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दैनिक यूपी ब्यूरो
14/07/2019  :  10:12 HH:MM
संकल्प लें : पानी बचाएंगे, बिन पानी सब सून...
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हमारा देश अपने इतिहास के सबसे गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। आर्थिक वृद्धि की रफतार पर कितनी भी बहस कर लें। तमाम इंडेक्स में ऊपर नीचे होने की कहानी पर इतरायें या आलोचना करें, सचाई यह है देश में करीब 60 करोड़ लोग पानी की गंभीर किल्लत का सामना कर रहे हैं। 60 करोड़ लोग यानी लगभग आधी आबादी।

नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक करीब दो लाख लोग स्वच्छ पानी न मिलने के चलते हर साल जान गंवा देते हैं। ‘समग्र जल प्रबंधन सूचकांक (सीडब्ल्यूएमआई)’ रिपोर्ट में कहा गया है कि संकट और गंभीर होने जा रहा है। 2030 तक देश में पानी की मांग उपलब्ध जल वितरण की दोगुनी हो जाएगी। यानी करोड़ों लोगों के लिए पीने को पानी उपलब्ध कराना मुश्किल हो सकता है। तालाब सूख रहे हैं, हमारी नहरें नदियां सूख रही हैं। आर्थिक वृद्धि दर पर भी इसका असर होगा और जीडीपी में छह प्रतिशत तक की कमी देखी जाएगी। अलग-अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 70 प्रतिशत प्रदूषित पानी के साथ भारत जल गुणवत्ता सूचकांक में 122 देशों में 120वें पायदान पर है। कुछ राज्यों ने स्थिति की भयावहता को भांपकर जल प्रबंधन की रणनीति पर सकारात्मक तरीके से काम शुरू किया है। गुजरात को जल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन के मामले में पहला स्थान दिया गया है। गुजरात के बाद मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र का नंबर आता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों में त्रिपुरा शीर्ष पर रहा है जिसके बाद हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और असम का नंबर आता है। नीति आयोग द्वारा बनाये गए 9 वृह्द क्षेत्रों के 28 संकेतकों के विभिन्न पहलुओं जैसे-भूजल, जल निकायों का पुनरोद्धार,सिंचाई,कृषि कार्य,पेयजल,नीतियां और शासन के सम्मिलित करते हुए जल प्रबंधन सूचकांक तैयार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार जल प्रबंधन के मामले में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्य रहे हैं। सारी स्थिति हमारे सामने है। कई साल इस चेतावनी को भी बीत चुके हैं कि अगला युद्ध तेल के स्रोत पर कब्जा जमाने के बजाय शायद पानी के लिए होगा। अब भी अगर इससे निपटने को कोई तैयार नही हैं तो ये बहुत ही शर्मसार करने वाली स्थिति होगी। संतोष की बात है कि केंद्र सरकार ने नाजुक स्थिति को समझा है। जल शक्ति के लिए अलग से मंत्रालय का गठन सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है। चुनौती बड़ी है। इसलिए व्यापक तैयारी से ही इससे निपट सकते हैं। सरकार सक्षम है, समर्थ है। राज्य सरकार और हमारी हरियाणा सरकार भी स्थिति को संभालने और दूसरों के लिए मॉडल बनने की छमता रखती है। लेकिन जनभागीदारी के बिना इस चुनौती से निपटना शायद मुमकिन नहीं होगा। लोगों को जल की महत्ता, जल संरक्षण की जरूरत से अवगत कराने की जरूरत है। हमें अपने तालाब जीवित करने होंगे। वर्षा जल का बेहतर प्रबन्धन के साथ संचय करना होगा। पानी की एक-एक बूंद बचाना करोड़ों लोगों की जिंदगी बचाने जैसा होगा। इस महाअभियान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प समस्त देशवासियों के संकल्प बनना चाहिए। हमारा हरियाणा पूरी ताकत से अभियान में भागीदार बनेगा। एक जवाबदेह, जनोन्मुखी अखबार के नाते हम भी इस महासंकल्प में भागीदार होंगे। आइये
शुरुआत करें। याद रखिये किसी भी संदर्भ में कहा गया हो लेकिन बिन पानी सब सून ये वर्तमान संदर्भ की सचाई है। पानी बचाइए धरती पर जीवन बचाइए। -जय हिंद






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