दैनिक यूपी ब्यूरो
04/09/2019  :  18:24 HH:MM
शिक्षक दिवस पर धरना दे सकते हैं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शिक्षक व छात्र
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- इलाहाबाद विश्विद्यालय का मामला दिल्ली पहुंचा - कुलपति के खिलाफ भ्रष्टाचार व अनैतिक आचरण का विरोध - कुलपति को बर्खास्त करने की मांग

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कथित तौर पर भ्रष्टाचार व वित्तीय अनियमितता का मामला दिल्ली पहुंच गया है। इलाहाबाद विश्विद्यालय अध्यापक संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर राम किशोर शास्त्री और पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कुलपति रतन लाल हंगलू पर भ्रष्टाचार व अनैतिक आचरण का आरोप लगाया है। कुलपति को हटाने की मांग को लेकर पूर्व पदाधिकारियों, शिक्षक व छात्रों ने मानव संसाधन मंत्रालय के सामने धरना देने की चेतावनी दी है। प्रोफेसर शास्त्री ने आरोप लगाया कि वर्तमान कुलपति के कार्यकाल में विश्विद्यालय प्रशासनिक भ्रष्टाचार और वित्तीय अराजकता का अड्डा बन गया है। उन्होंने कहा कि कुलपति पर करोड़ो रूपये के भ्रष्टाचार, अनैतिक व अमर्यादित आचरण के गंभीर आरोप हैं। कई जांच रिपोर्ट में आरोपो की पुष्टि हो चुकी है। लेकिन कुलपति गुंडों के दम पर छात्रों और शिक्षकों को धमकाकर विश्वविद्यालय में आतंक फैलाकर तानाशाही भरा प्रशासन चला रहे हैं। उन्होंने अपने ख़िलाफ़ मामलों को दबाने के लिए ही प्रदेश के वर्तमान डीजीपी ओ पी सिंह को विश्विद्यालय की मानद उपाधि देने का फैसला किया है। 
 पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र ने कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नियमों, अध्यादेश की मनमानी व्याख्या और कुलपति हंगलू की मनमानी की वजह से ही विश्विद्यालय के पूर्व कुलपति सी एल छेत्रपाल ने कार्यपरिषद की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। कुलपति ने आजतक विश्विद्यालय कोर्ट की एक भी बैठक नही की जबकि प्रत्येक सत्र का बजट कोर्ट से पास कराया जाना अनिवार्य है।
पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि कुलपति के चार वर्ष के कार्यकाल में नियम विरुद्ध काम व अंधाधुंध भ्रष्टाचार की वजह से उच्च न्यायालय में लगभग 500 याचिकाएं दाखिल की गई हैं। अवमानना के कारण कुलपति को बार बार कोर्ट में उपस्थित होना पड़ा। शायद इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार विधिविरुद्ध आचरण की वजह से कुलपति और रजिस्ट्रार का वेतन रोका गया। उन्होंने कहा कि दुख की बात है कि विश्वविद्यालय की गलत नीतियों व पठन पाठन के बजाय भ्रष्टाचार की वजह से विश्विद्यालय 200 संस्थाओं की सूची में भी नही है। जबकि 5 वर्ष पूर्व तक इसकी गिनती देश के श्रेष्ठ केंद्रीय विश्वविद्यालयों में होती थी।
आटा के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर शास्त्री ने कहा कि कुलपति ने विश्विद्यालय को दान में मिली राशि मे भी घोटाला किया। 
शिक्षक संघ और छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारियों ने कुलपति हंगलू के ऑडियो व चैट सार्वजनिक करते हुए उनपर गलत आचरण के भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
रोहित मिश्र ने कहा कि जिस किसी ने भी कुलपति के खिलाफ आवाज उठाई उसके खिलाफ झूठे मामले दर्ज करवाने की कोशिश की गई। प्रोफेसर शास्त्री के खिलाफ झूठी तहरीर दी गई।
प्रोफेसर शास्त्री ने कुलपति को बर्खास्त करने की मांग करते हुए कहा कि अगर मानवसंसाधन मंत्रालय अपनी ही कमेटियों की रिपोर्ट को स्वीकार कर ले तो स्पष्ट हो जाएगा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय अवैध नियुक्तियों का अड्डा बन चुका है और नियुक्ति पाने की पहली शर्त भ्रष्ट आचरण में लिप्त होना है।

 
 






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