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दैनिक यूपी ब्यूरो
11/03/2017  :  16:17 HH:MM
यह भाजपा की नहीं पीएम मोदी की जीत
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उत्तरप्रदेश चुनाव की प्रचंड प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जीत है। बिल्कुल ठीक कहा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने यह भारतीय राजनीति में नए युग की शुरुआत है। और इसे मोदी युग कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। एक समय था जब इंदिरा इज इंडिया। इंडिया इज इंदिरा का नारा गंूजता था। समय बदल गया है। अब हर हर मोदी घर घर मोदी का नारा गंूज रहा है। पंजाब में कांग्रेस जरूर जीती है लेकिन वहां भी राहुल गांधी का कोई योगदान नहीं है।


यह भाजपा की नहीं पीएम मोदी की जीत 


अंजना पाराशर
उत्तरप्रदेश चुनाव की प्रचंड प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जीत है। बिल्कुल ठीक कहा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने यह भारतीय राजनीति में नए युग की शुरुआत है। और इसे मोदी युग कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। एक समय था जब इंदिरा इज इंडिया। इंडिया इज इंदिरा का नारा गंूजता था। समय बदल गया है। अब हर हर मोदी घर घर मोदी का नारा गंूज रहा है। पंजाब में कांग्रेस जरूर जीती है लेकिन वहां भी राहुल गांधी का कोई योगदान नहीं है। कैप्टन अमरिंदर सिंह का नेतृत्व और अकालियों के खिलाफ गुस्से की मिली जुली परिणति कांग्रेस को इस सूबे में जीत के रूप में मिली है।
लेकिन उत्तरप्रदेश की जीत सबपर भारी है। दरअसल यूपी एक राज्य नहीं है। कई राज्यों को मिला दें तो वहां के बराबर विधानसभा सीट और जनसंख्या अकेले यूपी में है। यूपी ने पीएम मोदी की इतनी ताकत दी है कि उनपर सवाल उठाने वालों के मंुह पर ताला लग गया है। किसी को भी उम्मीद नहीं रही होगी कि ऐसा होने वाला है। बिल्कुल लोकसभा चुनाव की कहानी नए सिरे से सामने घूम गई। यह कहने में संकोच नहीं होना चाहिए कि आज की तारीख में पीएम मोदी के आसपास कोई भी नेता नहीं है। उनकी लोकप्रियता उसी तरह से बरकरार है जैसे लोकसभा चुनाव के वक्त थी।
इस जीत के कई मायने हैं। उत्तरप्रदेश में भाजपा को मिली जबरदस्त जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अब गवर्नेंस के एजेंडे पर ज्यादा मजबूती से फैसले कर सकते हैं। सुधारों की राह पर वे बेरोकटोक तरीके से आगे बढ़ सकते हैं। भ्रष्टाचार के मोरचे पर वे ज्यादा सख्त नजर आएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत के एक ताकतवर नेता के रुप में विश्वमंच पर उनकी साख में और बढ़ोत्तरी होगी।
सेंटर फॉर द स्टडी आफ डेवलपिंग सोसाइटीज - सीएसडीएस के निदेशक संजय कुमार का कहना है कि यूपी विधानसभा के चुनाव नतीजों ने पीएम मोदी को ज्यादा ताकत दी है। इससे सरकार में उनकी पकड़ पहले से ज्यादा मजबूत होगी। वे ज्यादा आक्रामक तरीके से फैसले ले सकते हैं। साथ ही मन मुताबिक बदलाव कर सकेंगे। 
उत्तरप्रदेश व उत्तराखंड जैसे राज्यों के लिए केंद्र से बड़े फैसलों पर तेजी से मुहर लगेगी। केंद्र व राज्य दोनों जगहों पर एक सरकार का फायदा विकास योजनाओं के लिहाज से मिलेगा।  मेट्रो के लिए अखिलेश यादव प्रधानमंत्री से जिस एनओसी की मांग कर रहे थे उसका रास्ता अब साफ हो गया है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर चुनाव में अपेक्षित संख्या नहीं मिलती तो केंद्रीय स्तर पर गवर्नेंस का एजेंडा पटरी से उत सकता था। विरोधी दल सरकार के खिलाफ लामबंद हो सकते थे। लेकिन अब यह संभावना नहीं रही। बल्कि विपक्ष को अपने कुनबा बचाना मुश्किल होगा।
भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडा आगे बढ़ाते हुए बेनामी संपत्तियों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की सरकार तेजी से आगे बढ़ सकती है। लोकपाल के गठन पर फैसला हो सकता है। जीएसटी के लंबित विधेयक पारित कराए जा सकते है। भूमि अधिग्रहण को लेकर भी सरकार ठोस फैसले कर सकती है। भ्रष्टाचार के लंबित पड़े मामलों की जांच में तेजी आएगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव सभाओं में संकेत दिया था कि भाजपा सरकार बनी तो उत्तरप्रदेश में घोटालों की जांच होगी। अखिलेश सरकार के कामकाज के अलावा मायावती राज के विवादित फैसले राडार पर होंगे।
 






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