दैनिक यूपी ब्यूरो
06/07/2019  :  08:47 HH:MM
देश में स्टार्टअप और उदीयमान उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा : वित्त मंत्री
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नई दिल्ली केन्‍द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारामन ने आज लोकसभा में 2019-20 का केन्‍द्रीय बजट पेश करते हुए अनेक ऐसे कर प्रस्‍तावों की घोषणा की जिनका उद्देश्‍य उन्‍नत प्रौद्योगि‍की वाले उदीयमान उद्योगों और स्‍टार्ट-अह्रश्व‍स में निवेश को बढ़ावा देना है।

आर्थिक विकास के साथ-साथ ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष योजना का शुभारंभ किया जाएगा जिसके तहत सेमी-कंडक्‍टर फैब्रि‍केशन, सोलर फोटो वोल्टिक सेल, लिथियम स्‍टोरेज बैटरियों, सोलर इलेक्ट्रिक चार्जिंग बुनियादी ढांचागत सुविधाओं, लैपटॉप और कम्‍ह्रश्व‍यूटर सर्वर जैसे उदीयमान एवं उन्‍नत प्रौद्योगिकी वाले क्षेत्रों में बड़े विनिर्माण संयंत्रों की स्‍थापना के लिए एक पारदर्शी प्रतिस्‍पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए वैश्विक कंपनियों को आमंत्रित किया जाएगा। वैश्विक कंपनियों को आयकर अधिनियम की धारा 35
एडी के तहत निवेश से जुड़ी आयकर छूट के साथ-साथ अन्‍य अप्रत्‍यक्ष कर लाभ दिए जाएंगे।

‘ई-सत्‍यापन’ को सुलझाया जाएगा : तथाकथित ‘एंजल टैक्‍स’ मुद्दे को सुलझाने के लिए अब से शेयर प्रीमियम के मूल्‍यांकन के मामले में स्‍टार्ट-अह्रश्व‍स के साथ-साथ उन निवेशकों की कोई जांच नहीं की जाएगी जो अपने रिटर्न में आवश्‍यक घोषणाओं एवं सूचनाओं का उल्‍लेख करते हैं। निवेशक की पहचान के साथ-साथ उसकी धनराशि के स्रोत का पता लगाने के मुद्दे को ‘ई-सत्‍यापन’ की एक समुचित व्‍यवस्‍था स्‍थापित कर सुलझाया जाएगा। इसके साथ ही स्‍टार्ट-अह्रश्व‍स द्वारा जुटाई गई धनराशि की किसी भी तरह की जांच आयकर विभाग द्वारा कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। स्‍टार्ट-अह्रश्व‍स के लंबित आकलन और उनकी शिकायतों के निवारण के लिए सीबीडीटी द्वारा विशेष प्रशासनिक व्‍यवस्‍थाएं की जाएंगी। कर-निर्धारण अधिकारी के सुपरवाइजर अधिकारी की मंजूरी मिले बगैर कोई भी जांच
अथवा सत्‍यापन नहीं कराया जा सकता है। स्‍टार्ट-अह्रश्व‍स के लिए यह आवश्‍यक नहीं होगा कि वे श्रेणी के वैकल्पिक निवेश फंडों को भी जारी किए गए अपने शेयरों के बाजार मूल्‍य को जायज ठहराए। इन फंडों को जारी किए गए शेयरों का मूल्‍यांकन आयकर जांच के दायरे से बाहर होगा। स्‍टार्ट-अह्रश्व‍स के मामले में नुकसान को आगे ले जाने और समायोजित करने के लिए कुछ शर्तों में ढील देने का भी प्रस्‍ताव है। स्‍टार्ट-अह्रश्व‍स में निवेश के लिए आवासीय मकान की बिक्री से प्राह्रश्व‍त पूंजीगत लाभ की छूट की अवधि को 31 मार्च, 2021 तक बढ़ाने का प्रस्‍ताव है। सीमा शुल्‍क प्रस्‍तावों का उद्देश्‍य ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता कम करना, एमएसएमई सेक्‍टर को संरक्षण देना, स्‍वच्‍छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और गैर- आवश्‍यक आयात पर अंकुश लगाना है। जहां एक ओर घरेलू
उद्योग को बढ़ावा देने के लिए भारत में निर्मित किए जा रहे कुछ विशेष इले‍क्‍ट्रॉनिक वस्‍तुओं पर सीमा शुल्‍क लगा दिया गया है, वहीं दूसरी ओर कुछ अन्‍य ऐसे पूंजीगत सामान पर सीमा शुल्‍क को हटा दिया गया है।






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