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03/12/2017  :  20:54 HH:MM
खतरनाक: ऊपर हाई टेंशन बिजली का तार नीचे ज्वलनशील पेट्रोल की बिक्री
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आम लोगों की जिंदगी से खेल रहा प्रशासन ग़ाज़ियाबाद। दैनिक यूपी। ग़ाज़ियाबाद के इंदिरापुरम, मनकपुर, अभयखण्ड में आईओसी (इंडियन ऑयल कारपोरेशन ) के एक पेट्रोल पंप पर हाई टेंशन तार के नीचे पेट्रोल बेंचा जा रहा है।

खतरनाक : ऊपर हाई टेंशन बिजली का तार नीचे ज्वलनशील पेट्रोल की बिक्री
आम लोगों की जिंदगी से खेल रहा प्रशासन
ग़ाज़ियाबाद। दैनिक यूपी।
ग़ाज़ियाबाद के इंदिरापुरम, मनकपुर, अभयखण्ड में आईओसी (इंडियन ऑयल कारपोरेशन ) के एक पेट्रोल पंप पर हाई टेंशन तार के नीचे पेट्रोल बेंचा जा रहा है। मजे की बात है कि फायर विभाग ने इस जगह पर  मानकों की अनदेखी करके न सिर्फ एनओसी दे दी। एनओसी पर ब्रेक न लग जाये इसके लिए पहले एक रिपोर्ट में कह दिया कि पेट्रोल पंप की जगह पर तार है ही नही। दोबारा जांच का आदेश होने पर अलग रिपोर्ट दे दी गई कि यहां हाई टेंशन तार है लेकिन शिफ्ट हो जाएगा। बिजली विभाग से संपर्क करने पर पता चला कि यहाँ से तार शिफ्टिंग की कोई योजना फिलहाल नहीं है। जब आइओसी से पूंछताछ हुई तो उन्होंने जवाब दिया कि हमारा कोई सरोकार नहीं हमें एजेंसियों ने एनओसी दे दी है। हम् पेट्रोल बेंच रहे हैं। ये पूंछने पर कि नियमों को ताक पर रखकर एनओसी की बात तो छोड़िए हाई टेंशन तार के नीचे पेट्रोल पंप पर अगर आग लगी तो कौन जिम्मेदार होगा। सक्षम अधिकारियों ने चुप्पी साध ली। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरी योजना में बड़ा वित्तीय गड़बड़झाला हुआ है। राज्य सरकार के एक मंत्री खुद रुचि लेकर अधिकारियों पर नियम तोड़ने का दबाव बना रहे हैं।
गौरतलब है कि आईओसी ने हरित बेल्ट नियमों को ताक पर रखते हुए और हाई टेंशन तार के बीच पेट्रोल पंप लगाने का काम शुरू कर दिया। सवाल उठने के बाद हाई टेंशन वायर बीच सड़क पर शिफ्ट करने की योजना बिजली विभाग के साथ मिलकर बना ली गई। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों को ताक पर रखकर बीच सड़क पर बड़ा खंभा गाड़ दिया गया। स्थानीय लोग इस तरह की मनमानी से आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि बीच सड़क पर खंभा गाड़कर हाई टेंशन वायर को यहाँ शिफ्ट करने से आम जनजीवन खतरे में पड़ जायेगा।
 दैनिक यूपी की पड़ताल में पता चला है  कि पेट्रोल पंप के लिए एनओसी हासिल करने के लिए झूठी रिपोर्ट का सहारा लिया गया। पहले एनओसी इस आधार पर ली गई कि निर्माण स्थल पर हाई टेंशन वायर नहीं है। लेकिन सही जांच के लिए स्थानीय लोगों का दबाव बढ़ा तो फायर विभाग ने लिखकर दे दिया कि निर्माण स्थल पर हाई टेंशन वायर पाया गया। लेकिन इससे कोई खतरा नहीं है। बिजली विभाग भी नियमों की परवाह किये बिना हाई टेंशन तार को शिफ्ट करने की तैयारी में जुट गया। इसके लिए आईओसी और बिजली विभाग में करार होने की बात भी सामने आई है।
मामला उच्च स्तर पर संज्ञान में आने के बाद आईओसी के अधिकारियों ने गुमराह करने का काम शुरू कर दिया। पूरे मामले की जानकारी ट्वीट, ईमेल आदि के जरिये पीएमओ, राज्य के ऊर्जा विभाग, आईओसी, पेट्रोलियम मंत्रालय ओर राज्य के ऊर्जा विभाग को देकर अनुचित व भ्रष्ट  तरीके से निर्माण रोकने की मांग की गई। लेकिन अधिकारियों ने रहस्मय चुप्पी साध ली है। कहा जा रहा है निर्माण के पीछे बड़ा कॉकस काम कर रहा है। स्थानीय लोगों ने बड़े लेनदेन का भी आरोप लगाया है। निर्माण की अनियमितता को छिपाने के लिए ठोस बहाने तलाशे जा रहे हैं।
इस बीच आजिज आकर कुछ स्थानीय लोगों ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण में मामला दायर कर दिया है। इसमें आईओसी को भी पक्षकार बनाया गया है। गुरुवार को इस मामले में सुनवाई शुरू हुई और अगली तारीख 11 दिसंबर मुकर्रर कर दी गई है।
 फिलहाल पूरे मामले में जिस तरह की तत्परता आईओसी की ओर से दिखाई जा रही है उससे तरह तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। ग़ाज़ियाबाद से ताल्लुक रखने वाले एक मंत्री और उद्योगपति के साथ प्रशासन भी कठघरे में खड़ा नजर आ रहा है।

दैनिक यूपी का मत
हमारा मानना है कि पर्यावरण को ताक पर रखकर कोई भी निर्माण कार्य किया जाना घोर अनुचित है। इसके लिए कोई भी बहाना या आवरण उचित नही है। ग्रीन बेल्ट पहले से खतरे में है। पूरी दुनिया मे ये चिंता का विषय है। ऐसे में अगर जिम्मेदार संस्थाएं भी खुलेआम पर्यावरण मानकों की अवहेलना करेंगे तो आम लोगों को कौन जागरूक करेगा। अगर पेट्रोल पंप खोलना है तो उसकी जरूरत और व्यावहारिकता का परीक्षण होना चाहिए था। कोई ऐसी जगह चुनी जानी चाहिए जिससे पर्यावरण हितों को चोट न पहुंचे। आम लोगो का जनजीवन खतरे में न पड़े इसकी चिंता सबको करनी चाहिए। आखिर हाई टेंशन तार के नीचे आग लगी तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। बिजली विभाग, आइओसी या फिर जिला प्रशासन।






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