Breaking News
वल्र्ड कप : आज क्रिकेट को मिल जाएगा नया बादशाह  |   वर्ल्ड कप 2019: सेमीफाइनल में न्यू जीलैंड से भिड़ेगा भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में होगी टक्कर  |   India vs Bangladesh CWC 2019: बांग्लादेश को हराकर टीम इंडिया सेमीफाइनल में पहुंची  |   भारत-बांग्लादेश में मुकाबला आज  |   पुणे में दर्दनाक हादसा, दीवार ढहने से 17 लोगों की मौत, कई घायल  |  

धर्म

माता वैष्णों देवी दर्शन यात्रा व्यवस्था और कन्या व ब्राह्मण पूजन से अभिभूत हैं श्रद्धालु
गुरुग्राम विधायक उमेश अग्रवाल के संयोजन में गुरुग्राम से चल रही माता वैष्णों देवी दर्शन यात्रा 2019 के तहत सात जून की सुबह तक पांच हजार से अधिक श्रद्धालु माता के दर्शन कर लौट चुके हैं जबकि दो हजार से अधिक तीर्थयात्री कटरा से भवन के रास्ते में हैं। शनिवार को करीब दो हजार तीर्थयात्री माता वैष्णों देवी के लिए रवाना होंगे।
 
16 सौ से अधिक वैष्णों देवी तीर्थ यात्रियों को रवाना किया गया
गुरुग्राम माता वैष्णों देवी दर्शन को मंगलवार को चौथे जत्थे में 16 सौ से अधिक श्रद्धालु कटरा के लिए रवाना हुए। विधायक उमेश अग्रवाल की मौजूदगी में एमडीएच मशाले के चेयरमैन प्रसिद्ध वयोवृद्ध उद्योगपति महाशय धर्मपाल और गुरुग्राम की मेयर मधु आजाद ने चंदू गांव स्थित रामगढ़ फॉर्म से झंडी दिखाकर यात्रियों को रवाना किया।
 
सौभाग्य देने वाला व्रत- वट सावित्री व्रत
वट सावित्री व्रत सौभाग्य को देने वाला और संतान की प्राप्ति में सहायता देने वाला व्रत माना गया है। भारतीय संस्कृति में यह व्रत आदर्श नारीत्व का प्रतीक बन चुका है। इस व्रत की तिथि को लेकर भिन्न मत हैं। स्कंद पुराण तथा भविष्योत्तर पुराण के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को यह व्रत करने का विधान है, वहीं निर्णयामृत आदि के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या को व्रत करने की बात कही गई है।
 
बद्रीनाथ धाम से जुड़ी है ये मान्यता
बद्रीनाथ धाम हिन्दुओं के चार धामों में से एक धाम है। यह अलकानंदा नदी के किनारे उत्तराखंड राज्य में स्थित है। यहां भगवान विष्णु 6 माह निद्रा में रहते हैं और 6 माह जागते हैं। बद्रीनाथ धाम से जुड़ी ये बातें अहम हैं। बद्रीनाथ धाम से जुड़ी एक मान्यता है कि जो आए बदरी, वो न आए ओदरी। इसका मतलब जो व्यक्ति बद्रीनाथ के दर्शन एक बार कर लेता है उसे दोबारा माता के गर्भ में नहीं प्रवेश करना पड़ता।
 
महर्षि कश्यप का अवतार दिवस धूमधाम से मना
घरौंडा सृष्टि रचयिता महर्षि कश्यप का अवतार दिवस बड़ी श्रद्धा और धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर शहर के वार्ड संख्या सात स्थित शिव मंदिर में कश्यप समाज की और से विश्व शान्ति व सृष्टि सुरक्षा के लिए हवन किया गया। समाज के सम्मानित लोगो ने सप्त महर्षि कश्यप व गुरु कालिदास की चरणों में नमन करते हुए पुष्प अर्पित किये। कार्यक्रम में बतौर मुख्याथिति पहुचे आर. डी कश्यप ने कहा की सृष्टि सर्जन के बाद महर्षि कश्यप ने समाज को मानवता का सन्देश दिया है और इस धरा पर जीवन सभी के तालमेल से बेहतर होगा।
 
