने को लेकर बातचीत चल रही थी। 
फिलहाल कई तरह के सियासी आकलन के बीच माना जा रहा है कि अजित पवार ने अपनी दूर की सियासत को ध्यान में रखकर फैसला लिया है। सूबे में पिछली भाजपा सरकार के दौरान वे जिस तरह के विवादों से घिरे थे उससे उनपर भ्रष्टाचार की बड़ी तोहमत का डर बना हुआ था। कहा जा रहा है अजित पवार के अज्ञात भय ने भाजपा का काम आसान कर दिया। जूनियर पवार को लगा अगर शिवसेना के साथ सरकार बनाई जा सकती है तो भाजपा के साथ सरकार बनाने में कोई विचारधारा का संकट नही है। दूसरा बड़ा पक्ष उनके सामने अपनी भविष्य की राजनीति का था अगर वे किसी भ्रष्टाचार सम्बन्धी झंझावात में उलझते तो उन्हें शिवसेना के साथ सरकार बनाने के बाद भी मुश्किलों से दो चार होना पड़ सकता था। कुछ जानकार मानते हैं कि उन्हें एजेंसियों के ट्रैप मे उलझने का डर था। जिससे वे शिवसेना के साथ डिप्टी सीएम बन भी जाते तो बाद में इस्तीफा देने का दबाव होता। 
एक पक्ष ये भी है कि अजित पवार काफी समय से पार्टी में अपनी पकड़ को लेकर चिंतित थे। उन्हें ये आशंका थी कि कहीं उनकी कीमत पर शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले को आगे न बढ़ाया जाए। 
फ़िलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे बड़े उलटफेर से एनसीपी और कांग्रेस के रिश्तों में भी दरार पड़ सकती है। पवार के अतीत को देखते हुए कांग्रेस आसानी से ये नही पचा पाएगी कि उनकी सहमति के बिना इतना बड़ा सियासी खेल हो गया।






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