दैनिक यूपी ब्यूरो
14/10/2019  :  21:51 HH:MM
आतंक के खिलाफ दुनिया के देशों को साथ आने की जरूरत - बिड़ला
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आतंक के खिलाफ दुनिया के देशों को साथ आने की जरूरत - बिड़ला कैंप बेलग्रेड। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा है आतंकवाद पर दुनिया के तमाम देशों को एक साथ आने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज आतंकवाद के मामले में प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है । लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संकीर्ण भूराजनैतिक हितों के कारण इस मुद्दे पर अभी तक प्रभावी वैश्विक कानून नहीं बनाया जा सका है। उन्होंने कहा, विडम्बना यह है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रभावी कानून बनाने की दिशा में होने वाली प्रगति को रोकने के लिए कई देश विभिन्न अप्रासंगिक विचारधाराओं का सहारा लेते रहते हैं । बिड़ला ने आतंक की गंभीर समस्या को रेखांकित करते हुए कहा कि कई ऐसे क्षेत्र हैं, जिनके संबंध में हम गंभीर और सामूहिक रूप से क्षति पहुंचाने वाले मामलों में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कानून विकसित नहीं कर पाए हैं। लेकिन खेद की बात है कि हम ऐसा नही कर पाए हैं। लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत का विश्वास है कि आज के परस्पर निर्भरता वाले विश्व में हम ऐसी अनेक साझा चुनौतियों का सामना कर रहे हैं जिनका समाधान सहकारी और प्रभावी बहुपक्षीय सहयोग के जरिये ही किया जा सकता है। लोक सभा अध्यक्ष इस समय बेलग्रेड (सर्बिया) में अंतर संसदीय संघ की 141वीं बैठक में भारतीय संसदीय शिष्टमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों का सुदृढ़ीकरण : संसद की भूमिका और तंत्र तथा क्षेत्रीय सहयोग का योगदान’ विषय पर सभा को सम्बोधित किया। अन्तरसंसदीय संघ में प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए बिड़ला ने कहा कि न्यायसंगत, शांतिपूर्ण तथा समृद्ध विश्व के लिए एक संतुलित अन्तर्राष्ट्रीय व्यवस्था का होना अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके लिए, ऐसे मानदंड और मानक तैयार किए जाने की आवश्यकता है, जो सम्पूर्ण अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को स्वीकार्य हों। उन्होंने कहा कि आपसी निर्भरता को समझ कर ही आज विश्व के राष्ट्र राज्य एक मंच पर आने के लिए इच्छुक हैं। वे आपसी रिश्तों में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में कानून के शासन को महत्व दे रहे हैं। व्यापार, निवेश और बौद्धिक संपदा, परिवहन और संचार; समुद्र एवं महासागर जैसे विश्व के साझे संसाधनों के मामले में इस सिद्धांत को अपनाया जा रहा है। इसके अलावा, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, आदि जैसे व्यापक क्षेत्रों में भी कानून बनाने के लिए प्रयास किये जा रहा हैं I

आतंक के खिलाफ दुनिया के देशों को साथ आने की जरूरत - बिड़ला

कैंप बेलग्रेड। 

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा है आतंकवाद पर दुनिया के तमाम देशों को एक साथ आने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज आतंकवाद के मामले में प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है । लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संकीर्ण भूराजनैतिक हितों के कारण इस मुद्दे पर अभी तक प्रभावी वैश्विक कानून नहीं बनाया जा सका है। उन्होंने कहा, विडम्बना यह है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रभावी कानून बनाने की दिशा में होने वाली प्रगति को रोकने के लिए कई देश विभिन्न अप्रासंगिक विचारधाराओं का सहारा लेते रहते हैं ।
बिड़ला ने आतंक की गंभीर समस्या को रेखांकित करते हुए कहा  कि कई ऐसे क्षेत्र हैं, जिनके संबंध में हम गंभीर और सामूहिक रूप से क्षति पहुंचाने वाले मामलों में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कानून विकसित नहीं कर पाए हैं। लेकिन खेद की बात है कि हम ऐसा नही कर पाए हैं।

लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत का विश्वास है कि आज के परस्पर निर्भरता वाले विश्व में हम ऐसी अनेक साझा चुनौतियों का सामना कर रहे हैं जिनका समाधान सहकारी और प्रभावी बहुपक्षीय सहयोग के जरिये ही किया जा सकता है।
 लोक सभा अध्यक्ष इस समय बेलग्रेड (सर्बिया) में अंतर संसदीय संघ की 141वीं बैठक में भारतीय संसदीय शिष्टमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों का सुदृढ़ीकरण : संसद की भूमिका और तंत्र तथा क्षेत्रीय सहयोग का योगदान’ विषय पर सभा को सम्बोधित किया। 

अन्तरसंसदीय संघ में प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए  बिड़ला ने कहा कि न्यायसंगत, शांतिपूर्ण तथा समृद्ध विश्व के लिए एक संतुलित अन्तर्राष्ट्रीय व्यवस्था  का होना अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि  इसके लिए, ऐसे मानदंड और मानक तैयार किए जाने की आवश्यकता है, जो सम्पूर्ण अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को स्वीकार्य हों। उन्होंने कहा कि आपसी निर्भरता को समझ कर ही आज विश्व के राष्ट्र राज्य  एक मंच पर आने के लिए इच्छुक हैं। वे आपसी रिश्तों में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में कानून के शासन को महत्व दे रहे हैं। 
व्यापार, निवेश और बौद्धिक संपदा, परिवहन और संचार; समुद्र एवं महासागर जैसे विश्व के साझे संसाधनों के मामले में इस सिद्धांत को अपनाया जा रहा है। इसके अलावा, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, आदि जैसे व्यापक क्षेत्रों में भी कानून बनाने के लिए प्रयास किये जा रहा हैं  I 
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि  जब तक संसद प्रभावी कानून नहीं बनाती है तब तक अन्तर्राष्ट्रीय संधियों, अभिसमयों (conventions) और समझौतों से जुड़े दायित्वों को कानून की किताबों में सम्मिलित नहीं किया जाता।  उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद का यह दायित्व है कि वह अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक कानून बनाने में रचनात्मक भूमिका निभाए।

लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि  सांसंदों के वैश्विक संगठन के रूप में अन्तर-संसदीय संघ, विश्व के सामने मौजूद मुख्य मुद्दों के संबंध में 'विश्वव्यापी संसदीय चर्चा का केन्द्र बिन्दु' बन गया है। उन्होंने कहा कि  अंतर-संसदीय संघ देशों के बीच 'शांति और सहयोग' तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की  स्थापना और मजबूती के लिए निरन्तर काम कर रही है । उन्होंने विश्वाश व्यक्त किया कि अन्तर-संसदीय संघ की सभाओं में व्यापक विचार-विमर्श के लिए उठाए गए मुद्दों के जरिए सांसदगण बहुत कुछ सीखते हैं। साथ ही विभिन्न देशों की संसद अन्तर-संसदीय संघ द्वारा तय किए गए एजेंडे का अनुपालन करते हुए एक सुविचारित जनमत तैयार करती हैं । उन्होंने विश्वाश व्यक्त किया  कि अंतर-संसदीय संघ 21वीं शताब्दी की उभरती वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए लोकतंत्र, सुशासन, शांति और विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देना जारी रखेगा ।

 
 






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