दैनिक यूपी ब्यूरो
30/07/2019  :  09:20 HH:MM
यौन उत्पीडऩ की भयावहता
Total View  279

पॉक्सो कानून (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल ऑफेंस ऐक्ट) में अमल को चुस्त बनाने के लिए गत हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया। उसने उन राज्यों में विशेष अदालत बनाने को कहा, जहां बच्चों के यौन शोषण के ज्यादा मामले हाल में सामने आए हैं। इस कानून में संशोधन कर इसमें नए सख्त प्रावधान जोड़े जा चुके हैं। मगर सवाल है कि उससे कितनी सूरत बदली है? अब तक कानून को लेकर सरकार और पुलिस का रुख उदासीन ही रहा है। मूल कानून को लागू हुए सात साल बीत जाने के बाद भी अभी देश में डाटा प्रबंधन प्रणाली या एमआईएस (प्रबंधन सूचना प्रणाली) दुरुस्त करना बाकी है। श्रेणी के अनुसार डेटा को अगल-अलग किया जाना है।

सर्वोच्च न्यायालय को गुरुवार को बताया गया कि देशभर में 30 जून तक बाल दुष्कर्म के 1,50,332 मामले लंबित थे और इस प्रकार के मामलों के निपटान की दर महज नौ फीसदी ही रही है। इन मामलों के पीडि़तों को लंबे समय तक इंसाफ का इंतजार करना पड़ता है।
कारण है कि इस समस्या की गंभीरता के बावजूद केंद्र और राज्यों सरकारों ने बाल दुष्कर्म के मामलों को सुनियोजित करने की व्यवस्था नहीं बनाई है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक पोक्सो मामलों के डेटा को सुनियोजित करने के लिए सरकार डेटा प्रबंधन प्रणाली की रूपरेखा तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है। इससे मामलों की सही संख्या और मामले की सुनवाई में प्रगति का पता चलेगा। यानी अभी तक इसकी सूचना उन्हें नहीं है। इसके अलावा बाल दुष्कर्म के मामलों की सुनवाई करने वाले न्यायाधीशों के पास अन्य मामलों का भी बोझ है। जानकारों के मुताबिक पोक्सो से संबंधित 1.5 लाख मामले होने के कारण अलग से पोक्सो अदालत की आवश्यकता है। डेटा प्रबंधन प्रणाली नहीं होने से डेटा का संग्रह, मिलान और विश्लेषण करना काफी कठिन है। अनुभव यह है कि पोक्सो कानून के तहत सुनवाई के दौरान कई बार ऐसा होता है कि पीडि़त प्रतिपक्षी बन जाते हैं। अदालत कक्ष के इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी, बाल हितैषी अधिकारियों का न होना और सुनवाई में समय लगना इसके कारण हैं। अदालत ने इन-प्री अलार्मिग राइज इन द नंबर ऑफ रिपोर्टेड चाइल्ड रेप इंसिटेडेंट्स शीर्षक रिपोर्ट के अनुसार देश भर में इस साल एक जनवरी से लेकर 30 जून तक 24,212 मामले दर्ज किए गए। ये भी बाल यौन उत्पीडऩ का पूरा आंकड़ा है। यानी स्थिति भयावह है। लेकिन इसकी किसी को चिंता नहीं है।






Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   5736063
 
     
Related Links :-
हैदराबाद की सीख......
उन्मादी पाकिस्तान चीन से मिलकर कर रहा साजिश
चांद भी अपना होगा चांदनी भी हमारी .....
हरियाणा में लड़ाई एकतरफा है?
ट्रांसपोर्ट माफिया के दबाव में बढ़ाया कैह्रश्वटन सरकार ने बस किराया : कौर
बेबसाइटों पर प्रलोभनों से बचें और साइबर अपराधों से सुरक्षित रहें : आलोक रॉय
संस्कृतियों, भाषाओं और पहचानों को नुकसान पहुंचने का बड़ा खतरा : बाजव
गुरुग्राम में जलभराव ने खोली सरकार के जुमलों की पोल : वर्धन यादव
कश्मीर : खस्ता-हाल पाकिस्तान
मंदिर बनाने की बात करने वाले संत रविदास का मंदिर ढहाए जाने पर चुप क्यों हैं : निशान सिंह
 
CopyRight 2016 DanikUp.com