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दैनिक यूपी ब्यूरो
20/11/2017  :  09:59 HH:MM
जीएसटी में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं को नहीं देने पर कंपनियों पर गिरेगी गाज
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वित्त सचिव हसमुख अढ़‍िया ने कहा कि दुकानदार या कंपनियां यह दावा नहीं कर सकतीं कि स्टॉक खत्म होने से ऊंची कीमतें बरकरार रहेंगी। उन्होंने कहा, 'कंपनियां कीमतों में अंतर के लिए सरकार से इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकती हैं।

नई दिल्ली , सरकार ऐसी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है जो जीएसटी दर में कटौती के बावजूद इसका फायदा उपभोक्ताओं को नहीं दे रही हैं। इनमें एफएमसीजी क्षेत्र की कंपनियां भी शामिल हैं जिन्होंने दुकानदारों को कीमतों में तुरंत कटौती के लिए नहीं कहा है। वित्त सचिव हसमुख अढ़िया ने कहा कि दुकानदार या कंपनियां यह दावा नहीं कर सकतीं कि स्टॉक खत्म होने से ऊंची कीमतें बरकरार रहेंगी। उन्होंने कहा, 'कंपनियां कीमतों में अंतर के लिए सरकार से इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकती हैं। हमने इसके लिए प्रावधान बनाए हैं। लेकिन मैं उनकी यह दलील मानने को तैयार नहीं हूं कि वे पुराना स्टॉक खत्म होने तक उपभोक्ताओं को कम कीमत का फायदा नहीं देंगी।' अढ़िया ने कहा कि कंपनियों को 15 नवंबर से नई कीमतें लागू करनी चाहिए थीं।

 

 

जीएसटी परिषद ने इस महीने हुई अपनी पिछली बैठक में 178 वस्तुओं पर जीएसटी की दर 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दी थी। अढ़िया ने दूरदर्शन को दिए साक्षात्कार में कहा कि हर दुकानदार पर नजर नहीं रखी जा सकती है। इसलिए सरकार ने स्पष्ट किया है कि अगर कंपनियों को जीएसटी के मुनाफाखोरी निरोधक नियम से बचना है तो उन्हें यह सुनिश्चित करना कंपनियों की जिम्मेदारी होगी कि दुकानदार दरों में कटौती का फायदा तुरंत ग्राहक को दें। इस साक्षात्कार में बिज़नेस स्टैंडर्ड भी मौजूद था। उन्होंने कंपनियों को सलाह दी कि वे अपने उत्पादों की नई कीमतों के बारे में अखबारों में पारदर्शी तरीके से विज्ञापन दें। जिन वस्तुओं पर जीएसटी दर में कटौती की गई है, उनमें डिटरजेंट, सैनिटरी वेयर, सूटकेस, सौंदर्य प्रसाधन से जुड़े सामान, चॉकलेट, संगमरमर और ग्रेनाइट, वॉल पेपर, प्लाईवुड और स्टेशनरी का सामान शामिल है।

 

अढ़िया ने कहा, 'अपनी नई कीमतों के बारे में आपूर्ति शृंखला को बताना कंपनियों की जिम्मेदारी है। अगर उन्हें सरकार की मुनाफाखोरी निरोधक कार्रवाई से बचना है तो उन्हें वितरकों से लेकर थोक और खुदरा दुकानदारों को इस बारे में बताना होगा।'

 

उन्होंने कहा कि उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने कंपनियों को दिसंबर तक अधिकतम खुदरा मूल्य में बदलाव करने की अनुमति दी है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें तब तक इंतजार करना चाहिए। रेस्तराओं के लिए जीएसटी की नई दर पर संदेह दूर करते हुए वित्त सचिव ने कहा कि खासकर छोटे रेस्तराओं को इनपुट टैक्स क्रेडिट से बाहर रखना तर्कसंगत है। वहां से मुनाफाखोरी निरोधक प्रावधान में कार्रवाई के लिए ज्यादा मामले आने की संभावना नहीं है। अगर कोई कीमतें बढ़ाने की कोशिश करता है तो प्रतिस्पर्धा को अपना काम करना चाहिए। जीएसटी के कारण कर संग्रह प्रभावित होने की आशंका पर उन्होंने उम्मीद जताई कि यह बजट अनुमानों के मुताबिक होगा।

 

 

पिछले गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय मुनाफाखोरी निरोधक प्राधिकरण बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। तीन स्तरीय इस प्राधिकरण में स्थानीय स्तर की शिकायत को राज्य स्तरीय जांच समिति को भेजा जाएगा। दो राज्यों के बीच के मामलों को राष्ट्रीय स्तर पर गठित होने वाली स्थायी समिति को भेजा जाएगा। अगर समिति संतुष्ट होती है तो वह मामलों को जांच के लिए सेफगार्ड महानिदेशालय को भेजेगी जो अपनी रिपोर्ट प्राधिकरण को देगा।

 

कंपनियों को सरकार की सख्त हिदायत

दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों को देने में देरी बर्दाश्त नहीं

दुकानदारों को बताना कंपनियों की जिम्मेदारी

कीमतों में अंतर पर कंपनियां मांग सकती है इनपुट क्रेडिट टैक्स

जीएसटी परिषद ने 178 वस्तुओं पर घटाया है जीएसटी

 






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