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दैनिक यूपी ब्यूरो
24/05/2019  :  09:34 HH:MM
सच....मोदी के रहते ही यह मुमकिन है
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चुनाव में भाजपा की ओर से कई नारे गढ़े गए। एक नारा था, मोदी हैं तो मुमकिन हैं। विपक्ष ने कई नकारात्मक तथ्यों के साथ इस नारे की खिल्ली उड़ाई लेकिन चुनाव में चले मोदी मैजिक के बाद शायद विपक्ष के नेता भी कह रहे होंगे सचमुच यह मोदी के होते ही मुमकिन है।

देश  के राजनीतिक इतिहास में एक बहुमत वाली सरकार उससे भी ज्यादा प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा आए यह अपवाद की स्थिति है। लेकिन मोदी हैं तो मुमकिन है यह स्पष्ट हो गया। मोदी ने चुनावी नारों को जमीन तक पहुंचाने का काम स्वंय अपने हाथों में लिया था। उन्होंने अपनी सभाओं में नारे लगवाए आएगा तो ....जनता जवाब देती थी मोदी ही । सचमुच मोदी ही आए। चौकीदार चोर है के जवाब में उन्होंने सबको चौकीदार बनाकर गालियों को हार बनाने की अद्भुत कला का संदेश लोगों को दिया। उनके खिलाफ राफेल को मुद्दा बनाने की कोशिश की गई तो कांग्रेस पर यह भी उल्टा ही पड़ा। मोदी हटाओ के नकारात्मक अभियान को जनता ने न सिर्फ खारिज किया बल्कि लोग मोदी लाओ के लिए मानो दूने उत्साह से जुट गए थे। चुनाव के ठीक पहले पुलवामा हमले और उसका बदला लेने के लिए बालाकोट में की गई एअर स्ट्राइक से भाजपा का राष्ट्रवाद का नारा गांव-गांव तक पहुंच गया। दूसरी ओर विपक्ष से बालाकोट को लेकर उठाए गए सांकेतिक सवालों ने जनता के मन में विपक्ष की राजनीति को लेकर गुस्सा बढ़ा दिया।

मोदी की अगुवाई में भाजपा को मिली जीत से साबित हो गया है कि देश को एक ऐसा नेता मिल गया है जिसकी उत्तर, दक्षिण या पूर्व देश के हर कोने में अपील है। बंगाल के अभेद्य माने जा रहे सियासी किले में उन्होंने सेंध लगा दी। ओडिशा में भी उनकी अपील ने भाजपा को पहले से ज्यादा ताकत दी। उत्तरप्रदेश में जातियों की ब्यूह-रचना के सहारे बनाए गए गठबंधन को उन्होंने ध्वस्त कर दिया। परिवारों की विरासत को उनके जादुई करिश्मे ने ढहा दिया। क्या अमेठी, क्या गुना कोई भी कांग्रेस का ऐसा घर नहीं रहा जिसे वे सुरक्षित मान सकें। मुलायम की पारिवारिक विरासत को लेकर मैदान में उतरे अखिलेश अपने परिवार की पूरी सीटें भी नहीं बचा पाए। हरियाणा में हुड्डा, चौटाला सबके गढ़ धाराशायी हो गए और इन सबके पीछे केवल एक व्यक्ति का जादू था जिसे मोदी मैजिक कहते हैं। इस चुनाव ने मोदी के बाद अगर किसी व्यक्ति की ताकत सबसे ज्यादा बढ़ाई है तो वे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह हैं। शाह की रणनीति ने मोदी को शहंशाह बनाने में अहम भूमिका निभाई है इसे शायद ही कोई नकार सके। कई बार लगता है मोदी - शाह की रणनीति का कोई जवाब विरोधी दलों के पास नहीं रह गया। इस नतीजे के बाद यह भी साफ हो गया है कि अब देश में चंद जातियों के सहारे राजनीति नहीं की जा सकती। अगर राजनीति करनी है तो एक समग्र दृष्टिकोण अपनाना होगा। ऐसी छवि के नेता तैयार करने होंगे जिनपर विरासत का बोझ नहीं नई सोच हो। देश के लिए यह ऐतिहासिक पल है। आईए लोकतंत्र के उत्सव के सफल समापन का जश्न मिलकर मनाएं। यह देश की सरकार है। मोदी देश के प्रधानमंत्री होंगे। दलों के दलदल से निकलकर उम्मीद करें कि देश आगे बढ़ेगा। विश्वगुरु बनने का मुकाम हमें मिलकर हासिल करना है।






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