व्यक्ति को हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए: स्वामी ज्ञानानंद जी
करनाल मुख्यमंत्री मनोहर लाल के ओ.एस.डी. अमरेंद्र सिंह के दादा स्वर्गीय चंद्र बली सिंह की श्रद्धांजलि सभा का आयोजन आज सैक्टर-14 स्थित कृष्णा मंदिर में किया गया। भारी संख्या में राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों व लोगों ने स्वर्गीय चंद्र बली सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
 
नानक जी के 550वें जन्म उत्सव पर कार्यक्रम
गुरुग्राम विश्वविद्यालय में गुरु नानक देव जी के 550वें जन्म उत्सव को लेकर गुरुग्राम विश्वविद्यालय के साथ श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय ने ग्लोबल इंसप्रेशन एंड एनलाइटमेंट ऑर्गनाइजेशन ऑफ गीता के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि समारोह में महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने शिरकत की।
 
अक्षय तृतीया : शुभ मुहूर्त के लिए विशेष महत्व
अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है. इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किंतु वैशाख माह की तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है।
 
सौभाग्य का प्रतीक अर्थात् वरुथिनी एकादशी व्रत
इस बार वरुथिनी एकादशी व्रत मंगलवार 30 अप्रैल 2019 को है। इस व्रत की अपनी महत्वता है। कहा जाता है कि जो वरुथिनी एकादशी की व्रत पूजा करता है उसे भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है। व्रतधारी को सौभाग्य प्राप्त होता है, इस प्रकार यह व्रत सौभाग्यशाली ही रख पाते हैं।
 
भगवान भैरव की साधना-अराधना का दिन
भगवान भैरव शक्तिशाली रुद्र रुप के लिए जाने जाते हैं। भगवान भैरव एक ऐसे देवता हैं जिनकी साधना करने वाले भक्त पर किसी भी प्रकार की ऊपरी बाधा, भूत-प्रेत, जादू-टोने आदि का खतरा नहीं होता है। ऐसे ही शक्तिशाली भगवान भैरव की प्रत्येक माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी को साधना-अराधना होती है। कालाष्टमी की तिथि पर भगवान भैरव की विशेष रूप से साधना आराधना का अपना ही महत्व है।
 
यहां है भगवान परशुराम का तप स्थल
झारखंड के गुमला जिले में भगवान परशुराम का तप स्थल है। यह जगह रांची से करीब 150 किमी दूर है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान परशुराम ने यहां शिव की घोर उपासना की थी। यहीं उन्होंने अपने परशु यानी फरसे को धरती पर रख दिया था। इस फरसे की ऊपरी आकृति कुछ त्रिशूल से मिलतीजुलती है।
 
श्री दादी शरणम् द्वारा आयोजित श्री नारायणी भजनोत्सव
गुरुग्रामत्नप्रकृति के संरक्षण और अपने बुजुर्ग माता पिता को समर्पित अपनी कुल देवी नारायणी माँ श्री राणी सती जी की सनातन धर्म पूजा से प्रेरित यह संस्था च्च् दादी शरणम् गुरुग्राम हरियाणा ने अपना तृतीय वार्षिकोत्सव भजन एवं सामाजिक उत्सव 21 अप्रैल रविवार को गुरुग्राम स्थित कोरस बैक्वेट में बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाया गया।
 
गुड फ्रायडे : त्याग और बलिदान का दिन
पुण्य शुक्रवार यानी गुड फ्र ायडे ईसाई धर्म का पालन करने वालों के लिए एक पवित्र एवं त्याग का दिन होता हैं। इस दिन ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। इस दिन ईसाई समाज के लोग ईसा मसीह की कुर्बानी, त्याग, बलिदान को याद करते हैं। इसके लिए ईसाई समाज के लोग 40 दिन के उपवास परहेज एवं प्रार्थना के साथ तैयारी करते हैं।
 
भगवान महावीर जयंती पर विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम
गुरुग्राम भगवान महावीर जयंती के उपलक्ष्य में जैन समुदाय द्वारा गुरुग्राम शहर में अनेक धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। श्री जैन महासभा के संरक्षक राजकुमार जैन, प्रधान डॉ. वी के जैन, महामंत्री देवेन्द्र जैन, कोषाध्यक्ष सतीश जैन ने बताया कि कार्यक्रम के प्रारम्भ में महावीर पार्क जैन मन्दिर में प्रात: दूध से अभिषेक धारा हुई और एक भव्य रथ यात्रा का आयोजन किया गया। रथ में भगवान महावीर की प्रतिमां को सजाकर सदर बाजार, सोहना चैक, गुरूद्वारा रोड, अग्रसेन चैक से होते हुए महावीर पार्क जैन मन्दिर से आरम्भ कर वहीं पर समापन किया गया।
 
