दैनिक यूपी ब्यूरो
11/10/2019  :  20:56 HH:MM
मोदी - जिनपिंग मुलाकात : नजर आई सकारात्मक बॉडी लैंग्वेज और निजी केमिस्ट्री
Total View  444

नई दिल्ली। मोदी - जिनपिंग के मामल्लपुरम में हुई मुलाकात में दोनों शीर्ष नेताओं के बीच जबर्दस्त बॉन्डिंग देखने को मिली। कई विवादित मुद्दों के बावजूद दोनों शीर्ष नेताओं की सौहार्दपूर्ण मुलाकात, सकारात्मक बॉडी लैँग्वेज और निजी केमिस्ट्री से साफ है कि भारत और चीन के संबंधों में विवादों से ज्यादा सहयोग की गुंजायश हो सकती है। जानकारों का कहना है कि दोनों नेताओं ने कश्मीर पर अलग रुख के बावजूद जिस तरह से संवाद कायम रखने की कूटनीतिक परिपक्वता दिखाई है उससे उम्मीद की जा सकती है कि दोनों देश बदलती दुनिया में बहुध्रवीय कूटनीति और एक दूसरे के विवादों से ज्यादा परस्पर संबंधों को तरजीह देने में यकीन कर रहे हैं।


कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि भारत और चीन विश्व में एक महत्पूर्ण धुरी है अगर दोनों देशों के बीच संबंध अच्छे नहीं रहते हैं तो पूरी दुनिया में अस्थिरता का माहौल हो सकता है। इसलिए दोनों देशों के हित में है कि वे आगे के बारे में सोचें और आर्थिक हितों को मजबूत करते हुए सहयोग के नए रास्तों की तलाश करें। दोनों देशों ने यही रास्ता चुना है।
 सामरिक जानकार पी के मिश्र ने कहा कि भारत और चीन दोनों को पता है कि बहुध्रुवीय दुनिया में अपने हितों की रक्षा कैसे करनी हैं। कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खड़ा नजर आ रहा चीन उसके लिए एक सीमा से आगे नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि यह भारत के भी हित में है कि वह चीन से अपने संबंधों को पाकिस्तान के परिप्रेक्ष्य में सीमित करके न देखे। दोनों देशों के बीच व्यापार काफी अच्छा है। व्यापार, सुरक्षा, सामरिक सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की असीम संभावनाएं हैं। निवेश के लिए पर्याप्त अवसर हैं। दोनों शीर्ष नेताओं की मुलाकात में सबकी नजर सहयोग के इन्हीं क्षेत्रों पर है।
कई पूर्व राजनयिक मानते हैं कि भारत और चीन के बीच कश्मीर के मुद्दे पर सीधा कोई विवाद नहीं है लेकिन दोनों देशों के बीच कई अन्य ऐतिहासिक विवाद हैं। इसके बावजूद दोनों देशों ने पिछले कुछ सालों में परिपक्वता से आगे बढ़ने की कोशिश की है। चीन ने कुछ मौकों पर आक्रामकता दिखाई लेकिन दोनों देशों के बीच संवाद की निरंतरता की वजह से स्थिति नहीं बिगड़ी।
सूत्रों ने कहा कि चीन सार्क में पाकिस्तान के अलावा अन्य देशों पर भी निगाह जमाए हुए है। नेपाल,भूटान और बांग्लादेश में वह अपने लिए नए अवसर देख रहा है। जहां भारत के साथ कई बार हितों का टकराव भी नजर आता है। लेकिन जानकार मानते हैं कि जिस तरह से बहुधुव्रीय कूटनीति का दौर है उसमें कोई भी देश परंपरागत संबंधों के आधार पर ही नहीं चल सकता। इसलिए भारत ने चीन से सीधी प्रतिस्पद्र्धा के बजाए उन देशों से अपने संबंधों को बेहतर बनाए रखने का प्रयास किया है जहां उसके पुराने संबंधों का समृद्धशाली इतिहास है। जानकार मान रहे हैं कि जिनपिंग और मोदी की मुलाकात से कई सकारात्मक चीजें बाहर निकलेंगी।






Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   5269617
 
     
Related Links :-
वाहन बीमा और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की रिन्युअल डेट 21 अप्रैल तक बढ़ी
बड़ा ऐलान: UP के सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में नहीं होगी कटौती
लॉकडाउन के चलते सिर्फ 5 फीसदी ट्रक ही सड़कों पर, ढुलाई हो रही प्रभावित- AIMTC
COVID-19: नोएडा में 24 घंटे में आए कोरोना के 7 नए मामले, यूपी में आंकड़ा 116 पर पहुंचा
यूपी सरकार ने बीच राह में धामा अपने मजदूरों का
गीतमय होगा दिल्ली का लालकिला मैदान हर घर तक गीता का संदेश पहुंचाने की योजना
डॉक्टर और मरीजों के बीच बेहतर होगा रिश्ता, सफदरजंग अस्पताल में शुरू हुई कॉउंसलिंग सेवा
उत्तर प्रदेश का जीडीपी ग्रोथ राष्ट्रीय औसत से ज्यादा: वित्त आयोग*
भाजपा कराएगी दिल्ली के सभी जिलों में मुफ्त कैंसर जांच
मोदी - जिनपिंग मुलाकात : नजर आई सकारात्मक बॉडी लैंग्वेज और निजी केमिस्ट्री
 
CopyRight 2016 DanikUp.com