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दैनिक यूपी ब्यूरो
17/11/2017  :  19:47 HH:MM
विराट कोहली की 'पसंद' टीम इंडिया पर पड़ रही भारी!
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कोलकाता टेस्ट के पहले दिन के खेल का अधिकांश हिस्सा बारिश की भेंट चढ़ गया, लेकिन जितना खेल हुआ उसमें टीम इंडिया के बल्लेबाज हैरान परेशान नजर आए और स्कोर 17 रन पर 3 विकेट हो गया. दूसरे दिन भी हाल बुरा है.

नई दिल्ली : विराट कोहली के नेतृत्व में टीम इंडिया इस समय बेहद कमजोर मानी जाने वाली टेस्ट टीम श्रीलंका के साथ सीरीज खेल रही है. कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्ड्न्स में खेले जा रहे सीरीज के पहले ही टेस्ट में श्रीलंकाई गेंदबाजों ने जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उससे टीम इंडिया सकते में है. हालांकि पहले दिन के खेल का अधिकांश हिस्सा बारिश की भेंट चढ़ गया, लेकिन जितना खेल हुआ उसमें टीम इंडिया के बल्लेबाज हैरान परेशान नजर आए और स्कोर 17 रन पर 3 विकेट हो गया. दूसरे दिन भी हाल बुरा है. वास्तव में विराट कोहली एंड टीम को यह उम्मीद ही नहीं थी कि श्रीलंका के गेंदबाज उनका ऐसा भी हश्र कर सकते हैं. वैसे इस हाल के लिए कुछ हद तक कप्तान विराट कोहली भी जिम्मेदार हैं.

 

विराट कोहली ने कोलकाता टेस्ट के लिए जिस तरह की टीम चुनी है, उस पर सवाल उठ रहे हैं. यह टेस्ट मैच शुरू होने से पहले ही एक्सपर्ट ने कहा था कि ईडन गार्डन्स की पिच तेज गेंदबाजों के लिए मददगार रहेगी. जाहिर है ऐसे में टीम संयोजन इसी के हिसाब से होना चाहिए था, लेकिन विराट कोहली ने पेसर फ्रेंडली विकेट को देखते हुए भी टीम में ऐसे ओपनर रखे, जो स्विंग को अच्छी तरह नहीं खेल पाए.

 

मुरली विजय पर धवन/राहुल को वरीयता

कोलकाता टेस्ट में खेल रहे ओपनर केएल राहुल ने शून्य, तो शिखर धवन ने 8 रन बनाए. खास बात यह कि दोनों ही स्विंग गेंदबाजी के आगे जूझते नजर आए, जबकि लंबे समय से टेस्ट मैचों में ओपनर के रूप में शानदार प्रदर्शन कर रहे मुरली विजय बेंच में बैठे हुए हैं. मुरली एक ऐसे बल्लेबाज हैं, जो तेज और स्पिन दोनों तरह के विकेटों पर खेलने में तकनीक रूप से दक्ष हैं. वह एक संपूर्ण टेस्ट ओपनर हैं. विजय ने केवल घरेलू मैदानों पर ही नहीं, विदेशी जमीन पर भी अपने झंडे गाड़े हैं. फिर भी विराट ने अपने पसंदीदा शिखर धवन और केएल राहुल पर भरोसा जताया और यह दोनों टीम इंडिया को वांछित शुरुआत नहीं दिला सके.

 

विजय के साथ दूसरी बार हुआ ऐसा

वैसे मुरली विजय के साथ विराट कोहली ने पहली बार ऐसा नहीं किया है. पिछले साल भी वेस्टइंडीज के खिलाफ सेंट लूसिया टेस्ट मैच में उन्होंने विजय को फिट होने के बावजूद प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं बनाया था और धवन फेल रहे थे.

 

बैटिंग ऑर्डर भी सही नहीं

टीम इंडिया के पांच बल्लेबाज 74 रन पर ही लौट गए, जिनमें से केवल चेतेश्वर पुजारा ही दहाई का आंकड़ा पार कर सके और जमे रहे. विराट ने बैटिंग ऑर्डर भी सही नहीं रखा. टीम इंडिया के 30 रन पर चार विकेट लौट गए थे, फिर भी कोहली ने आर अश्विन को ऋद्धिमान साहा से पहले उतार दिया. सबको पता है कि साहा तकनीकी रूप से अश्विन से बेहतर हैं, मतलब एक बार फिर विराट ने अपने पसंदीदा को भेज दिया.

 

विराट भी स्विंग से दिखे परेशान

सुरंगा लकमल ने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए सपाट विकेट पर धमाल मचाने वाले भारतीय दिग्गजों को खासा परेशान किया. खुद कप्तान विराट कोहली भी स्विंग से परेशान दिखे. कप्तान कोहली ने 11 गेंदो का सामना किया, लेकिन खाता नहीं खोल पाए. ऐसा लगता है कि इंग्लैंड के गेंदबाज जेम्स एंडरसन ने उनके बारे में सही कहा था कि इंग्लैंड की स्विंगिंग कंडीशन में उनकी परीक्षा होगी. वैसे हमने स्विंग होती गेंदों पर उन्हें कई बार परेशान होते देखा है.

 

तकनीकी दक्षता बेहद जरूरी

तेज गेंदबाजी के सामने टेस्ट मैचों में तकनीकी दक्षता पहली शर्त है. ओपनर के रूप में किसी भी बल्लेबाज को लंबे स्पेल तक उनका सामना करना होता है. वीरेंद्र सहवाग जैसे कुछ बिरले बल्लेबाज ही हैं जो मूलतः ओपनर नहीं थे, लेकिन अच्छा प्रदर्शन किया. अन्यथा वर्ल्ड क्रिकेट के ज्यादातर बड़े ओपनर तकनीकी रूप से काफी दक्ष रहे हैं और उनकी सफलता में इसका बड़ा रोल रहा है. भारत से ही लीजिए. सुनील गावस्कर इसके श्रेष्ठ उदाहरण हैं. गावस्कर ने वेस्टइंडीज के माइकल होल्डिंग, मैल्कम मार्शल, कॉर्टनी वाल्श, ऑस्ट्रेलिया के डेनिस लिली जैसे तेज गेंदबाजों का बिना हेलमेट ही बखूबी सामना किया था. अगर वह ऐसा कर पाए, तो इसमें उनकी तकनीक का ही रोल रहा. उन्होंने विंडीज के तेज विकेटों पर उनके ही खिलाफ कई शतक ठोके और 13 मैचों में 1404 रन बनाए थे. गावस्कर के 32 में से सबसे अधिक 13 शतक भी तेज आक्रमण वाले विंडीज के खिलाफ ही निकले. मतलब स्विंग के आगे तकनीक ही काम आती है...






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