दैनिक यूपी ब्यूरो
07/09/2019  :  13:46 HH:MM
चांद भी अपना होगा चांदनी भी हमारी .....
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चांद भी अपना होगा चांदनी भी हमारी ..... अंजना चांद से बस चंद कदम हम दूर रह गए। मगर हमारा हौसला हजारों मील आगे निकल गया। पूरा देश जिस तरह से चंद्रयान मिशन - 2 के साथ खड़ा नजर आया उससे स्पष्ट हो गया है कि न्यू इंडिया की हसरतें नई हैं और वह राष्ट्र के लिए एक साथ एक सुर से बोलने को तत्पर है। शुक्रवार की रात 12 बजे के बाद शनिवार तड़के करीब एक बजकर 50 मिनट पर मेरी भी सांसे थम सी गई थीं बिल्कुल वैसे ही जैसे देश के सवा सौ करोड़ लोगों की।

चांद भी अपना होगा चांदनी भी हमारी .....
अंजना
चांद से बस चंद कदम हम दूर रह गए। मगर हमारा हौसला हजारों मील आगे निकल गया। पूरा देश जिस तरह से चंद्रयान मिशन  - 2 के साथ खड़ा नजर आया उससे स्पष्ट हो गया है कि न्यू इंडिया की हसरतें नई हैं और वह राष्ट्र के लिए एक साथ एक सुर से बोलने को तत्पर है। 
शुक्रवार की रात 12 बजे के बाद शनिवार तड़के करीब एक बजकर 50 मिनट पर मेरी भी सांसे थम सी गई थीं बिल्कुल वैसे ही जैसे देश के सवा सौ करोड़ लोगों की। देश के प्रधानमंत्री इसरो मुख्यालय में बैठे सवा सौ करोड़ हाथों से अपना हाथ मिलाकर तालियां बजा रहे थे। अपना पूरा जीवन मिशन में न्यौछावर करने वाले वैज्ञानिकों के लिए मानों एक नया जीवन मिलने वाला था। पांच मिनट शेष विक्रम लैंडर चांद पर उतरने को बेताब महज 2.1 किलोमीटर की दूरी पर। अचानक सन्नाटा छा गया। पहले से जानकारी थी कि कुछ देर के लिए संपर्क टूटेगा और फिर लाइन जुड़ेगी तो चांद चंद्रयान की बाहों में होगा। लेकिन ज्यों ज्यों समय बढ़ रहा था हमारी धड़कन भी बढ़ने लगी थी। सन्नाटा गहरा रहा था। आंखों में नजर आने लगा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूर्व इसरो चीफ पल पल की जानकारी दे रहे थे। फिर मौजूदा चीफ आये और प्रधानमंत्री की कान में कुछ कहा। संकेत साफ था। लेकिन दिल भला क्यों माने चांद की आस भला कोई ऐसे कोसे छोड़ सकता था। हम इंतजार करते रहे मायूसी टूटेगी चंद्रयान - 2 बोल उठेगा कि भई ऐसी भी क्या जल्दी अभी कुछ पल हमें अकेले तो बिता लेने दो। फिर सबको हो जाएगा दीदार। कई बार बिछड़ना मिलने से ज्यादा बेहतरीन एहसास देता है। ये एहसास भी हुआ जब इसरो चीफ आये एलान किया कि हमारा चंद्रयान  -2 से संपर्क टूट गया। महज 2 किलोमीटर (2.1) की दूरी पर। बस दो कदम दूर। चांद हमसे अभी मिलने को तैयार न था। लेकिन खूबसूरत एहसास हमसे भला कौन छीन सकता था।  सवा सौ करोड़ देशवासियों का संकल्प नजर आया। चांद हमसे दूर कब था। हमारे दिल मे है और जो दिल मे है वो भला दूर कैसे होगा। मिलना तय है। दिल से मिले हैं गले भी लग जाएंगे यार। आएगा वो दिन भी। हमारे प्रधानमंत्री ने कहा है कि हमारा हौसला कम नही हुआ बढ़ गया है। हम होंगे कामयाब एक दिन। 
चांद भी हमारा, चांदनी भी हमारी।
हमारे वैज्ञानिकों को सलाम।






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