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दैनिक यूपी ब्यूरो
13/04/2019  :  10:17 HH:MM
इजराइल में फिर नेतन्याहू
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इजराइल में बेंजामिन नेतन्याहू के फिर प्रधानमंत्री बनने की संभावना मजबूत हो गई है। वे तीन बार से लगातार प्रधानमंत्री पद पर बने हुए हैं। अब संभावना है कि नेतन्याहू रिकॉर्ड पांचवीं बार देश के मुखिया बनेंगे। लेकिन नेतन्याहू के लिए इस बार मुश्किलें पहले से काफी अलग हैं। इजराइल के अटॉर्नी जनरल भ्रष्टाचार के तीन मामलों में पुलिस जांच के बाद उनके खिलाफ मुकदमा चलाए जाने की इजाजत दे चुके हैं।
इसके अलावा इस चुनाव में उनकी ‘लिकुड पार्टी’ के सामने एक बड़ी चुनौती मुख्य विपक्षी नेता बेनी गांट्ज भी हैं। इजराइली सेना के पूर्व प्रमुख जनरल बेनी गांट्ज ईमानदार और साफ छवि के नेता हैं। बीते दिसंबर में ही वे ‘इजराइल रेसिलिएंस’ नामक पार्टी बनाकर चुनावी मैदान में उतरे हैं। शुरुआत में उनकी पार्टी को बड़ी चुनौती नहीं माना जा रहा था, लेकिन बीती फरवरी में जब बेनी गांट्ज़ ने तीन पूर्व जनरलों को अपनी पार्टी से जोड़ा। देश की दो अन्य प्रमुख पार्टियां तेलेम और येश अतिद के साथ मिलकर ‘ब्लू एंड वाइट’ गठबंधन बनाया, तो वे मुख्य लड़ाई में आ गए। इसके बाद बीती 28 फरवरी को जब बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ मुकदमा चलाए जाने का आदेश हुआ तो सर्वेक्षणों में ‘ब्लू एंड वाइट’ गठबंधन पहले स्थान पर पहुंच गया। पिछले कुछ सालों से मुख्य विपक्षी पार्टी की भूमिका में रही ‘लेबर पार्टी’ तीसरे नंबर पर थी। लेकिन, इस बार स्थितियां फिर पलट गईं। जानकारों का कहना है कि वे एक बार फिर गठबंधन की सरकार बनाने में कामयाब हो जाएंगे। अब सबसे बड़ा सवाल यह पूछा जा रहा है कि आखिर वह क्या वजह है जिसके चलते भ्रष्टाचार के मामलों में घिरे होने और कुल चार बार सत्ता का सुख भोगने के बाद भी स्थितियां बेंजामिन नेतन्याहू के पक्ष में बनी हुई हैं। इसकी एक बड़ी वजह इजरायल की चुनावी प्रक्रिया भी है। यहां चुनाव ‘अनुपातिक-मतदान योजना’ के तहत होता है। इसमें वोटर को बैलेट पेपर पर प्रत्याशियों की जगह पार्टी को चुनना पड़ता है। किसी भी पार्टी को वहां की संसद (नेसेट) में पहुंचने के लिए कुल मतदान में से न्यूनतम 3.25 फीसदी वोट पाना जरूरी है। अगर किसी पार्टी का वोट प्रतिशत 3.25 से कम रहता है तो उसे संसद की कोई सीट नहीं मिलती। पार्टियों को मिले मत प्रतिशत के अनुपात में उन्हें संसद की कुल 120 सीटों में से सीटें आवंटित कर दी जाती हैं। इसका फायदा मजबूत पार्टी को मिलता है। नेतन्याहू के बार-बार प्रधानमंत्री बनने में इस पहलू का भी योगदान है।






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