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दैनिक यूपी ब्यूरो
28/07/2019  :  10:48 HH:MM
संसद का गौरव बना रहे
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कभी उत्तरप्रदेश में आजम खान संसदीय कार्यमंत्री भी बनाए गए थे। लेकिन उनका संसदीय ज्ञान कैसा रहा होगा। यह आज बहुत स्पष्टता से सबके सामने है। लगातार जीतकर विधानसभा में पहुंचने वाला व्यक्ति, जो मंत्री भी रहा हो और आज सांसद भी है उसकी ओर से एक महिला सांसद के प्रति बेहूदी टिह्रश्वपणी शर्मसार करती है।

आसन पर बैठे व्यक्ति की अलग गरिमा होती है। लेकिन जब महिला सांसद आसन पर हो तो उस गौरवपूर्ण क्षण पर गौरवान्वित होने के बजाय उसका मजाक बनाने का प्रयास करना, आपत्तिजनक टिह्रश्वपणी करना नितांत अनुचित ही नहीं दंडनीय है। यह अच्छा है कि पूरा सदन इस मामले में एक सुर में बोल रहा है। असल में लोकतंत्र के मंदिर से जो संदेश नीचे तक जाना चाहिए वह मापदंड बनना चाहिए। सबकी निगाह लोकसभा अध्यक्ष पर है। उनसे उम्मीद की जानी चाहिए कि वे ऐसी नजीर पेश करेंगे जिससे आने वाली पीढ़ी इसका उदाहरण दे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने मौजूदा सत्र जिस तरह से संचालित किया है उससे उम्मीदें बढ़ जाती हैं। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तालमेल बनाने के साथ नई नजीर पेश की है। सदन को मर्यादाओं का एहसास कराया है। ऐसे में पूरा देश उनकी ओर देख रहा है। आजम खान के लिए सोमवार की समय सीमा तय की गई है। उन्हें माफी मांगनी है। अगर वे सदन के सामने बिना शर्त माफी मांगते हैं तो उनके लिए एक मौका हो सकता है। आसन से उनके बयान की कड़ी निंदा करते हुए उन्हें सुधरने का एक मौका देने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन शब्दों से नहीं आचरण से ही व्यक्ति सुधरता है और दुर्भाग्य से आजम का रिकार्ड इस मामले में अच्छा नहीं रहा है। वे सदन के बाहर बार-बार ऐसा करते रहे हैं। चुनाव के वक्त अपनी प्रतिद्वंदी जयाप्रदा के बारे में उनकी टिह्रश्वपणी को लेकर कितना बवाल मचा लेकिन उन्होंने एक बार भी माफी नहीं मांगी। उन्हें शायद ही कभी मलाल हुआ। उल्टे वे खुद को पीडि़त साबित करने का प्रयास करते रहे। फिलहाल आजम देश की संसद में हैं। उन्हें रामपुर की जनता ने चुनकर भेजा है। उनकी पत्नी भी राज्यसभा में हैं। 
मुझे पूरा भरोसा है कि उनकी पत्नी भी उनके आचरण से इत्तफाक नहीं रखेंगी। लेकिन वे किसकी सुनते हैं यह समझ पाना काफी मुश्किल है। संसद में किसी महिला के खिलाफ टिह्रश्वपणी को लेकर इस तरह का महौल कभी बना हो मुझे याद नहीं आता। अगर कभी किसी भी मुद्दे पर किसी ने आहत करने वाली टिह्रश्वपणी की तो उससे खेद जताने को अहं का मुद्दा नहीं बनाया गया। माफी मांगने पर क्षमा करना हमारी प्रवृत्ति रही है। यह बार-बार संसद में भी देखने को मिला है। लेकिन इस बार मामला अलग है। गुरुवार को हुई घटना पर आजम की चुह्रश्वपी हर किसी के समझ से परे है। सोमवार को संसद का सत्र शुरूहोगा अगर आजम संसद में उपस्थित होते हैं तो उन्हें इसी शर्त पर सुकून से बैठने का मौका मिल सकता है जब वे बिना शर्त माफी मांग लें। अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई का विकल्प तो सदन के पास सहमति से होगा। लेकिन एक बदनुमा दाग सदन के माननीयों की परंपरा पर लग जाएगा। भगवान आजम को सदबुद्धि दें। संसद का गौरव बना रहे यही कामना है।






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