दैनिक यूपी ब्यूरो
12/03/2016  :  20:51 HH:MM
विद्यालय और शिक्षकों की बढोत्तरी मगर छात्रों की संख्या में गिरावट
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2014-15 की तुलना में चालू वर्ष 2015-16 में प्राइमरी एवं जूनियर हाईस्कूल में 7,322 छात्रों की संख्या में कमी आयी है। वर्ष 2014-15 में प्राइमरी एवं जूनियर हाईस्कूल में 2,67,950 छात्र थे। इसी प्रकार वर्ष 2014-15 में प्राइमरी ब जूनियर विद्यालयों की संख्या 1871 थी जब कि वर्ष 205-16 में इसकी संख्या बढ़ाकर 1894 हो गयी।

हमीरपुर
 उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिये जारी प्रयासों के बावजूद छात्रों की संख्या में आ रही गिरावट जिला प्रशासन के लिये चिंता का सबब बनी हुयी है। आधिकारिक सूत्रों ने आज यहां बताया कि शैक्षिक सत्र 2014-15 की तुलना में वर्ष 2015-16 में शिक्षकों और विद्यालयों में जहां इजाफा हुआ है वहीं विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या में कमी चिंताजनक है। विभाग द्वारा सरकार को भेजी गयी रिपोर्ट के अनुसार जिले में वर्ष 2014-15 की तुलना में चालू वर्ष 2015-16 में प्राइमरी एवं जूनियर हाईस्कूल में 7,322 छात्रों की संख्या में कमी आयी है। वर्ष 2014-15 में प्राइमरी एवं जूनियर हाईस्कूल में 2,67,950 छात्र थे। इसी प्रकार वर्ष 2014-15 में प्राइमरी ब जूनियर विद्यालयों की संख्या 1871 थी जब कि वर्ष 205-16 में इसकी संख्या बढ़ाकर 1894 हो गयी। सरकार ने जिले में 23 विद्यालयों का नवनिर्माण कराया है। शिक्षकों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। वर्ष 2014-15 में 7959 शिक्षक थे जबकि शासन ने नई भर्ती कर जिले में चालू वर्ष 2015-16 में शिक्षकों की संख्या बढा कर 8403 कर दी। इस तरह एक वर्ष के अनतराल में शिक्षकों की संख्या में 444 बढात्तरी की गयी है। बच्चों की घटती संख्या के कारण भी शिक्षक बच्चों की शिक्षण कार्य में रुचि नही ले रहे है।जिलाधिकारी संध्या तिवारी व कमिश्नर एल.वेंकटेश्वर लू ने पिछले दिनों सुमेरपुर ब्लाक के कई विद्यालयों का निरीक्षण किया था। शिक्षण कार्य में आयी गिरावट को लेकर बेहद नाराजगी व्यक्त करते हुए सभी ब्लाक सह समन्यवकों को हटाकर उन्हे मूलपद में भेजने के आदेश कर दिये थे। दो दिन पहले सरीला के उप जिलाधिकारी एस के त्रिपाठी ने छह प्राइमरी विद्यालयों के निरीक्षण किया और शिक्षा की गुणवत्ता पर असंतोष जाहिर किया। कई विद्यालयों में तो उन्हें केवल एक या दो बच्चे से ही रू-ब-रू होना पडा। श्री तिवारी ने बताया कि सरीला एक पिछड़ा क्षेत्र है मगर प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों की शिक्षा की गुणवत्ता पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि विद्यालयों में बच्चों की यही स्थिति रही तो अप्रैल माह से नये शिक्षा सत्र में ज्यादातर विद्यालयों में एक भी बच्चे नही मिलेंगे। इधर बेसिक शिक्षा अधिकारी डा.इंद्रजीत प्रजापति का कहना है कि कि अगला सत्र अप्रैल माह से शुरु हो जाएगा इसलिये सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के आदेश दिये गये है, ताकि शासन के मुताबिक बच्चों की संख्या में वृद्धि की जा सके।






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