चैत्र नवरात्र अष्टमी पर विशेष शक्ति से भरपूर हैं शक्तिपीठ
जिस प्रकार शिव के द्वादश ज्योर्तिलिंग विशेष महत्व रखते हैं, ठीक उसी प्रकार देवी के शक्ति पीठ भी धार्मिक सद्भाव का आधार हैं। ये शक्तिपीठ आध्यात्मिक के साथ ही बौद्धिक और दार्शनिक महत्व भी रखते हैं। इन शक्तिपीठों का निर्माण बुद्घ के स्तूपों की तर्ज पर किया गया। जिस प्रकार स्तूपों में बुद्घ के अवशेष रखे गए हैं, उसी प्रकार शक्तिपीठों में माता सती के काल्पनिक अवशेष रखे हैं।
 
चैत्र नवरात्र का सातवां दिन जीवन को मंगलमय बनातीं माता कालरात्रि
चैत्र नवरात्र के सातवें दिन माता दुर्गा के कालरात्रि रूप की पूजा की जाती है। धर्म शास्‍त्रों के अनुसार बुरी शक्तियों से पृथ्‍वी को बचाने और पाप को रोकने के लिए माता ने अपने तेज से इस रूप को उत्‍पन्‍न किया था। मॉं दुर्गा के सातवें स्वरूप माता कालरात्रि का रंग काला होने के कारण ही इन्हें कालरात्रि कहा गया।
 
चैत्र नवरात्र का छठां दिन भक्तों को वरदान देने वाली कात्यायनी
चैत्र नवरात्र में माता दुर्गा के षष्ठी रूप माता कात्यायनी की पूजा की जाती है। धार्मिक शास्त्र अनुसार महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी इच्छा के अनुसार ही उन्हें पुत्री के रूप मे देवी प्राप्त हुईं थी। महर्षि कात्यायन ने इनका पालन-पोषण किया इसीलये इस देवी को कात्यायनी कहा गया। माता कात्यायनी की उपासना का मंत्र, चंद्र हासोज्ज वलकरा शार्दू लवर वाहना।
 
स्कंदमाता की पूजा से मिलेगा संतान सुख
चैत्र नवरात्र के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा का विधान है। स्कंदमाता की चार भुजाएँ हैं। इनके दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजा, जो ऊपर की ओर उठी हुई है, उसमें कमल पुष्प है। बाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा में वरमुद्रा में तथा नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है उसमें भी कमल पुष्प लिए हुए हैं। माता का वर्ण पूर्णत: शुभ्र है। माता कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं।
 
नवरात्रि पर्व के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा
कूष्माण्डेति चतुर्थकम् -सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराह्रश्वलुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे।। कहा जाता है कि बह्मांड की उत्पत्ति कुष्मांडा देवी द्वारा की गयी है। अष्टभुजी मॉ कुष्मांडा नवरात्रि के चौथे दिन पूजी जाती है। इनकी पूजा से मनुष्य यश कीर्ति पाकर दीर्घायु होता है और इस लोक के सुख भोगकर मोक्ष को प्राप्त करता है। इस भव की यातनाओं से मुक्ति पाने के लिए इनका पूजन-पाठ श्रद्धा-युक्त होकर करना चाहिए। माँ दुर्गा जी के चौथे स्वरूप का नाम कुष्माण्डा है।
 
हिंदू नव संवत्सर अर्थात् नववर्ष प्रतिपदा
भारतीय नववर्ष का शुभारंभ चत्र्ै ा शक्ु ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है। चैत्र महीने के पहले दिन नए साल की शुरूआत के रूप में गुड़ी पड़वा मनाते हैं। भारतीय नववर्ष का पहला दिन यानि सृष्टि का आरम्भ दिवस, कलियुग का प्रारम्भ, विक्रम् संवत् जैसे प्राचीन संवत का प्रथम दिन, श्रीराम एवं युधिष्ठिर का राज्याभिषेक दिवस, मां दुर्गा की साधना चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिवस, आर्य समाज का स्थापना दिवस, संत झूलेलाल जयंती, प्रखर देशभक्त डॉ. केशवराव हेडगेवार जी का जन्मदिवस आदि।
 

CopyRight 2016 DanikUp.com