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दैनिक यूपी ब्यूरो
30/08/2018  :  12:45 HH:MM
DU में बना तीसरा मोर्चा, AISA-CYSS आए साथ
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सीवाईएसएस के स्टेट प्रेजिडेंट सुमित यादव ने कहा, डीयू का वोटिंग पर्सेंटेज सिर्फ 30 से 40% रहता है। पिछले साल तो 9000 वोट नोटा को गए थे।

नई दिल्ली , दिल्ली यूनिवर्सिटी में इस बार स्टूडेंट्स यूनियन के चुनाव में एबीवीपी और एनएसयूआई को सिर्फ एक-दूसरे से बल्कि दो और यूनियनों से टक्कर लेनी होगी। दो साल बाद डूसू के चुनावी मैदान में लौटी आम आदमी पार्टी की स्टूडेंट्स विंग सीवाईएसएस को लेफ्ट विंग आइसा का साथ मिला है। 12 सितंबर को होनेवाले डूसू चुनाव के लिए बुधवार को आइसा और सीवाईएसएस ने मिलकर ऐलान किया कि वे 2018-19 का डूसू चुनाव मिलकर लड़ेंगे। प्रेजिडेंट और वाइस प्रेजिडेंट की पोस्ट पर आइसा के कैंडिडेट, तो सेक्रटरी और जॉइंट सेक्रटरी की पोस्ट पर सीवाईएसएस के कैंडिडेट खड़े होंगे। जल्द ही दोनों अपना मैनिफेस्टो भी लॉन्च करेंगे।

सही निर्णय है avbp तो संघ का एक गुंडा संगठन है ही हर जगह सिर्फ गुंडागर्दी मारपीट और हिंसा के लिए ही इसकी पहचान है एनएसयूआई भी avbp का विकल्प नही है कई मुद्दों पर दोनो साथ है छा...+

आप लीडर गोपाल राव ने इनके यूनाइटेड पैनल का ऐलान किया। उन्होंने कहा, डीयू में अभी एबीवीपी और एनएसयूआई की गुंडागर्दी की राजनीति का वर्चस्व है और स्टूडेंट्स से हमें फीडबैक मिला कि वे बदलाव की राजनीति चाहते हैं। अब सीवाईएसएस और आइसा मिलकर एबीवीपी-एनएसयूआई की नेगेटिव राजनीति को हराएंगे।

सीवाईएसएस के स्टेट प्रेजिडेंट सुमित यादव ने कहा, डीयू का वोटिंग पर्सेंटेज सिर्फ 30 से 40% रहता है। पिछले साल तो 9000 वोट नोटा को गए थे। स्टूडेंट्स तंग चुके हैं कि डूसू में एबीवीपी और एनएसयूआई ही आएगी और हिंसा की राजनीति ही दिखेगी। इस वजह से उन्हें हम दोनों मिलकर धनबल की जगह जनबल का ऑप्शन देंगे। आम स्टूडेंट्स ही हमारे कैंडिडेट होंगे। हम दोनों के मुद्दे एक ही हैं और सोच भी, इसलिए हमने साथ मिलकर लड़ने का फैसला किया है। सुमित ने कहा, पिछले साल केंद्र सरकार ने हायर एजुकेशन को लेकर जो फैसले लिए जैसे अटॉनमी का, सिर्फ सीवाईएसएस और आइसा ने इसके खिलाफ लड़ाई लड़ी। लड़कियों की सुरक्षा के लिए भी दोनों ने आवाज उठाई और काम किए बाकियों ने सिर्फ दावे किए।

आइसा की डीयू प्रेजिडेंट कंवलप्रीत कौर ने कहा, डूसू के नाम पर एबीवीपी और एनएसयूआई स्टूडेंट्स का शोषण कर रहे हैं। अगर एबीवीपी गुंडागर्दी करती है, तो एनएसयूआई खामोश रहकर उनका साथ देता है। दोनों के बीच करार है कि हम एक-दूसरे के खिलाफ कुछ नहीं बोलेंगे और मसल्स पावर की पॉलिटिक्स बनाए रखेंगे। इस वजह से चार सालों से कैंपस में ऐकडेमिक फ्रीडम नहीं है। इसी के खिलाफ हम दोनों मिलकर असल मुद्दों के लिए लड़ते हुए स्टूडेंट्स को ऑप्शन देंगे।






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