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दैनिक यूपी ब्यूरो
12/06/2018  :  20:12 HH:MM
भय्यूजी महाराज ने गोली मारकर की आत्महत्या, सुसाइड नोट में बताई वजह
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महाराज ने दोपहर को सिल्वर स्प्रिंग स्थित अपने बंगले की दूसरी मंजिल पर खुद को गोली मार ली। गौरतलब है कि शिवराज सरकार ने प्रदेश में जिन पांच संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया था, उसमें से भय्यूजी महाराज भी एक थे लेकिन उन्होंने सरकार के इस पद को ठुकरा दिया था।

इंदौर: मध्यप्रदेश के हाईप्रोफाइल आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज ने खुद को गोली मार ली। गंभीर हालत में उन्हें इंदौर स्थित बॉम्बे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई। भय्यूजी महाराज ने खुद को गोली मारने से पहले एक सुसाइड नोट भी लिखा था। पुलिस को एक पन्ने का सुसाइड नोट मिला है। जिसमें लिखा गया है वो जिंदगी के तनाव से परेशान हो चुके हैं। मेरी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। मैं तनाव से तंग आकर खुदकुशी कर रहा हूं। जानकारी के मुताबिक महाराज ने दोपहर को सिल्वर स्प्रिंग स्थित अपने बंगले की दूसरी मंजिल पर खुद को गोली मार ली। गौरतलब है कि शिवराज सरकार ने प्रदेश में जिन पांच संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया था, उसमें से भय्यूजी महाराज भी एक थे लेकिन उन्होंने सरकार के इस पद को ठुकरा दिया था।

भय्यूजी महाराज का वास्तविक नाम उदयसिंह देशमुख था। इनका जन्म 29 अप्रैल 1968 में मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर में हुआ था। भय्यूजी के चहेते उन्हें भगवान सामान पूजते थे। भय्यूजी की पहली पत्नी का नाम माधवी था, जिनका दो साल पहले स्वर्गवास हो चुका है। 30 अप्रैल 2017 को शिवपुरी की डॉ. आयुषी से उन्होंने दूसरी शादी की थी।

सबसे थे राजनीतिक संबंध

केंद्रीय मंत्री विलासराव देशमुख से उनके करीबी संबंध थे। बीजेपी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत भी उनके भक्तों की सूची में शामिल थे। महाराष्ट्र की राजनीति में उन्हें संकटमोचक के तौर पर देखा जाता था। भय्यूजी के चहेतों के बीच धारणा है कि उन्हें भगवान दत्तात्रेय का आशीर्वाद हासिल था। महाराष्ट्र में उन्हें राष्ट्र संत का दर्जा मिला हुआ था। घंटों जल समाधि करने का उनका अनुभव रहा। राजनीतिक क्षेत्र में उनका खासा प्रभाव था। उनके ससुर महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे।

गृहस्थ रहते हुए संत जीवन

भय्यूजी महाराज गृहस्थ जीवन में रहते हुए संत-की जिंदगी जी रहे थे। उनकी वाणी में ओज स्पष्ट दिखाई देता था। उनकी एक बेटी कुहू है। भय्यूजी जरा दूजे किस्म के संत थे। एक किसान की तरह वह अपने खेतों को जोतते-बोते तो बढ़िया क्रिकेट भी खेलते थे। घुड़सवारी और तलवारबाजी में उनकी महारत थी तो वह कविताएं भी लिखते थे। जवानी में उन्होंने सियाराम शूटिंग शर्टिंग के लिए पोस्टर मॉडलिंग भी की थी। मजेदार यह है कि वह फेस रीडर भी थे।

 






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